राहुल गांधी का पटना रोड शो और तीन बार फ़र्नीचर की दुकान का ज़िक्र
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का गुरुवार को पटना में रोड शो ग़फ़लत से शुरू ज़रूर हुआ लेकिन डेढ़ किलोमीटर के रास्ते और क़रीब डेढ़ घंटे के समय ने पटना साहिब के उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा को बड़ी राहत दी होगी.
शत्रुघ्न सिन्हा लगातार तीसरी बार इस सीट से अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं. बीजेपी की टिकट पर पिछले दो चुनाव जीत चुके सिन्हा इस बार कांग्रेस के टिकट पर महागठबंधन के उम्मीदवार हैं और उनका मुक़ाबला स्थानीय नेता और केंद्र सरकार के मंत्री रविशंकर प्रसाद से है.
रविशंकर प्रसाद के समर्थन में 11 मई को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का इसी रास्ते पर एक ज़ोरदार रोड शो हुआ था. ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष का शत्रुघ्न सिन्हा के पक्ष में रोड शो करने का एक मायने तो यही है कि मुक़ाबला बराबरी का लगे.
हालांकि ये रोड शो केवल शत्रुघ्न सिन्हा के समर्थन भर के लिए नहीं था, पटना में पहली बार कांग्रेस पार्टी ने अपने अध्यक्ष के रोड शो का आयोजन किया और पहले ही रोड शो में समर्थकों ने ही नहीं गठबंधन के नेताओं ने भी राहुल गांधी को देश का अगला प्रधानमंत्री तक बता दिया.
इस लिहाज़ से देखें तो केंद्र में विपक्ष के संभावित गठबंधन के नेता के तौर पर राहुल गांधी ने अपनी पोज़िशन को मज़बूत ही किया है.
लेकिन यह रोड शो कई मामले में अमित शाह के रोड शो की तुलना में अस्त-व्यस्त नज़र आया. अमित शाह के रोड में चाहे वह कार्यकर्ताओं की भीड़ रही हो या फिर पूरे रोड शो का आयोजन, वह काफ़ी व्यवस्थित नजर आया था.
इसकी एक वजह पटना साहिब लोकसभा में बीजेपी के पांच विधायकों की मौजूदगी भी रही होगी, साथ ही बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने इतना ज़ोर लगाया था कि क़रीब सौ किलोमीटर दूर अपने इलाक़े से उन्होंने कार्यकर्ता तक बुला लिए थे. राहुल गांधी का रोड शो इस लिहाज़ से अव्यवस्थित दिखा.
ये रोड शो जब ख़त्म हुआ, उसके कुछ ही मिनटों के बाद आम समर्थकों से ज़्यादा भीड़ कांग्रेस के नेताओं और उनके लोगों की नज़र आने लगी.
'उम्मीद से बेहतर रहा रोड शो'
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रसाद सिंह कहते हैं, ''पटना में हमारे कार्यकर्ताओं की संख्या बहुत ज़्यादा तो नहीं है, बावजूद इसके देखिए कि रोड शो कितना कामयाब रहा. आम लोग ख़ुद से जुड़े हैं.''
कांग्रेस के अपने कार्यकर्ताओं की संख्या इस इलाक़े में बहुत ज़्यादा नहीं रहने की सूरत में उसे सहयोगी दलों के साथ बातचीत करके ज़्यादा से ज़्यादा कार्यकर्ताओं को जुटाने की कोशिश करनी चाहिए थी, इस स्तर का समन्वय नज़र नहीं आया.
हालांकि, रोड शो के दौरान महागठबंधन के दूसरी पार्टियों के समर्थक और नेता दोनों रैली में मौजूद नज़र आए. लेकिन आपसी समन्वय बेहतर करके रोड शो की भीड़ को बढ़ाया जा सकता था.
ऐसे में ज़ाहिर है कि शत्रुघ्न सिन्हा का जिस तरह का क़द रहा है, उसे देखते हुए उन्होंने इन बारीकियों पर ध्यान नहीं दिया होगा लेकिन उन्हें ज़मीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना था, हालांकि अब इसके लिए उनके पास बहुत वक़्त नहीं रहा है लेकिन इससे उन्हें बूथ प्रबंधन में मदद मिलती है.
