Bihar Election में नहीं गलेगी राहुल की दाल? महाराष्ट्र-कर्नाटक धांधली आरोपों में कितना दम? 5 Point में समझें
Rahul Gandhi Bihar Election 2025: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 7 अगस्त 2025 को दिल्ली में एक घंटे 11 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सनसनीखेज आरोप लगाए। उन्होंने कर्नाटक और महाराष्ट्र के चुनावों में वोटर लिस्ट धांधली का दावा करते हुए चुनाव आयोग (EC) पर BJP के साथ मिलीभगत का इल्जाम लगाया। 22 पेज के प्रजेंटेशन में राहुल ने कर्नाटक की वोटर लिस्ट में 1 लाख फर्जी वोट, 11,965 डुप्लिकेट प्रविष्टियां, और 40,009 अमान्य पते का हवाला दिया।
उन्होंने कहा, 'महाराष्ट्र के नतीजों ने साबित किया कि EC ने BJP के साथ मिलकर चुनाव चुराया।' लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राहुल का यह हमला क्या उनकी हार की आहट है? क्या कांग्रेस बिहार में पहले ही हथियार डाल चुकी है? आइए, 5 सवालों के जरिए राहुल के आरोपों की सच्चाई और सियासी मंशा को परखते हैं...

1. संसद में हंगामा, EC पर चर्चा क्यों ?
कांग्रेस संसद के मानसून सत्र में SIR (सिस्टमैटिक इलेक्टोरल रिगिंग) पर चर्चा के लिए रोज स्थगन प्रस्ताव नोटिस दे रही है, लेकिन सत्र को चलने नहीं दे रही। सवाल यह है कि जब EC और सरकार के काम बिल्कुल अलग-अलग हैं, सदन में आयोग पर चर्चा हो ही नहीं सकती है...तो, क्या कांग्रेस जानबूझकर संसद को बाधित कर रही है? ताकि EC के खिलाफ बिना सबूत के शोर मचाया जा सके।
2. कर्नाटक में जीत सही, हार में EC गलत?
2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 135 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था, जब BJP सत्ता में थी, उसे सिर्फ 66 सीटें मिलीं थी। उस वक्त राहुल ने EC की तारीफ की थी। लेकिन, महाराष्ट्र चुनाव 2024 में महाविकास आघाड़ी (MVA) गठबंधन में जब कांग्रेस को हार मिली, तो EC पर वोट चोरी के आरोप। अब सवाल उठता है कि क्या EC सिर्फ तब गलत है, जब कांग्रेस हारती है?
3. EVM से वोटर लिस्ट तक, निशाना बदला क्यों?
पिछले कुछ सालों में राहुल गांधी और कांग्रेस ने EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, लेकिन जब कोई सबूत नहीं मिला, तो अब वोटर लिस्ट और EC पर निशाना साधा जा रहा है। 7 जून 2025 को एक सभा में सियासी विश्लेषक प्रशांत किशोर ने कहा, 'कांग्रेस पहले EVM पर सवाल उठा चुकी है, और जब वहां कुछ नहीं मिला, तो अब वोटर लिस्ट और EC पर निशाना साध रही है। यह रणनीति हार के बाद बहाना तैयार करने की कोशिश हो सकती है। ' क्या राहुल का यह नया हमला बिहार में हार की आशंका को छिपाने की रणनीति है?
4. सबूत हैं तो कोर्ट क्यों नहीं गए?
राहुल ने वोटर लिस्ट में 1 लाख फर्जी वोट और 33,692 मतदाता...फॉर्म-6 के दुरुपयोग का दावा किया, लेकिन EC को कोई लिखित शिकायत नहीं दी। कर्नाटक CEO ने 12 जून 2025 को राहुल को पत्र और ईमेल भेजकर सबूत मांगे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। सवाल है कि अगर सबूत पुख्ता हैं, तो कांग्रेस कोर्ट क्यों नहीं गई? देवेंद्र फडणवीस ने तंज कसते हुए कहा, 'राहुल का दिमाग चोरी हो गया है। सबूत हैं तो कोर्ट जाएं, प्रेस कॉन्फ्रेंस में शोर क्यों? अब सवाल उठता है, क्या यह सिर्फ सियासी स्टंट है?'
