लोकसभा चुनाव 2019: वलसाड लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: गुजरात की वलसाड लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के केसी पटेल हैं। उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के किशनभाई पटेल को 208, 004 वोटों से हराया था। डॉ. केसी पटेल को यहां पर 6,17,772 वोट हासिल हुए थे तो वहीं कांग्रेस प्रत्याशी को 4,09,768 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। साल 2014 के चुनाव में यहां पर कुल मतदाताओं की संख्या 15,12,061 थी, जिसमें से मात्र 11,22,203 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिसमें पुरुषों की संख्या 5,82,311 और महिलाओं की 5,39,892 थी।

गुजरात सीट से जुड़ा है संयोग
वलसाड लोकसभा सीट से एक खास संयोग जुड़ा हुआ है. दरअसल स्थानीय नेताओं को लगता है कि इस सीट पर जीत दिल्ली में सत्ता की राह बनाती है। गुजरात की 26 लोकसभा सीटों में से एक वलसाड इस संयोग की वजह से राजनीतिक दलों में शुभ और बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अगर पिछले रिकार्ड पर नजर डाले तो यह बात पुख्ता भी होती है। 1996 में भाजपा ने पहली बार यह सीट जीती थी, तब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी थी, यह और बात है कि वो सरकार केवल 13 दिन ही चल पाई थी। वाजपेयी दोबारा 1998 और फिर 1999 में प्रधानमंत्री बने। दोनों ही बार लोकसभा चुनावों में भाजपा ने वलसाड सीट पर जीत दर्ज की थी।
इसके बाद 2004 के 14 वें लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने भाजपा से यह सीट छीन ली और तब केंद्र में संप्रग सरकार का गठन हुआ। इस सीट से कांग्रेस के किशन पटेल ने चुनाव जीता था। 2009 के 15 वें लोकसभा चुनावों में निवर्तमान सांसद पटेल दोबारा सीट से निर्वाचित हुए और केंद्र में दोबारा कांग्रेस की सरकार बनी। सीट के साथ जुड़े इस संयोग को देखते हुए ही भाजपा ने साल 2014 में गुजरात के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. केसी पटेल को चुनावी मैदान में उतारा था जबकि कांग्रेस ने दो बार के सांसद किशन पटेल को एक बार फिर टिकट दिया था। यहां आपको यह भी बता दें कि 1977 के बाद से हुए आम चुनावों में कांग्रेस ने पांच बार वलसाड सीट जीती है, भाजपा 4 बार यहां विजयी रही जबकि दो बार सीट अन्य दल के उम्मीदवारों के खाते में गई। वैसे आपको बता दें कि वलसाड संसदीय सीट के अंतर्गत विधानसभा की 7 सीटें आती हैं। वलसाड सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।
किशनभाई पटेल का लोकसभा में प्रदर्शन
साल 2014 के चुनाव में यहां से केसी पटेल सांसद पहुंचे, उन्होंने साल 2009 में चुने गए सांसद किशनभाई पटेल को यहां हराया था, पेशे से डॉक्टर पटेल का जन्म भी वलसाड में हुआ है और उन्होंने सूरत के मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई पूरी की है, दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में पटेल की उपस्थिति 80 प्रतिशत रही है और उन्होंने मात्र 1 डिबेट में हिस्सा लिया है और एक भी प्रश्न नहीं पूछे हैं।
फिलहाल आंकड़ों के हिसाब तो इस सीट पर केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है, जिसमें कभी भाजपा का पलड़ा भारी तो कभी कांग्रेस का पलड़ा भारी है। केसी पटेल की जीत में मोदी लहर की भी अहम भूमिका थी लेकिन इस बार क्या एक बार फिर यह लहर यहां काम करेगी ये एक बड़ा सवाल है, जिसका जवाब चुनावी नतीजे देंगे, देखते हैं इस बार वलसाड की जनता किसे अपना सरताज चुनती है।












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