लोकसभा चुनाव 2019- शिवहर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: बिहार की शिवहर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भारतीय जनता पार्टी की नेता रमा देवी सांसद हैं। शिवहर बिहार का सबसे छोटा और आर्थिक- सामाजिक दृष्टिकोण से अत्यंत ही पिछडा हुआ जिला है। शिवहर इससे पहले मुजफ्फरपुर और उसके बाद सीतामढी जिले का अंग रहा है लेकिन 6 अक्टूबर 1984 को शिवहर एक स्वंतत्र जिले के रूप में अस्तित्व में आया। ये राज्य का इकलौता संसदीय क्षेत्र है, जिसके अन्तर्गत इस जिले का सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र आता है।

शिवहर संसदीय सीट का इतिहास
शिवहर संसदीय क्षेत्र तीन जिलों के छह विधानसभा क्षेत्रों से मिल कर बना है। इस संसदीय क्षेत्र में पूर्वी चम्पारण जिले के तीन क्षेत्र -मधुबन, चिरैया और ढाका,शिवहर जिले का शिवहर, सीतामढ़ी जिले का रीगा और बेलसंड विधानसभा क्षेत्र शामिल है। अस्सी के दशक की बात करें तो साल 1980 और 1984 में यहां कांग्रेस का प्रभुत्व रहा लेकिन 1989 में यहां जनता दल ने जीत अर्जित की और हरिकिशोर सिंह यहां से सांसद बने। वो लगातार दो बार इस सीट पर विजयी हुए। साल 1996 में यहां पर समता पार्टी की जीत हुई और आंनद मोहन सिंह सांसद चुने गए वो 1998 में भी यहां से एमपी बने लेकिन इस बार वो राष्ट्रीय जनता पार्टी से चुनाव में उतरे थे। साल 1999 में यहां RJD ने बाजी मारी और साल 2004 में भी ये सीट राजद के ही नाम रही और सीताराम सिंह सांसद चुने गए लेकिन साल 2009 में ये सीट भाजपा के नाम हो गई और रमा देवी यहां से लोकसभा पहुंचीं, साल 2014 में भी उन्होंने दोबारा से यहां जीत दर्ज की।
रमा देवी का लोकसभा में प्रदर्शन
लगातार दो बार शिवहर से एमपी बनने वाली रमा देवी बिहार सरकार के पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की पत्नी हैं। पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उनकी उपस्थिति 97 प्रतिशत रही है और इस दौरान उन्होंने 126 डिबेट में हिस्सा लिया है और 566 प्रश्न पूछे हैं। रमा देवी को सर्वश्रेष्ठ महिला सांसद अवॉर्ड से सम्मानित भी किया जा चुका है।
साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर RJD, नंबर 3 पर JDU और नंबर 4 पर सपा थी। उस साल यहां मतदाताओं की संख्या 14 लाख 89 हजार 724 थी , जिसमें से 8 लाख 42 हजार 894 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिसमें पुरुषों की संख्या 4 लाख 33 हजार 416 थी और महिलाओं की संख्या 4 लाख 9 हजार 478 थी। वैसे तो रमा देवी ने दो बार इस सीट पर जीत हासिल की है। ऐसे में क्या यहां इस बार बीजेपी जीत की हैट्रिक पूरी कर पाएगी, यह एक बड़ा सवाल है।












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