बेटे वैभव की हार के लिए गहलोत ने सचिन पायलट को ठहराया जिम्मेदार
जयपुर। लोकसभा चुनाव में राजस्थान में कांग्रेस को मिली करारी हार से राज्य में अंतर्कलह बढ़ती ही जा रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बेटे वैभव गहलोत की जोधपुर सीट से हार के लिए सचिन पायलट को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि सचिन पायलट ने गहलोत के इस बयान पर हैरानी जताते हुए प्रतिक्रिया देने से इनकार का दिया। आपको बता दें कि वैभव गहलोत जोधपुर लोकसभा सीट से चुनाव हार गए हैं। उन्हें भाजपा के गजेंद्र सिंह शेखावत ने 2.74 लाख वोटों से शिकस्त दी। इसी लोकसभा के अंतर्गत सरदारपुरा विधानसभा सीट आती है जहां से गहलोत विधायक हैं।

जोधपुर सीट का पूरा पोस्टमॉर्टम किया जाना चाहिए
एबीपी न्यूज को दिए इंटरव्यू में गहलोत से पूछा गया कि क्या यह सच है कि जोधपुर से आपके बेटे का नाम पायलट ने ही सुझाया था? इस पर जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि यदि ऐसा है तो अच्छी बात है यह हम दोनों के बीच मतभेद की खबरों को खारिज करती है।' उन्होंने आगे कहा कि 'पायलट साहब ने यह भी कहा था कि वह बड़े अंतर से जीतेगा, क्योंकि हमारे वहां 6 विधायक हैं, और हमारा चुनाव अभियान बढ़िया था। उन्होंने कहा मुझे लगता है कि उन्हें वैभव की हार की जिम्मेदारी तो लेनी चाहिेए। जोधपुर में पार्टी की हार का पूरी पोस्टमॉर्टम होगा कि आखिर वह इस सीट से क्यों नहीं जीत पाए।

पायलट ने कहा था कि हम जोधपुर जीतने वाले हैं
जब गहलोत से पूछा गया कि क्या उन्हें सच में लगता है कि जोधपुर में मिली हार के लिए पायलट जिम्मेदार हैं तो उन्होंने कहा, 'पायलट ने कहा था कि हम जोधपुर जीतने वाले हैं और उन्होंने वैभव के लिए पार्टी का टिकट लिया। लेकिन हम सभी 25 सीटें हार गए। यदि कोई कहता है कि मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमिटी को जिम्मेदारी लेना चाहिए तो मुझे लगता है कि यह सामूहिक जिम्मेदारी है।' गहलोत का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब कुछ दिनों पहले ही पायलट के समर्थकों ने कहा था कि मुख्यमंत्री के काम करने के रवैये के कारण हमें राज्य में हार मिली है।

गहलोत-पायलट के बीच चल रहा सियासी संघर्ष अब और अधिक बढ़ सकता है
विधानसभा चुनाव में जीत के बाद से ही गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चल रहा सियासी संघर्ष अब और अधिक बढ़ सकता है। मतदाताओं का जनादेश वाकई हैरानी भरा है। करीब पांच माह पूर्व विधानसभा चुनाव में लोगों ने कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाया था। लेकिन पांच माह में ही स्थिति बदल गई । 25 लोकसभा सीटों में अपने चमकदार प्रदर्शन के बाद भाजपा का हौसला बढ़ा है,जबकि कांग्रेस पार्टी सकते की सी हालत में है।
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