Indian Railway: ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट का दौर होगा खत्म, रेलवे ने AI से कंफर्म टिकट देने का खोजा जुगाड़
रेलवे ने आर्टिफिशियल इन्टेलिजन्स पर जो ट्रायल किया है, उससे यात्रियों को टिकट बुकिंग करते समय ही अधिक से अधिक कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ गई है। अब वेटिंग लिस्ट छोी हो सकती है।

रेलवे यात्रियों को वेटिंग लिस्ट वाला टिकट मिलने की समस्या जल्द ही बीते दिनों की बात हो सकती है। भारतीय रेल पिछले दो साल से टेक्नोलॉजी के जरिए इसका समाधान खोज रहा था। ट्रायल के जो नतीजे आए हैं, वह बहुत ही सकारात्मक हैं और संभावना है कि आने वाले दिनों में वेट लिस्ट वाले यात्रियों की संख्या काफी कम हो जाएगी और अधिकतर यात्रियों को बुकिंग के समय ही कंफर्म टिकट मिल जाया करेगा। मतलब, ज्यादातर लोगों को चार्ट निकलने तक का इंतजार नहीं करना होगा। यानि अब अंतिम समय में टिकट कंफर्म नहीं होने की मायूसी ज्यादातर लोगों को नहीं झेलनी पड़ेगी।
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कंफर्म टिकट देने वाला ट्रायल सफल रहा
ट्रेनों में सफर करने वाले लोग ही जानते हैं कि अगर टिकट वेटिंग लिस्ट में है तो फिर कैसी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। लेकिन, भारतीय रेलवे को आर्टिफिशियल इन्टेलिजन्स (AI) के जरिए इस समस्या का भी समाधान मिलता नजर आ रहा है। अगर सबकुछ तय कार्यक्रम के तहत चला तो, लंबी वेटिंग लिस्ट वाली स्थिति बीते जमाने की बात हो सकती है और अधिकतर यात्रियों को कंफर्म टिकट मिल सकता है। यह खुशी सिर्फ वही लोग अनुभव कर सकते हैं, जो वेटिंग लिस्ट वाली पीड़ा झेलते आए हैं। AI आधारित इस कार्यक्रम के जरिए पहली बार 200 ट्रेनों में टिकट इसी तरह से जारी किया गया है; और अधिकतर लोगों को कंफर्म टिकट ही मिला है। इसकी वजह से इन ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट बहुत ही छोटी रह गई।

आर्टिफिशियल इन्टेलिजन्स पर दो साल से काम चल रहा था
दरअसल, भारतीय रेलवे ने वेटिंग लिस्ट वाले टिकट से जुड़ी हमेशा की समस्या का समाधान खोजने के लिए आर्टिफिशियल इन्टेलिजन्स (AI) पर आधारित एक ट्रायल पूरा किया है, जिसके परिणाम काफी सकारात्मक लग रहे हैं। रेलवे इस प्रोजेक्ट पर पिछले दो साल से काम कर रहा था। इसके तहत आर्टिफिशियल इन्टेलिजन्स को पिछले कुछ वर्षों का टिकट बुकिंग डेटा और बुकिंग के ट्रेंड के बारे में बताया गया। मकसद यह पता लगाना था कि किन स्टेशनों के बीच और किस समय बर्थ मिलने की संभावना हो सकती है।

आइडियल ट्रेन प्रोफाइल
इस आर्टिफिशियल इन्टेलिजन्स मॉड्यूल को रेलवे के अपने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट संस्था सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम (CRIS) ने तैयार किया है। इसे Ideal Train Profile का नाम दिया गया है। जिन ट्रेनों का ऊपर जिक्र हुआ, इस सिस्टम में पहले यह डेटा डाले गए कि उनमें कितने लाख लोगों ने टिकट बुक किए ? किस स्टेशन से कहां तक के लिए बुकिंग हुई ? कब कंफर्म टिकट नहीं जारी हो पाया ? यात्रा के किन हिस्सों के बीच सीट खाली रही? इस तरह के पिछले तीन साल के आंकड़े आर्टिफिशियल इन्टेलिजन्स मॉड्यूल में डाले गए।

टिकट बुकिंग के लिए इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी ?
जब रेलवे के अधिकारी नीतिगत मसलों पर चर्चा के लिए बैठते हैं तो उनके सामने यह बहस का मुद्दा होता है कि कैसे हर सेक्टर में डिमांड के मुताबिक ट्रेनों की संख्या व्यवाहरिक तौर पर बढ़ा माना मुमकिन नहीं है। लेकिन, एक यात्री को अगर ट्रेन का कंफर्म टिकट नहीं मिलता है तो वह दूसरा विकल्प चुनता है। वह दूरी और खर्च के हिसाब से फ्लाइट में टिकट बुक करता है या फिर सड़क मार्ग वाला विकल्प अपनाने को मजबूर होता है। जबकि, उसकी प्राथमिकता ट्रेन में ही यात्रा करने की रहती है। इसलिए यह आवश्यकता महसूस की गई कि मौजूदा व्यवस्था में कैसे अधिक से अधिक यात्रियों को कंफर्म टिकट का जुगाड़ किया जा सकता है।

अभी वेटिंग लिस्ट टिकट की क्या स्थिति है?
अभी टिकट बुक करने पर निर्धारित सीटें फुल होने के बाद यात्रियों को वेटलिस्ट के नाम पर एक नंबर पकड़ा दिया जाता है। ट्रेन रवाना होने से 2 से 4 घंटे पहले तक वह फाइनल चार्ट तैयार होने का इंतजार करे। अचानक पता चलता है कि टिकट कंफर्म नहीं हुआ और फिर मायूसी के अलावा कुछ नहीं बचता। यह स्थिति इसलिए भी होती है कि बड़ी संख्या में बर्थ विभिन्न कोटा और विभिन्न स्टेशनों के लिए सुरक्षित रहते हैं। जबकि, वास्तव में सभी कोटा वाली सीटें का उपयोग नहीं हो पाता। आखिरी चार्ट निकलते समय ही पता चलता है कि टिकट कंफर्म हुआ या नहीं। यदि लंबी दूरी की ट्रेन में 60 हाल्ट स्टेशन हैं तो मूल और अंतिम गंतव्य के बीच संभवत: 1,800 टिकट कॉम्बिनेशन की गुंजाइश हो सकती है। अगर 10 ही हॉल्ट हैं तो यह संख्या 45 हो सकती है। अधिकारियों के मुताबिक पूरे भारतीय रेलवे में यह संभावित टिकट कॉम्बिनेशन करीब एक अरब है। आर्टिफिशियल इन्टेलिजन्स पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को यही बताता है कि कैसे और किस सेक्टर में यात्रियों को ज्यादा से ज्यादा कंफर्म टिकट दिया जा सकता है।

आइडियल ट्रेन प्रोफाइल से क्या होगा ?
आर्टिफिशियल इन्टेलिजन्स टिकट बुकिंग की पूरी प्रक्रिया को ऑटोमोशन पर डाल देगा। मतलब, वह पहले की डिमांड के आधार पर तय करेगा कि किसी भी कोटा से संबंधित खाली सीटों का बेहतर उपयोग कैसे किया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट को लेकर रेलवे काफी उत्साहित है, जो हर बार पीक सीजन में कंफर्म टिकट के डिमांड का सामना करता है। संभव है कि आने वाले गर्मी की छुट्टियों में यह रेलवे को भी खाली सीटों से छुटकारा दिलाएगा और यात्रियों को भी अंतिम समय में टिकट कंफर्म नहीं वाली मायूसी से छुटकारा मिलेगा।












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