Pulwama Attack: जैश आतंकी के परिवार को टुकड़ों में भी नहीं मिल सकी बेटे की बॉडी, बताया-इस वजह से किया था हमला
पुलवामा। ठीक एक साल पहले आज के ही दिन साउथ कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले को जैश-ए-मोहम्मद के 23 साल के हमलावर आदिल अहमद डार ने अंजाम दिया था। साल 2018 में जैश से जुड़ा आदिल इस हमले से पहले जहां अनजान शख्स था तो हमले के बाद हर कोई उसे जानने लगा था। 12वीं क्लास के आदिल को हमले के बाद जैश ने एक बहादुर कमांडो बताया था और कहा था कि उसने बड़ी ही बहादुरी से अपना मिशन पूरा किया।

परिवार को यकीन नहीं बेटा करेगा ऐसा
हमले के बाद जब आदिल का नाम सामने आया तो किसी को भी यकीन नहीं हुआ। वह अपने पिता की मारूति कार की चाभी लेकर दक्षिण कश्मीर के गुंडीबाग गांव के करीब ही चलाता था। वह कभी दूर नहीं जाता था क्योंकि उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। उसे पुलवामा के हर रास्ते के बारे में सबकुछ मालूम था। आदिल के पिता वेंडर थे और वह अपने माता-पिता के तीन बेटों में सबसे छोटा था। उसे क्रिकेट पसंद था और महेंद्र सिंह धोनी उसके फेवरिट क्रिकेटर थे। उसके पिता गुलाम हसन डार ने बताया है कि पाकिस्तान के साथ जब कभी भारत का मैच होता था तो बाकी कश्मीरियों से अलग आदिल हमेशा टीम इंडिया के लिए ही चीयर करता था। पुलवामा हमले के तुरंत बाद आदिल का जिक्र पूरे देश में होने लगा था। आदिल ने एक मारूति एको कार को सीआरपीएफ जवानों से भरी बस में ले जाकर टकरा दिया था।

वीडियो के बाद पता लगी बेटे की हरकत
गुलाम हसन ने बताया, 'हमें उसकी बॉडी तक नहीं मिली थी यहां तक कि शरीर के टुकड़े भी नहीं मिले। मैंने सिर्फ उसका वह वीडियो देखा था जिसमें वह हमले की जिम्मेदारी ले रहा था और तब मुझे पता लगा कि यह मेरा बेटा ही है।' परिवार को मालूम था कि आदिल ने जैश को ज्वॉइन कर लिया है। उन्हें यह बात तब पता लगी जब मार्च 2018 में घर छोड़ने के बाद सोशल मीडिया पर आदिल ने फोटोग्राफ पोस्ट की थी। एक साल तक उसके बारे में कोई खबर नहीं थी।

मार्च 2018 से गायब था आदिल
19 मार्च 2018 को वह घर से दोपहर का खाना खाकर निकला था और फिर कभी नहीं लौटा। मां हमीदा ने बताया कि पूरा दिन उन्होंने आदिल का तलाशा था और जब वह नहीं मिला तो पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आदिल अपनी मां का सबसे प्यारा बेटा था। वह घर में बर्तन धोने और फर्श साफ करने में मां की मदद करता था। कभी-कभी खाना बनाने में भी मां की मदद करता। पार्ट टाइम जॉब से जो पैसे मिले थे आदिल ने उससे अपनी मां के लिए सोने की बालियां खरीदी थीं। 12वीं तक गुंडीबाग के लोकल स्कूल में पढ़ाई करने के बाद आदिल ने मार्च 2017 में स्कूल छोड़ दिया था। यह गांव उस जगह से बस 10 किलोमीटर ही दूर है जहां पर हमला हुआ था।

सी कैटेगरी का आतंकी था आदिल
पुलिस रिकॉर्ड्स के मुताबिक डार, घाटी में कैटेगरी सी का आतंकी था। पुलिस अधिकारियों की मानें तो आदिल एक दुकान में काम करता था। यहां पर वह लकड़ी डिब्बे बनाने का काम करता था। पुलिस अधिकारियों की मानें तो आदिल एक दुकान में काम करता था। यहां पर वह लकड़ी डिब्बे बनाने का काम करता था। परिवार को भी नहीं मालूम के उनका बेटा आदिल आखिर आतंकी कैसे बन सकता है। साल 2016 में हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए थे।

एक घटना ने बना दिया विद्रोही
पिता गुलाम हसन के मुताबिक जिस समय घाटी में पत्थरबाजी का दौर जारी था आदिल एक दिन स्कूल से लौटा था। आदिल को पत्थरबाज समझकर पुलिस ने सबके सामने बेइज्जत किया। इस घटना ने उसे विद्रोही बना दिया था। गुलाम हसन के मुताबिक आदिल कभी स्कूल नहीं गया और फिर एक मिल में काम करने लगा। पिता ने बताया आदिल 40,000 से 50,000 रुपए तक कमाता और अपनी मां के लिए और ज्यादा गिफ्ट्स लाता था।












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