बावजूद इसके शत्रुघ्न सिन्हा का अपना चार्म भी यहां के लोगों में नज़र आता है. रोड शो को नाला रोड पर खड़े होकर देख रहे बुज़ुर्ग राजकुमार प्रसाद बताते हैं, ''शत्रुघ्न सिन्हा को बीजेपी ने बाहर निकलने पर मजबूर किया है. घर परिवार को बुज़ुर्गों का सम्मान कैसे करना चाहिए यह बीजेपी भूल गई है.''
हालांकि राजकुमार प्रसाद मानते हैं कि इस सीट पर मुक़ाबला टक्कर का है.
वैसे रोड शो के दौरान जुटी भीड़ से शत्रुघ्न सिन्हा काफ़ी ख़ुश नज़र आ रहे थे, उन्होंने कहा, ''वन मैन शो, टू मैन आर्मी वाली बीजेपी अध्यक्ष का रोड शो इससे 10 गुना छोटा था.''
शत्रुघ्न सिन्हा ये भी कहा कि ''मुझे औकात दिखाने की बात कही गई थी, देख लो ये है मेरी औकात.''
उनके घर के पास ही रोड शो समाप्त हुआ.
उन्होंने पहले तेजस्वी यादव और राहुल गांधी को भावी सीएम और पीएम बताते हुए लोगों को संबोधित करने को कहा.
तेजस्वी यादव ने लगवाए '23 मई भाजपा गई'जैसे नारे
तेजस्वी यादव इस रोड शो में थोड़ी देरी से शरीक हो पाए थे, उन्हें रोड शो वाले वाहन तक पैदल पहुंचने में दिक्कत भी हुई. लेकिन उन्होंने जनता से कई नारे बुलवाए. मसलन 23 मई भाजपा गई, भाजपा भगाओ देश बचाओ, ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको पलटू चाचा ने ठगा नहीं.
तेजस्वी ने ये भी कहा कि शत्रुघ्न सिन्हा उनके पिता के मित्र हैं, उनको वोट दीजिए. राहुल गांधी देश के पीएम होने वाले हैं और वह पटना की जनता के बीच पहली बार आए हैं.
इसके बाद राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत में ही कहा कि महागठबंधन की सरकार बनी तो पांच साल ग़रीब लोगों को तीन लाख साठ हजार रुपये दिए जाएंगे.
उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी का हवाला देते हुए वैन से नज़र आने वाली दुकान संदीप फ़र्नीचर का ज़िक्र तीन बार किया कैसे इन दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है.
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राहुल गांधी ने ये भी कहा कि 23 तारीख़ के बाद हम लोगों की सरकार बनने जा रही है और जीएसटी की जगह साधारण टैक्स लागू होगा.
राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि ''वह मन की बात सुनकर सरकार नहीं चलाएंगे बल्कि पटना के मन की बात सुनकर सरकार चलाएंगे, आप मालिक हों, आपकी ऑर्डर से काम करेंगे.''
उन्होंने कार्यकर्ताओं से चौकीदार चोर है के नारे भी लगवाए और आख़िर में अपील कि शत्रुघ्न सिन्हा इस सड़क पर रहते हैं, बिहारी बाबू हैं तो इन्हें जिताइए.
राहुल गांधी की एक झलक पाने के लिए कार्यकर्ताओं और स्थानीय युवाओं में उत्साह दिखा. राहुल भी दोनों तरफ़ से लोगों से हाथ मिलाते रहे.
उनके साथ रोड शो वाले वाहन पर शत्रुघ्न सिन्हा और तेजस्वी यादव के साथ-साथ पूनम सिन्हा भी मौजूद थीं. शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा लखनऊ से महागठबंधन की उम्मीदवार हैं. ऐसे में राहुल के साथ वाहन में उनकी मौजूदगी का एक संकेत तो यह भी है कि ज़रूरत पड़ने पर राहुल यूपी महागठबंधन को भी अप्रोच कर सकते हैं.
