शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी आए कश्मीरी पंडितों के साथ, दो मिनट का मौन रख जताई एकजुटता
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में पिछले एक माह से शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कश्मीरी पंडितों के साथ सद्भावना का प्रदर्शन किया है। फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री के एक ट्वीट के बाद हुए विवाद के बीच ही प्रदर्शनकारियों ने कश्मीरी पंडितों के पक्ष में प्रदर्शन किया। रविवार को प्रदर्शनकारियों ने कश्मीरी पंडितों से एकजुटता दर्शाने वाली मीटिंग बुलाई। घाटी में जब आतंकवाद ने सिर उठाना शुरू किया तो 19 जनवरी 1990 को जम्मू कश्मीर घाटी में बसे सभी पंडितों को चले जाने को कह दिया गया था।

विवेक अग्निहोत्री के ट्वीट पर घमासान
शनिवार को विवेक ने ट्वीट किया था। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा था कि शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी, कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अत्याचार का जश्न मनाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की तरफ से दो महत्वपूर्ण कश्मीरी पंडितों थियेटर आर्टिस्ट इंदर सलीम और एमके रैना को मीटिंग में बुलाया गया था। दोनों ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ को संबोधित भी किया। एमके रैना ने इस दौरान कहा कि शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों का कश्मीरी पंडितों के साथ आना यह दिखाता है कि उन्होंने उस दर्द को समझा है जिससे कश्मीरी पंडित और पंजाब के सिख गुजरे हैं। विवेक के ट्वीट पर उन्होंने कहा कि उन्हें, प्रदर्शनकारियों की मंशा पर कोई संदेह नहीं है। सिर्फ वही लोग उस दर्द को समझ सकते हैं जो एक अल्पसंख्यक होने की वजह से अत्याचार झेलने को मजबूर हुए हैं।
पीएम मोदी से SIT की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कश्मीरी पंडितों के लिए दो मिनट का मौन भी रखा। पिछले एक माह से शाहीन बाग में लोग सीएए के विरोध में बैठे हुए हैं। कश्मीरी पंडितों की तरफ से इस मौके एसआईटी गठित करके कश्मीर में हुई हत्याओं की जांच कराने की मांग की गई है। सतीश महलाधर ने कहा कि कश्मीरी पंडित सीएए का समर्थन करते हैं मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विस्थापित कश्मीरी पंडितों को घाटी में फिर से बसाने के बारे में सोचना चाहिए। सतीश ने कहा कि कश्मीरी पंडित, देश में सबसे सताया हुआ समुदाय है।












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