लोकसभा चुनाव 2019- पूर्वी चंपारण लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं, जो सियासी दलों की किस्मत तय करने में सक्षम हैं। पूर्वी चंपारण लोकसभा सीट से इस वक्त भाजपा के दिग्गज नेता राधामोहन सिंह सांसद हैं। उन्होंने साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर राजद नेता बिनोद कुमार को भारी मतों से हराया था। बिहार की सियासत में अलग पहचान रखने वाला चंपारण का पूर्वी जिला 1971 में अस्तित्व में आया। जिसका मुख्यालय मोतिहारी है, चंपारण का नाम 'चंपा + अरण्य' से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है 'चंपा के पेड़ों से आच्‍छादित जंगल'। एक ओर चंपारण की भूमि मां सीता की शरणस्थली होने से पवित्र है वहीं दूसरी ओर आधुनिक भारत में गांधीजी का चंपारण सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास का अमूल्य पन्ना है, जिस पर हर भारतीय को नाज है।

profile of Purvi Champaran lok sabha constituency

पूर्वी चंपारण लोकसभा सीट का इतिहास

साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद चंपारण के तीनों लोकसभा क्षेत्रों के नाम, पहचान और भूगोल बदल गए। परिसीमन के बाद यहां साल 2009 में आम चुनाव हुआ था, जिसे बीजेपी ने ही जीता और साल 2009 से ही यहां राधामोहन सिंह सांसद हैं, जो कि इस वक्त केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री भी हैं। बिहार के बड़े नेता राधा मोहन सिंह इससे पहले नौंवी, ग्यारहवीं, तेरहवीं और पंद्रहवीं लोकसभा के सांसद भी निर्वाचित हो चुके हैं।

साल 2014 में हुए चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 RJD, नंबर 3 पर JDU और नंबर 4 पर IND थे, उस साल यहां पर भाजपा नेता राधामोहन को 40,04,52 वोट मिले थे तो वहीं राजद प्रत्याशी को 20,82,89 वोटों पर संतुष्ट होना पड़ा था। साल 2014 में इस सीट में मतदाताओं की संख्या 14 लाख 52 हजार 963 थीं, जिसमें से केवल 8 लाख, 22 हजार 671 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था। जिसमें पुरुषों की संख्या 4 लाख 42 हजार 103 थी और महिलाओं की संख्या 3 लाख 80 हजार 568 थी। पूर्वी चंपारण में हिंदुओं की संख्या 80 प्रतिशत और मुस्लिमों की 19 प्रतिशत है।

बिहार को ऊपर वाले ने अभूतपूर्व प्राकृतिक सुंदरता के भंडार से नवाजा है, बावजूद इसके यहां विकास की गति काफी धीमी है, पूर्वी चंपारण भी इससे अछूता नहीं है। यहां के किसान आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो वहीं युवागण रोजगार के लिए तरस रहा है। ऐसे में विकास के नाम पर वोट मांगने वाली बीजेपी की यहां पर जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि यहां की जनता अपने सांसद राधामोहन सिंह से किस हद तक संतुष्ट है। इस सीट में नीतीश कुमार फैक्टर भी शामिल होगा क्योंकि राज्य में उनकी सरकार है और वो बीजेपी के साथ हैं, यहां आपको यह भी बताते चलें कि बिहार एनडीए में सीटों को लेकर बंटवारा हो चुका है जिसके तहत इस बार 40 लोकसभा सीटों वाले राज्य में बीजेपी 17, जेडीयू 17 और एलजेपी 6 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

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