Operation Sindoor पर सवाल उठाकर घिरे राहुल गांधी, कांग्रेस ने एस जयशंकर को बताया पाकिस्तान का मुखबिर
Congress on Operation Sindoor: साल 2016 में जम्मू-कश्मीर के उड़ी में आर्मी कैंप पर हुए आतंकी हमले और उस हमले के जवाब में भारतीय सेना द्वारा PoK में सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी। इसके बाद कांग्रेस नेताओं समेत विपक्षी दलों कई दूसरे नेताओं ने भी इसके सबूत मांगे थे। जिसको लेकर उन्हें सत्ताधारी दल बीजेपी, तीनों सेनाओं और देश के कई लोगों द्वारा आलोचनाओं का बुरी तरह सामना करना पड़ा था। उनकी फजीहत तब और ज्यादा हुई जब पाकिस्तान ने हमले में आतंकियों के मारे जाने की बात को स्वीकारा और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में भी इसको लेकर सबूतों के साथ खबर छपी। उस वक्त केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेेतृत्व वाली सरकार थी, जो कि आज भी है। आलोचना के बाद लगा था कि कांग्रेस और बाकी विपक्षी दल शायद इसे सबक के तौर पर लेंगे, लेकिन राहुल गांधी द्वारा की गई हालिया गलती बताती हैं कि उन्होंने और कांग्रेस के तमाम एडवाइजर्स ने इस घटना से कोई खास सबक नहीं लिया है।
ऑपरेशन सिंदूर और जयशंकर पर राहुल के तंज
कांग्रेस के भीतर ऑपरेशन सिंदूर पर आतंरिक कलह साफ दिखती है। इस आंतरिक कलह के बावजूद, राहुल गांधी लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर और एस. जयशंकर की आलोचना करते रहते हैं। हाल ही में उन्होंने भारत की विदेश नीति पर अपना असंतोष व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स का सहारा लिया और कहा कि यह पूरी तरह फेल हो गया है। गांधी ने जयशंकर के साक्षात्कार का एक वीडियो साझा किया और पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों और पाकिस्तान की निंदा करने में अंतरराष्ट्रीय समर्थन की कमी के बारे में सवाल पूछे। इस वीडियो में जयशंकर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के सवालों के जवाब दे रहे हैं, जिस पर राहुल ने गांधी ने उन्हें जेजे कहकर संबोधित करते हुए सवाल पूछ रहे हैं। राहुल गांधी के तीनों सवाल ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े हुए थे।

जेजे लिखने पर घिरे राहुल गांधी
गांधी द्वारा अपने पोस्ट में "जेजे" शब्द का इस्तेमाल करने से पार्टी के कुछ लोगों को हैरानी हुई। माना जाता है कि एक "जे" जयशंकर के संबोधित करता है, जबकि दूसरे 'जे' का अर्थ अभी तक साफ नहीं है। कांग्रेस के कई लोगों का मानना है कि यह जयशंकर के प्रति नकारात्मक अर्थ रखता है। पार्टी के एक नेता ने सुझाव दिया कि सरकार या विदेश मंत्री से सवाल करने के और भी उचित तरीके हैं।
जयशंकर को बताया मुखबिर
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने जयशंकर पर निशाना साधा है। इससे पहले उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या सरकार ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमला करने से पहले उन्हें सूचित किया था। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने यहां तक कहा कि जयशंकर के बयानों से आतंकवादियों को भागने में मदद मिल सकती है और विवादास्पद रूप से उन्हें "मुखबिर" करार दिया। राहुल गांधी और पवन खेड़ा के इन बयानों ने सवाल उठाने के बजाय उनके खिलाफ ज्यादा काम किया है। इसकी वजह से राहुल गांधी को कांग्रेस मुख्यालय के गेट पर एक भीड़ में तीखी आलोचना झेलना पड़ी।
ऑपरेशन सिंदूर पर दो फाड़ हुई कांग्रेस
सत्तारूढ़ भाजपा ने तथ्यों और बयानों के जरिए राहुल गांधी की आलोचना करके जवाब दिया है। हालांकि भाजपा की ओर से इसकी उम्मीद भी की जा रही थी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस मुद्दे पर सरकार और देश के लिए कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर समर्थन किया है। यह स्थिति बताती है कि राहुल गांधी को अपनी पार्टी के भीतर भी आम सहमति बनाने में संघर्ष करना पड़ सकता है।
कांग्रेस के नेताओं की पार्टी से अलग राय
कम से कम पांच प्रमुख कांग्रेस नेताओं ने ऑपरेशन सिंदूर और विदेश मंत्री एस. जयशंकर पर पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग राय रखी है। इन नेताओं में शशि थरूर, सलमान खुर्शीद, मनीष तिवारी, पी. चिदंबरम और के. सुधाकरन शामिल हैं। पाकिस्तान की जमीन पर पलने वाले आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों में शामिल कांग्रेस सदस्यों पर विचार करने पर यह लिस्ट और भी ज्यादा बड़ी हो जाती है। शशि थरूर ने पहलगाम हमले को आंतकवादी हमला बताते हुए कहा था कि 'कोई इंटेलिजेंस सिस्टम कभी भी पूरी तरह से सफल नहीं हो सकता, इसमें चूक की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है'। जो कि उस वक्त कांग्रेस द्वारा किए जा रहे बीजेपी के घेराव से अलग था।
सोशल मीडिया पर भी हो रही लानत-मलानत
सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के बयानों ने कुछ कांग्रेस सदस्यों को हैरान कर दिया है, खासकर वे जो विदेश में आतंकवाद के मुद्दों पर चर्चा करने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। उन्हें लगता है कि एक विपक्षी नेता के तौर पर सरकार से सवाल पूछना उनका कर्तव्य है, लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए ऐसा करना अनुचित लगता है। साथ ही राहुल गांधी को समय देखकर भी सवाल पूछना चाहिए था, क्योंकि अभी ऑपरेशन सिंदूर का मामला गर्म है। साथ ही पाकिस्तान आर्मी द्वारा कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान दिखाए जाने से पार्टी पहले ही बैकफुट पर चल रही है। ऐसे में ऊल-जलूल बयानबाजी कांग्रेस को एक बार फिर पीछे धकेल सकती है।
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