नरेंद्र मोदी जी मुझे आपसे कुछ कहना है
तमिलनाडु के त्रिचुरापल्ली में नरेंद्र मोदी की रैली है। देश की निगाहें एक बार फिर मोदी के भाषण पर होंगी। एक बार फिर लाखों का हुजूम रैली में उमड़ेगा, सुना है साउथ के सुपर स्टार रजनीकांत भी पहुंचेंगे। इन सबके बीच कुछ बातें मेरे मन में आ रही हैं, जो मैं कहना चाहूंगा।
जिसके जीवित रहने से विद्वान, मित्र और बंधु-बांधव जीते हैं, उसी का जीना सार्थक है-अपने लिए कौन नहीं जीता। हितोपदेश पूरे देश में आजकल नमो लहर दिखाई दे रही है। अखबार, टीवी चैनल, सोशल साइट्स सब के सब कह रहे हैं या यूं कहें कि चाह ही रहे हैं कि नरेंद्र दामोदर भाई मोदी देश के प्रधानमंत्री बनें और देश की दिशा और दशा को बदलकर रखे दें। लोगों में आत्मविश्वास भरें, देश के प्रति उनका जज्बा मजबूत हो और देश प्रगति करे। मगर क्या इसी से सब कुछ हो जाएगा?

इस देश में तीन ही राष्ट्रीय दल हैं। कांग्रेस, भाजपा और बसपा। बाकी सब राष्ट्रीयता का ढोंग ही करते हैं राष्ट्रीय हैं नहीं। और जो राष्ट्रीय है, वही राष्ट्र का प्रधानमंत्री होना भी चाहिए। हम राहुल गांधी से कोई उम्मीद नहीं करते। उनकी पार्टी तो उन नेहरू साहब की सोच से चलती है, जो सिर्फ चुनावों के मौके पर ही लोक लुभावन बातें करती है, गरीबी और गरीबों का रोना रोती है लेकिन 4 साल तक गरीब की गर्दन पर छुरी फेरती रहती है। दूसरे भारतीय जनता पार्टी है, जिसने हाल ही में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उममीदवार घोषित किया है, उसमें कुछ राष्ट्रीय भावना दिखाई देती है।
अगर वह लालकृष्ण आडवाणी की राममंदिर रथ यात्रा और गुजरात के दंगों को छोड़ दे और अटल बिहारी वाजपेयी के चेहरे वाली भाजपा को लाए तो देश उनके लिए राजी हो सकता है। तीसरे बसपा, जो देश के 85 प्रतिशत आबादी अगड़े-पिछड़े, दलित और अल्पसं यकों की मानी जाती है और जिसकी नेता मायावती की छवि दबंग महिला की है, वह देश के भले का काम कर सकती है। मायावती का उत्तर प्रदेश के अलावा देश में कहीं अधिक जनाधार दिखता नहीं है। यह अलग बात है कि कभी वह राजस्थान में छह सीटें जीत लेती हैं मगर बाद में उसके विधायक टूटकर पूरी पार्टी का ही विलय कर जाते हैं।
या कि कहीं कर्नाटक में चार सीटें जीतकर दूसरी पंक्ति में बैठने वाले बन जाते हैं, या हरियाणा में एकाध सीट जीतकर विधानसभा में डिप्टी स्पीकर के पद का जुगाड़ बिठा लेते हैं मगर आज अगर बात राष्ट्रीय नेतृत्व की करें तो नरेंद्र मोदी का नाम ही सबसे ऊपर उठकर आ रहा है। ऐसे में देश उ मीद कर रहा है। एक अविवाहित, आधी बाजू का कुर्ता पहनने वाले सफेद दाढ़ी के भाजपाई शिखर पुरुष नरेंद्र मोदी से। मुझे बहुत सी आशंकाएं हैं इसलिए नरेंद्र भाई मोदी से मुझे कुछ कहना है।

नरेंद्र मोदी जी, आप देश में सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं। देश भारी आर्थिक संकट से गुजर रहा है। आप जानते हैं कि 120 करोड़ की आबादी वाले इस देश में असीम संभावनाएं हैं। जल, जंगल और जमीन के प्राकृतिक साधनों से इतना उन्नत देश दुनिया में नहीं है यह भी आप जानते हैं। आप यह भी जानते हैं कि हमसे अधिक आबादी वाला देश चीन जब अनुशासित रह सकता है तो भारत तो बरसों से गुलाम रहा है, यहां अनुशासन होना ही चाहिए।
आदरणीय मोदी साहब, देश में गरीबी बेशक आंकड़ों में कम हुई है मगर आम आदमी की हालत खतरे के निशान से ऊपर है। आप जानते हैं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कहा था कि अभी देश को परिपक्व होने में समय लगेगा। तमाम बातें हैं। भुखमरी, बेरोजगारी, बेकारी, बदअमनी का देश शिकार है। कहीं अनुशासन दिखाई नहीं देता। रिश्तों की गर्माहट खत्म हो रही है और महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहा है। बसपा नेतृत्व ने कहा है कि उसका कोई चुनावी घोषणा पत्र नहीं है। एकमात्र देश में संविधान को सही ढंग से लागू करना ही उनका मेनीफेस्टो है। बस, आपसे भी यही उ मीद है कि आप भारतीय संविधान को उसके तरीके से लागू करके देश के साथ न्याय करेंगेे। इस देश की तासीर यही है, और मूल भावना भी यही।
जो उस मूल भावना से हटकर चलता है, वह चलता हो जाता है जैसे कांग्र्रेस के साथ हो रहा है। वही कांग्रेस जिसने राइट टू एजुकेशन, राइट टू इंफर्मेशन, राइट टू फूड दिया मगर राइट टू एंप्लॉयमेंट नहीं दे पाई। वही कांग्रेस जिसने अपने सिर पर एक पाप लिया जो यह है कि दागी लोग संसद में जा सकते हैं, विधानसभाओं में प्रवेश कर सकते हैं। वही कांगेस जो सियासी प्रहसन की शिकार है जिसमें कोई अनुशासन नहीं है। वही कांग्रेस जिसके लिए महात्मा गांधी ने कहा था कि अब देश को कांग्रेस की जरूरत नहीं है।












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