लोकसभा चुनाव 2019- सीतामढ़ी लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: बिहार की 40 लोकसभा सीटें अति महत्वपूर्ण हैं। बिहार की सीतमढ़ी लोकसभा सीट से उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा के नेता राम कुमार शर्मा सांसद हैं। मां सीता की जन्मस्थली कहे जाने वाले इस शहर का अपना एक धार्मिक और सियासी महत्व है। कहते हैं कि रामायण काल में यह मिथिला राज्य का एक महत्वपूर्ण अंग था। 2011 की जनगणना के अनुसार सीतामढ़ी की जनसंख्या 3,423,574 है, जिसमें पुरुषों की संख्या 1,803,252 और महिलाओं की संख्या 1,620,322 है, यहां की औसत साक्षरता दर 52 प्रतिशत है और यहां की मुख्य भाषा मैथिली है। यहां हिंदुओं की आबादी 78 प्रतिशत और मु्स्लिमों की 21 प्रतिशत है।

सीतामढ़ी लोकसभा सीट का इतिहास
सीतामढ़ी लोकसभा सीट पर 1962 से लेकर 1971 तक कांग्रेस का राज रहा है लेकिन साल 1977 के आम चुनाव में यहां पर समता पार्टी के महंत श्याम सुंदर दास बतौर सांसद निर्वाचित हुए। 1980 में यहां कांग्रेस की वापसी हुई और 1984 तक उसका राज रहा। 1989 में जनता दल के हुकुमदेव नारायण यादव ने यहां पर कांग्रेस का विजय रथ रोका। 1991, 96 और 99 में जनता दल के नवल किशोर का इस सीट पर राज रहा वहीं 1998 में यहां राजद ने अपना खाता खोला और सीतराम यादव यहां से सांसद चुने गए। साल 1999 में ये सीट जनता दल यूनाईटेड के हाथ में चली गई लेकिन साल 2004 में वापस यहां राजद की जीत हुई लेकिन साल 2009 में यहां से JDU के अर्जुन रॉय विजयी हुए तो वहीं साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार इस सीट पर एनडीए से भाजपा गठबंधन के तहत रालोसपा के टिकट पर राम कुमार शर्मा को सांसद बनने का मौका मिला था।राम कुमार शर्मा 411265 वोट मिले थे जबकि राजद के प्रत्याशी को 263300 वोट हासिल हुए थे, उस साल इस सीट पर नंबर 2 पर RJD, नंबर 3 पर JDU और नंबर 4 पर IND रही थी साल 2014 के मतदान के दौरान यहां पर 15 लाख, 74 हजार 914 मतदाता लिस्ट में थे, जिसमें से केवल 9 लाख 588 मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया, जिसमें पुरुषों की संख्या 4 लाख 49 हजार 303 और महिलाओं की संख्या 4 लाख 51 हजार 285 था।
राम कुमार शर्मा का लोकसभा में प्रदर्शन
पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में सांसद राम कुमार शर्मा की उपस्थिति 92 प्रतिशत रही है और 25 डिबेट में हिस्सा लिया है और 195 प्रश्न पूछे हैं। पिछले 5 सालों के दौरान यहां के सियासी समीकरण बदल चुके हैं क्योंकि जदयू अब एनडीए के साथ है। जबकि, उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन में आ चुके हैं, यहां के मौजूदा सांसद रामकुमार शर्मा हैं, जो कि कुशवाहा की पार्टी से है, अगर सीतामढ़ी का जातीय समीकरण देखा जाए तो यादव वोटर अपने दम पर यहां हमेशा से जीत-हार तय करती है। यहां से अब तक सबसे ज्यादा बार यादव सांसद ही जीते हैं, इस सीट से आज तक बीजेपी का कोई सांसद नहीं हुआ है वैसे एनडीए में जदयू के आने से उसकी ताकत बढ़ी है, यादव और अल्पसंख्यक मतों की गोलबंदी हार-जीत का फैसला बदल सकती है, देखते हैं इस बार इस सीट का सिकंदर कौन बनता है।












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