लोकसभा चुनाव 2019: विरुधुनगर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: विरुधुनगर लोकसभा सीट की से AIADMK नेता टी. राधाकृष्णन ( T. Radhakrishnan)सांसद हैं। उन्होंने साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर MDMK नेता वाइको (Vaiko) को 145, 551 वोटों से हराया था। टी. राधाकृष्णन को यहां पर 406, 694 वोट मिले थे तो वहीं वाइको को मात्र 261,143 वोट प्राप्त हुए थे। इस सीट पर नंबर तीन पर DMK,नंबर 4 पर कांग्रेस और नंबर 5 पर CPM थी। DMK प्रत्याशी को 241, 505 वोट, कांग्रेस प्रत्याशी को 38,482 और CPM प्रत्याशी को 20, 157 वोट प्राप्त हुए थे।

परिसीमन के बाद यह लोकसभा सीट अस्तित्व में आई, जहां साल 2009 में लोकसभा चुनाव हुए जिसे कि कांग्रेस पार्टी ने जीता था और मनिका टैगोर (Manicka Tagore) यहां से सांसद चुने गए। साल 2014 का चुनाव में यहां पर AIADMK ने जीत दर्ज की और टी. राधाकृष्णन यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे, दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक टी. राधाकृष्णन की पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उपस्थिति 74% रही है, इस दौरान इन्होंने 11 डिबेट में हिस्सा लिया है और 842 प्रश्न पूछे हैं, इनके बहुत सारे सवाल विरुधुनगर के विकास से ही जुड़े रहे हैं, टी. राधाकृष्णन, विरुधुनगर जिले के सचिव और तीन बार शिवकाशी पंचायत यूनियन के चेयरमैन रह चुके हैं। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 13,50,495 थी, जिसमें से केवल 10,10,930 लोगों ने यहां अपने मतों का प्रयोग यहां पर किया, जिसमें पुरुषों की संख्या 4,97,074 और महिलाओं की संख्या 5,13,856 थी।
विरुधुनगर, एक परिचय-प्रमुख बातें
तमिलनाडु राज्य का विरुधुनगर जिला राजधानी चेन्नई से 53 किमी की दूरी पर स्थित है, यह अंग्रेजों के जमाने में यह व्यापार का मुख्य केंद्र हुआ करता था। यह तमिलनाडु के पूर्व सीएम और भारत रत्न कुमारास्वामी कामराज का जन्म स्थान है। बहुत सारी ऐतिहासिक विरासत को खुद में संजोए विरुधुनगर की जनसंख्या 17,84,083 थी, जिसमें से 45 प्रतिशत लोग ग्रामीण इलाकों में और 54 प्रतिशत लोग शहरी इलाकों में रहते हैं, यहां की 16.85% आबादी एससी वर्ग की है। यहां 93.84 % लोग हिंदू धर्म में और 2.46 % लोग इस्लाम धर्म में भरोसा करते हैं। यहां की साक्षरता दर 80.15 प्रतिशत है जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 87.71 प्रतिशत और महिलाओं की साक्षरता दर 72.69 प्रतिशत है।
साल 2009 में यहां पर कांग्रेस का राज था लेकिन साल 2014 के चुनाव में यहां पर कांग्रेस का प्रदर्शन काफी खराब रहा था, वो नंबर चार पर यहां पर थी और तो और पिछले चुनाव में उसका तमिलनाडु में खाता भी नहीं खुला था तो वहीं इस सीट समेत पूरे तमिलनाडु में अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था। मुख्यमंत्री जयललिता की अगुवाई में इस पार्टी ने राज्य की 39 सीटों में से 37 सीटों पर फतेह हासिल की थी लेकिन जयललिता के निधन के बाद पार्टी आंतरिक कलह से गुजरी है और उसने बिखराव का दंश झेला है, ऐसे में क्या एक बार फिर से यह पार्टी साल 2014 वाला करिश्मा दोहरा पाएगी, यह एक बड़ा सवाल है, जिसका जवाब जानने के लिए हमें चुनावी नतीजों का इंतजार करना पड़ा होगा , वैसे इसमें कोई शक नहीं कि इस बार इस सीट पर मुकाबला काफी कड़ा होगा, जिसमें सफलता उसी को मिलेगी जिसे जनता का साथ मिलेगा, देखते हैं जनता किसके नाम पर अपना मुहर लगाती है। बताते चले पिछले चुनाव में कांग्रेस की तरह डीएमके को भी प्रदर्शन यहां पर काफी खराब रहा था, उसका भी खाता नहीं खुला था, राज्य में एनडीए का वोट शेयर 18.5% और एआईएडीएमके का 44.3% शेयर था।












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