अगस्त 2023 से ज्यादा बिकने वाली दवाओं पर लगेगा QR कोड, जानिए इसके पीछे की वजह
असली और नकली दवाओं की पहचान की जा सके, इसलिए अगस्त 2023 से एलेग्रा, एज़िथ्रल, बीकोस्यूल कैप्सूल, कैलपोल, पैंटोसिड डीएसआर, मोनोसेफ और थायरोनोर्म जैसी आमतौर पर बिकने वाली दवाओं की पैकेजिंग पर बार कोड या क्विक कोड लगाया जाएगा। इस संबंध में केंद्र सरकार की तरफ से दवा कंपनियों को नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि अनुसूची एच 2 में निर्दिष्ट दवा निर्माण उत्पादों के निर्माता अपने प्राथमिक पैकेजिंग लेबल पर बार कोड या त्वरित प्रतिक्रिया (QR) कोड प्रिंट चिपकाएंगे। वहीं, अगर प्राथमिक पैकेज लेबल में अपर्याप्त स्थान है तो द्वितीयक पैकेज लेबल पर डेटा या प्रमाणीकरण की सुविधा के लिए सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन या पढ़ी जाने वाली जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

नोटिफिकेशन के मुताबिक संग्रहित डेटा या जानकारी में कंपनियों की तरफ से अद्वितीय उत्पाद सूचना कोड, दवा का उचित दाम और सामान्य नाम, ब्रांड का नाम, निर्माता का नाम और पता, बैच नंबर, जिस तारीख को बनी उसकी डेट, दवा के सेवन की आखिरी तारीख और विनिर्माण लाइसेंस संख्या आदि की जानकारी दी जाएगी।
QR कोड के संबंध में जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि बार कोड या क्यूआर कोड से ग्राहकों को दवाओं के असली-नकली की जांच में मदद मिलेगी। ऐसे में वह यह भी जांच सकेंगे, वह जो दवाएं ले रहे हैं वह प्रयोग करने के लिए कितनी सुरक्षित हैं। अधिकारियों ने कहा कि अभी हमारी तरफ से कुछ दवाओं को ही लिस्ट में शामिल किया जा रहा है। लेकिन आने वाले समय में अन्य दवाओं को भी इस लिस्ट में शामिल किया जाएगा और उनमें QR कोड लगवाया जाएगा।
आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों से नकली दवाओं का कारोबार बाजार में बढ़ गया है। बीते दिनों दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रॉन्च ने एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट का भंडाफोड़ किया था। यह रैकेट नकली जीवन रक्षक कैंसर की दवाएं बनाने और बेचने का काम करता था। दिल्ली क्राइम ब्रॉन्च के मुताबिक यह गैंग कथित तौर पर नकली दवाओं का सिंडिकेट एक सहयोगी की फर्म से कैप्सूल खरीदता था और स्टार्च भरकर नकली दवाओं को बनाकर बेचता था। जानकारी के मुताबिक रैकेट चलाने वाले गैंग को एक कैप्सूल से लगभग 20000 रुपए का फायदा होता था। बाजार में मूल जीवन रक्षक दवाओं की कीमत लगभग 2 लाख रुपये है। लेकिन सिंडिकेट गैंग की तरफ से इसे 1.5 लाख रुपए में बेचा जाता था।
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