'पटना साहिब सीट पर बटेंगे कायस्थ वोट'
राहुल के रोड शो में पैदल चल रहीं मंजू शर्मा वकील हैं और बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सदस्य भी हैं. शत्रुघ्न सिन्हा की जीतने की संभावनाओं पर उन्होंने कहा इस सीट पर बीजेपी को केवल बनियों का वोट मिल रहा है, बाकी सब समुदाय से शत्रुघ्न सिन्हा को समर्थन है.
हालांकि पटना साहिब सीट पर कायस्थ समुदाय का दबदबा है और माना जा रहा है कि इस समुदाय का वोट दोनों नेताओं में बंटेगा, जिससे चुनाव का परिणाम दूसरे लोगों पर निर्भर होगा.
मंजू शर्मा बताती हैं, ''रविशंकर प्रसाद के राज्यसभा का पांच साल का कार्यकाल बचा हुआ है, उनको जिताने से राज्य से दो कायस्थ संसद में रहेंगे. रवि शंकर प्रसाद और आरके सिन्हा. लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा जीतते हैं तो संसद में तीन कायस्थ सांसद होंगे. कायस्थ समाज में पर इस पर भी चर्चा चल रही है."
हालांकि कायस्थ समुदाय बिहार में बीजेपी गठबंधन को पहली प्राथिकता दे रहा है, ऐसे में देखना होगा कि शत्रुघ्न सिन्हा को अपने समुदाय का कितना वोट मिलता है. उनके बारे में सबसे बड़ी शिकायत तो यही है कि वह जीतने के बाद क्षेत्र के लोगों के लिए उपलब्ध नहीं होते.
रैली में चल रहे एक युवा से जब यही पूछा तो वह बोला, ''रविशंकर प्रसाद भी तो चुनाव के वक्त में लोगों से मिल रहे हैं, वह भी तो पटना केवल अपने काम से ही आते हैं. कौन सांसद आम आदमी से रोज़ मिल रहा है.''
कांग्रेस के युवा नेताओं में शुमार शकील अहमद ख़ान ने बताया कि रोड शो उम्मीद से कहीं ज़्यादा बेहतर साबित हुआ है. लोगों में राहुल गांधी को लेकर एक पॉज़िटिव रुझान देखने को मिला है.
हालांकि, पटना साहिब के शहरी इलाक़ों में रविशंकर प्रसाद की दावेदारी को मज़बूत माना जा रहा है. इस पर एक कांग्रेसी कार्यकर्ता ने बताया कि पटना साहिब में ग्रामीण इलाक़ा बहुत है. ग्रामीण इलाक़ों में महागठबंधन का वोट बैंक ज़्यादा है. उसका फ़ायदा हमारे उम्मीदवार को मिलेगा.
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अब बात ग़फ़लत की, चुनाव प्रचार ख़त्म होने से ठीक एक दिन पहले पटना के ही विक्रम विधानसभा में महागठबंधन की उम्मीदवार मीसा भारती के पक्ष में चुनावी सभा को संबोधित करने के बाद राहुल गांधी को हेलिकॉप्टर से मोइनुल हक स्टेडियम आना था. लेकिन प्रदेश कांग्रेस ने इसके लिए अनुमति ही नहीं ली थी.
राहुल गांधी का हेलिकॉप्टर पटना एयरपोर्ट उतरा और वहां से सड़क मार्ग से वे मोइनुल हक स्टेडियम पहुंचे. इससे राहुल गांधी भले नाराज़ नहीं नज़र आए लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा थोड़े नाराज़ दिखे.
वैसे राहुल गांधी ने इस रोड शो के बहाने बिहार कांग्रेस का अब तक सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन तो कर दिया है. बिहार कांग्रेस के युवा नेताओं में शामिल शाश्वत गौतम बताते हैं कि पटना में जिस तरह का अभी संगठन है उसमें यह रोड शो अभूतपूर्व रहा.
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि राहुल गांधी का यह रोड शो शत्रुघ्न सिन्हा की नैया पार लगा पाएगा, दोनों तरफ़ के दावों प्रतिदावों के बीच इसका पता 23 मई को ही चल पाएगा.
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