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राहुल गांधी ने सुनी किसानों के 'दिल की आवाज', बोले- हिंदुस्तान के भविष्य के लिए ये विरोध जरूरी

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नई दिल्ली। हाल ही में पास किए गए किसान विधेयकों का मामला लगातार बढ़ रहा है। जहां देश के कई हिस्सों में किसान इन विधेयकों का विरोध कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल भी किसानों की आवाज में आवाज मिला रहे हैं। इसी विरोध के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किसानों से बातचीत की है। साथ ही उन्होंने इस कानून का भी विरोध किया। इस बातचीत के दौरान किसानों ने कहा कि उनके साथ धोखा हो रहा है और उनके पास कुछ भी नहीं बचेगा। किसानों ने कहा कि अगर प्राइवेट कंपनी आदि एमएसपी से कम पर कुछ खरीदती हैं, तो उसे दंडनीय अपराध माना जाए। एमएसपी से कम कोई खरीद नहीं होनी चाहिए। सरकार ने इसपर कोई गारंटी नहीं दी है।

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    एक अन्य किसान ने कहा कि इन विधेयकों से केवल बड़ी कंपनियों को ही लाभ होगा। राहुल ने विभिन्न किसानों से पूछा कि उन्हें इन तीन कानूनों में सबसे खराब क्या लगता है। इसपर किसानों ने कहा कि एमएसपी पर कानून लागू करने की जरूरत है। राहुल ने कहा कि, पहले ईस्ट इडिया कंपनी भी अब वेस्ट इंडिया कंपनी आई है। प्रधानमंत्री के एमएसपी बाली बात पर भी राहुल ने किसानों से सवाल पूछे। तो किसानों ने कहा कि उन्हें (किसान) कोरोना से ज्यादा इन कानूनों से डर लग रहा है।

    राहुल गांधी ने हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार सहित कई राज्यों के किसानों से इन बिलों पर बात की है। राहुल ने कहा कि संगठित उद्योगपति, किसानों से जमीन भी चाहते हैं और फसल भी। उन्होंने जो पहली लड़ाई लड़ी, वो अधिकरण की थी। राहुल ने ये भी कहा कि वो इसपर अड़ गए थे, जिसके कारण पूरे मीडिया ने उनपर आक्रमण शुरू कर दिया था। राहुल ने कहा कि नोटबंदी काले धन के खिलाफ लड़ाई नहीं थी, बल्कि उसका लक्ष्य था कि जो हमारा असंगठित क्षेत्र है, किसान और मजदूर हैं, उनको कमजोर किया जाए। फिर उसके बाद आई जीएसटी का भी यही लक्ष्य था। कोरोना के बाद जब पैसा देना था, तब पैसा नहीं दिया गया। सबसे बड़े दो तीन उद्योगपतियों को दिया गया, कोरोना में उनकी कमाई बढ़ती गई और आपकी गिरती गई। लेकिन तब भी पूरा का पूरा पैसा उनको दिया गया।

    राहुल ने आगे कहा, ये जो तीन कानून हैं, इनमें और नोटबंद, जीएसटी में कोई फर्क नहीं है। फर्क ये है कि ये सीधे आपके दिल में छूरा है। तीन बार आपके पैर में कुल्हाड़ी मारी और इस बार दिल में छूरा मार दिया। ये मीडिया आपको बताएगा नहीं, ना अखबार में दिखेगा और ना ही टीवी में दिखेगा, ना सोशल मीडिया में दिखेगा। लेकिन इसका विरोध करना ही पड़ेगा, किसानों के लिए नहीं बल्कि हिंदुस्तान के भविष्य के लिए। इन्होंने इस देश को खड़ा नहीं किया, वो अंग्रेजों के साथ खड़े थे। तो इनको समझ ही नहीं है। किसान केवल किसान नहीं हैं, बल्कि उनकी आवाज युवा, पुलिस और सेना में भी है। इस आवाज में बहुत दम है और इसी आवाज का प्रयोग करके हिंदुस्तान ने आजादी ली थी। और आज एक बार फिर किसान की आवाज से हिंदुस्तान आजाद होगा।

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    English summary
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