5. बिहार चुनाव से पहले महाराष्ट्र-कर्नाटक क्यों?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 इस साल नवंबर तक होने की उम्मीद है, लेकिन राहुल ने अब तक बिहार के मुद्दों पर कोई बयान नहीं दिया। जुलाई 2025 में हुए उपचुनावों में प्रियंका गांधी ने प्रचार किया, लेकिन तब EC पर कोई सवाल नहीं उठा। सवाल है कि बिहार में RJD के साथ गठबंधन की कमजोर स्थिति को देखते हुए क्या राहुल पहले ही हार मान चुके हैं? एक्सपर्ट्स का मानना है कि कांग्रेस बिहार में कमजोर प्रदर्शन की आशंका से EC पर हमले कर रही है, ताकि हार का ठीकरा पहले से तैयार रखा जाए।
चुनाव आयोग का जवाब: 'राहुल के आरोप बेतुके'
EC ने राहुल के दावों को 'गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया। EC के प्रवक्ता ने कहा:-
- 12 जून 2025 को राहुल को पत्र और ईमेल भेजा गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
- राहुल ने कभी EC को कोई लिखित शिकायत नहीं दी।
- EC ने अपने कर्मचारियों से निष्पक्षता के साथ काम करने को कहा और ऐसे बयानों को नजरअंदाज करने की सलाह दी।
- EC ने राहुल से कर्नाटक में कथित फर्जी मतदाताओं के नामों के साथ शपथ पत्र मांगा, लेकिन राहुल ने जवाब में कहा, 'मेरा बयान ही मेरा शपथ पत्र है। ECI ने कहा, 'हम निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ काम करते हैं। बिना सबूत के आरोप स्वीकार्य नहीं।'
महाराष्ट्र चुनाव 2024: नतीजों का सच
नवंबर 2024 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन (BJP, शिवसेना-शिंदे, NCP-अजित) ने 288 विधानसभा सीटों में से 235 सीटों पर कब्जा जमाकर जीत दर्ज की थी:-
- BJP: 132 सीटें
- शिवसेना (शिंदे): 57 सीटें
- NCP (अजित): 41 सीटें
वहीं, महा विकास अघाड़ी (MVA) का प्रदर्शन निराशाजनक रहा: -
- कांग्रेस: 16 सीटें
- शिवसेना (UBT): 20 सीटें
- NCP (SP): 10 सीटें
| पार्टी / गठबंधन | सीटें जीतीं | वोट प्रतिशत |
|---|---|---|
| भाजपा (BJP) | 132 | 26.77% |
| शिवसेना (Shinde गुट) | 57 | 12.38% |
| राष्ट्रवादी कांग्रेस (Ajit Pawar) | 41 | 9.01% |
| शिवसेना (UBT - उद्धव गुट) | 20 | 9.96% |
| कांग्रेस (INC) | 16 | 12.42% |
| NCP (SP - शरद पवार) | 10 | 11.28% |
| पार्टी | सीटें विजयी | वोट शेयर (%) |
|---|---|---|
| कांग्रेस (INC) | 135 | ~42.9% |
| बीजेपी (BJP) | 66 | ~36% |
| जेडीएस (JD-S) | 19 | कम |
बिहार का सियासी समीकरण
बिहार में NDA (JDU, BJP, LJP) और महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, लेफ्ट) के बीच कांटे की टक्कर है। लेकिन RJD और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर तनातनी और तेजस्वी यादव की बढ़ती लोकप्रियता ने कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया। प्रशांत किशोर ने X पर लिखा, 'बिहार में कांग्रेस सिर्फ 20-25 सीटों पर लड़ेगी। राहुल का EC पर हमला हार का बहाना तैयार करने की कोशिश है।'
राहुल के आरोपों में कितना दम?
राहुल गांधी के आरोप गंभीर हैं, लेकिन बिना ठोस सबूत और कोर्ट में चुनौती के, यह सियासी स्टंट ज्यादा लगता है। बिहार चुनाव से पहले महाराष्ट्र और कर्नाटक की बात उठाकर राहुल क्या हार का बहाना तैयार कर रहे हैं? EC की निष्पक्षता पर सवाल उठाना आसान है, लेकिन सबूत पेश करना मुश्किल। क्या कांग्रेस बिहार में वापसी कर पाएगी, या यह सियासी शोर हार की आहट है?
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