जानिए पिछले बजट में किए वो वादे जो अबतक पूरा नहीं कर पाई सरकार

नयी दिल्ली (ब्यूरो)। फरवरी के अंत में आने वाले बजट पर सबका ध्यान बना हुआ है। मोदी सरकार भी पूरे एक्शन में है। इस बजट में सरकार ब्लैकमनी पर खासा ध्यान रख सकती है और इसपर अंकुश लगाने के लिए नकदी रखने की सीमा तय कर सकती है। हालांकि यह सीमा कारोबारियों को ध्यान में रख की तय की जाएगी।

वहीं इस बजट में स्कूल, कॉलेजों में नकद डोनेशन पर पाबंदी लग सकती है और डोनेशन अकाउंट पेई चेक से देना जरूरी हो सकता है। लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि अभी कई चीजें जो पिछले बजट में पेश की गई थी उन्हें पूरा तक नहीं किया गया है।

पिछले दिनों वित्त मंत्रालय ने ट्विटर पर एक ग्राफिक्स पोस्ट कर बताया कि सरकार ने पिछले बजट में जो ऐलान किया था उसे पूरा भी किया। लेकिन वो ये बताना भूल गई वो ये कि कौन से वादे अब भी पूरे नहीं हुए। तो आईए तस्वीरों के माध्यम से आपको उन वादों के बारे में बताते हैं जो अबतक पूरे नहीं हुए हैं:

नहीं आई ब्लैकमनी

नहीं आई ब्लैकमनी

बजट में काला धन का खुलासा करने वालों के लिए खास स्कीम लाने का ऐलान किया गया था। स्कीम तो आई लेकिन काला धन नहीं आया। 90 दिन सरकार ने स्कीम चलाई और सामने आए महज 3770 करोड़ रुपये।

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम

महत्वाकांक्षी गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम का हाल भी बुरा रहा। स्कीम तो आई लेकिन इसमें गोल्ड नदारद रहा। शुरुआत के 15 दिन में इसमें महज 400 ग्राम सोना सामने आया। सरकार को उम्मीद अब देश के बड़े मंदिरों से है।

सरकारी कर्ज के मैनेजमेंट के लिए बनानी थी एजेंसी

सरकारी कर्ज के मैनेजमेंट के लिए बनानी थी एजेंसी

पब्लिक डेट मैनेजमेंट एजेंसी लाने का वादा बजट के बाद सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा। लेकिन सरकारी कर्ज के मैनेजमेंट के लिए सरकार और आरबीआई से बराबर दूरी रखने वाली इस संस्था के प्रस्ताव को अभी तक कैबिनेट से ही मंजूरी नहीं मिली है।

दिवालिया संहिता बिल

दिवालिया संहिता बिल

इंडस्ट्री और निवेशक के बीच आर्थिक सुधार के मोर्चे पर बैंकर्प्सी कोड जीएसटी के बराबर का महत्व रखता है। लेकिन अभी तक ये हकीकत नहीं बन पाया है और बिल संसद में अटका है।

वित्तीय गड़बड़ियों के लिए बनना था कानून

वित्तीय गड़बड़ियों के लिए बनना था कानून

इंडियन फाइनेंशियल कोड को अभी तक कैबिनेट से भी मंजूरी नहीं मिली है। फाइनेंशियल सेक्टर रिफॉर्म के मोर्चे पर ये सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे इस सेक्टर में रेगुलेशन काफी आसान हो जाता। लेकिन अभी तक इस पर फैसला तो दूर, प्रस्ताव तक कैबिनेट से मंजूर नहीं हो पाया है।

यूनीफाइड एग्रीकल्चर मार्केट

यूनीफाइड एग्रीकल्चर मार्केट

कृषि उत्पादों के एक बाजार से दूसरे बाजार तक मुक्त। प्रवाह, मंडी के अनेकों शुल्कों से उत्पादकों को बचाने और उचित मूल्य पर लोगों को कृषि उत्पाद मुहैया कराने के लिए सरकार ने यूनीफाइड एग्रीकल्चर मार्केट बनाने का अहम फैसला लिया था लेकिन वो भी जमीन पर उतर नहीं पाया है।

पोस्ट ऑफिस को बैंक बनाने का काम

पोस्ट ऑफिस को बैंक बनाने का काम

पोस्ट ऑफिस को बैंक बनाने की सरकार की घोषणा परवान नहीं चढ़ सकी। पोस्ट ऑफिस में बैंक की सुविधाएं अभी तक शुरू नहीं हो पाई हैं। अभी तो सिर्फ रिजर्व बैंक से लाइसेंस ही मिल पाया है। लेकिन पोस्ट ऑफिस अभी तक बैंक की सुविधाएं देने के लिए तैयार नहीं हो पाया है।

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