पुरी श्रीमंदिर परिक्रमा प्रोजेक्ट: विस्थापितों ने कहा- हमारे समर्पण की हुई उपेक्षा, उद्घाटन में बुलाया तक नहीं
Puri Shrimandir Parikrama Project: पुरी श्रीमंदिर परिक्रमा प्रोजेक्ट (विरासत गलियारा परियोजना) के चलते विस्थापित हुए लोगों ने बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि प्रोजेक्ट लिए उन्होंने अपनी आशियाना तक हटा दिया गया। लेकिन जब प्रोजेक्ट के उद्घाटन के बारी आई तो उन्हें निमंत्रण तक नहीं दिया गया।
पुरी श्रीमंदिर के विरासत गलियारा प्रोजेक्ट के चलते विस्थापित हुए लोगों ने परियोजना के उद्घाटन समारोह के लिए आमंत्रण ना मिलने पर नाराजगी जताई है। लोगों ने कहा है कि 17 जनवरी को प्रोजेक्ट का उद्घाटन है लेकिन उन्हें अब तक इसके लिए निमंत्रण तक नहीं मिला। रिपोर्ट्स के मुताबिक विस्थापित लोगों ने दुख जताते हुए कहा कि श्रीमंदिर के पास घर होने के चलते वे प्रतिदिन भगवान जगन्नाथ के दर्शन करते थे, लेकिन अब हम विस्थापित हो गए हैं।

वहीं सस्मिता लेंका का घर पुरी में श्रीमंदिर के पास था। लेकिन विस्थापित होने के बाद अब वे लोकनाथ रोड स्थित अपने नए मकान में रह रही हैं। उन्होंने कहा, "मेरा घर श्रीमंदिर के करीब था और मेरे परिवार को दिन के किसी भी समय देवताओं के दर्शन करने का लाभ मिलता था। लेकिन हमारे कहीं और स्थानांतरित होने के बाद अब वह सहूलियत खत्म हो गई है। प्रशासन ने हमें ऐसी जगह पर पुनर्वासित किया है कि हमारा मंदिर से संपर्क टूट गया है।"
बसंत मंजरी और सस्मिता की तरह, तीर्थनगरी के कई अन्य लोग अन्य स्थानों पर बेदखल होने के बाद भी अभी भी अपने पुराने वासभूमि के बारे में याद कर रहे हैं। उन्होंने परियोजना के लिए उनके बलिदान के प्रति प्रशासन की कथित उदासीनता पर भी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने अफसोस जताया कि प्रशासन ने उन्हें उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण देना भी उचित नहीं समझा।
मंजरी ने कहा, "सभी विस्थापित लोगों को परियोजना के उद्घाटन के वक्त पहचान पत्र देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक उन्हें ये उपलब्ध नहीं कराया गया है।" वहीं एक अन्य विस्थापित कृष्णचंद्र लेंका ने कहा कि सरकार ने शायद अब मंदिर के प्रति हमारे समर्पण को भुला दिया है।












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