Rajasthan Election: बीजेपी को अब क्यों महसूस हुई वसुंधरा राजे की अहमियत?

राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी की पहली लिस्ट जारी होने के बाद कहा जा रहा था कि पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को पूरी तरह से किनारे करने का मन बना लिया है। पार्टी ने वैसे ही किसी को सीएम पद का चेहरा पेश न करके, उन्हें एक तरह से रेड सिग्नल देने की कोशिश की थी। लेकिन, भाजपा की दूसरी लिस्ट में पूरी कहानी ही बदली नजर आ रही है।

शनिवार को बीजेपी ने राजस्थान के लिए अपने 83 उम्मीदवारों की जो लिस्ट जारी की है, उसमें से 20 से ज्यादा वसुंधरा समर्थकों के नाम बताए जा रहे हैं। इस लिस्ट को देखने से लगता है कि पार्टी ने राज्य में अपने सभी गुटों को टिकट में पर्याप्त भागीदारी देने की कोशिश की है।

rajasthan bjp and vasundhra

पहली लिस्ट के बाद कई जगहों पर भाजपा का हुआ विरोध
दरअसल, भाजपा ने जो राजस्थान के लिए पहली लिस्ट जारी की थी, उसके बाद खुद को अनुशासित पार्टी होने का दावा करने वाली पार्टी को कई सीटों पर अप्रत्याशित विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी ने 41 प्रत्याशियों की लिस्ट में जिन 6 सीटों पर लोकसभा सांसदों को टिकट दिया है, उन सब जगह पर बीजेपी को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। टिकट के कई स्थानीय दावेदारों ने तो निर्दलीय चुनाव लड़ने की भी घोषणा कर रखी है।

वसुंधरा समर्थकों के टिकट कटने पर हुआ भारी विरोध
पार्टी को सबसे ज्यादा जिस सीट पर विरोध का सामना करना पड़ा है, वह जयपुर की झोटवाड़ा सीट है। यहां पूर्व केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के खिलाफ पूर्व विधायक राजपाल सिंह शेखावत ने खुलेआम विरोध का बिगुल फूंक रखा है। शेखावत को राजे का करीबी माना जाता है। यही नहीं, नगर से अनिता सिंह गुर्जर और लाडपुरा से भवानी सिंह राजावत भी टिकट नहीं मिलने से नाराज बताए जा रहे हैं। इन सबकी वसुंधरा के वफादारों में गिनती होती है।

'ज्यादातर जीते हुए लोगों को दिया टिकट'
वनइंडिया ने राजस्थान में टिकट बंटवारे को लेकर बीजेपी नेतृत्व के अचानक हृदय परिवर्तन की वजहों को लेकर आरएसएस और बीजेपी से जुड़े एक खास सूत्र से बात की है। उन्होंने नाम नहीं जाहिर होने देने की शर्त पर कहा है, 'जिन लोगों को टिकट दिया है, वे सीटिंग लोग हैं.....इस लिस्ट में ज्यादातर जीते हुए लोग हैं......कोई तीन बार, कोई चार बार, कोई दो बार का विधायक है....पीछे तो काट दिया, क्योंकि बहाना मिल गया कि हारे हुए हैं....लेकिन अभी क्या बहाना बनाते.....'

'ताकि वसुंधरा की उम्मीद बरकरार रहे'
जब हमने और कुरेदने की कोशिश की तो उन्होंने कहा, 'यह भी तो दिखाना था कि आप (वसुंधरा राजे) रेस में हो.....इससे ऐसा रहता है कि नहीं मेरी बात भी रख रहे हैं.....ताकि उस स्तर पर विरोध न हो सके.....मतलब की उन्हें (पूर्व सीएम) लगेगा कि नंबर है...अभी लाइन में हैं.....उनको लगेगा कि अगर सीटें कम आती हैं....जैसे कि पिछली बार अशोक गहलोत के समय में हुआ था.....गहलोत ने भी यही प्लानिंग की थी कि ज्यादा सीटें आ गईं तो हाई कमान की चलेगी......'

मतलब, बीजेपी चाहती है कि वसुंधरा राजे अपनी ओर से प्रचार में कोई कमी ना रखें या इस तरह का विरोध न शुरू हो जाए, जिससे कि पार्टी को वाकई दिक्कत हो जाए। उन्होंने कहा कि 'विरोध भी ज्यादा न हो जाए....ज्यादा विरोध हो जाने पर फिर क्या कर पाएंगे.....लेकिन, मेन चीज तो यही है कि ज्यादातर जीते हुए लोग ही हैं......'

भाजपा ने राजस्थान की दूसरी लिस्ट में वसुंधरा के जिन करीबियों को टिकट दिया है, उनमें प्रताप सिंह सिंघवी, काली चरण सराफ, सिद्धि कुमारी, सामाराम गरासिया, कैलाश वर्मा, अनिता भदेल, श्रीचंद कृपलानी, नरपत राजवी, ओटाराम देवासी, गुरदीप शाहपीणी, रामस्वरूप लांबा, मंजू बाघमार, संतोष अहलावत, गोविंद प्रसाद, नरेंद्र नागर, बिहारीलाल बिश्नोई, कालूराम मेघवाल, नरेंद्र नागर, कैलाश मीणा, ओटाराम देवासी, पुष्पेंद्र सिंह, गोपीचंद मीणा, छगन सिंह, संतोष बावरी, शोभा चौहान, जगसीराम कोली, अभिषेक मटोरिया, रामस्वरूप लांबा और मानसिंह किनसरिया के नाम शामिल है।

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