पुलवामा हमला: बर्फ में फंसे CRPF जवान चाह रहे थे एयर लिफ्ट, गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट का किया खंडन

नई दिल्ली। पुलवामा हमले से पहले सीआरपीएफ ने श्रीनगर जाने के लिए गृह मंत्रालय से एयर ट्रांजिट (हवाई मार्ग) की इजाजत मांगी थी, लेकिन उनकी इस मांग को खारिज कर दिया गया था। इस सप्ताह गुरुवार को पुलवामा के अवंतिपोरा में जम्मू से श्रीनगर जा रहे सीआरपीएफ के एक काफिले पर फिदायीन हमला हो गया था, जिसमें 40 से अधिक जवानों की मौत हो गई थी। यह सड़क मार्ग बर्फ की वजह से पिछले कई दिनों से बंद पड़ा था, इसी वजह से सीआरपीएफ ने हवाई मार्ग से श्रीनगर जाने के लिए देश के गृह मंत्रालय से इजाजत मांगी थी। हालांकि, गृह मंत्रालय ने इस रिपोर्ट का खंडन कर दिया है।

हवाई मार्ग से जाना चाहते थे CRPF जवान, नही मानी मांग

न्यूज वेबसाइट 'द क्विंट' से अपनी पहचान को गुप्त रखते हुए पुलवामा हमले के बाद एक जवान ने इसका खुलासा किया है। जवान ने कहा, 'बर्फबारी की वजह से जम्मू में बहुत सारे जवान फंसे हुए थे। 4 फरवरी को इस मार्ग से अंतिम काफिला निकला था। इसलिए हमने अपने सीआरपीएफ हेडक्वार्टर को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि हमें हवाई मार्ग से जवानों को पारगमन की सुविधा प्रदान की जाए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। किसी ने भी हमें जवाब देने की जहमत नहीं उठाई।'

श्रीनगर में सीआरपीएफ के सीनियर अधिकारी की पोस्टिंग के बाद सीआरपीएफ हेडक्वार्टर को लेटर लिखकर हवाई मार्ग प्रदान कराने के लिए आग्रह किया था, जिसके बाद वह लेटर गृह मंत्रालय भेज दिया गया, लेकिन अफसोस कि वहां से कोई भी जवाब नहीं आया पाया। सीआरपीएफ के जवान ने कहा कि हवाई मार्ग से जवानों का पारगमन न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि यह बहुत तेज और लागत भी प्रभावी होती है।

पुलवामा हमले से पहले इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने 8 फरवरी को आईईडी ब्लास्ट के इनपुट्स की जानकारी दी थी, लेकिन खुफिया एजेंसी ने जगह और टाइम के बारे में नहीं बताया था। रिटायर्ड सीआरपीएफ के एक अधिकारी का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में जवानों का काफिला एक साथ रवाना नहीं हो सकता। सामान्य रूप से 300 से 400 जवान ही एक साथ निकल सकते हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में अगर जवानों का काफिला निकल रहा है, तो सरकार को बुलैट प्रूफ वाहन या हवाई मार्ग की सुविधा उपलब्ध करवानी चाहिए थी।

पुलवामा में हुआ हमला पूरी तरह से इंटेलिजेंस फेलियर माना जा रहा है। आईबी ने हमले से पहले इनपुट्स दिए थे, उसके बाद भी इसे नजरअंदाज किया गया। सड़क मार्ग से होकर जम्मू से श्रीनगर की ओर सीआरपीएफ के 78 वाहनों का काफिला निकल रहा था, जिसमें 2,500 से भी ज्यादा जवान थे।

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