राहुल पछताये और कहा 'मुझे अध्यादेश को बकवास नहीं कहना चाहिए था'

हालांकि आज राहुल ने कहा कि 'मेरी भावनाएं गलत नहीं थी लेकिन मेरे शब्द जरूर कड़े थे।
बताया जाता है कि इस घटना से राहुल ने आम जनता में अपनी छवि को चमकाने की कोशिश की। उनके इस बयान से कांग्रेस के सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी और अजय माकन को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था। बाद में उन्होने कहा था कि अध्यादेश पर राहुल की राय ही पार्टी की राय है।












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