लोकसभा चुनाव 2019: तंजावुर लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: तमिलनाडु की तंजावुर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानि एआईएडीएमके के के. परसुरमन है। आम चुनाव 2014 में जब देश के बड़े हिस्से में मोदी लहर चल रही थी, तब तमिलनाडु के वोटरों ने भी असाधारण जनादेश दिया। राज्य की 37 सीटों पर एआईएडीएमके ने पताका फहरा दी। 35 साल डीएमके और कांग्रेस को नेतृत्व देने के बाद जनता ने तंजावुर लोकसभा सीट पर भी एआईएडीएमके को 50 फीसदी वोटों के साथ वापसी करा दी। इस सीट पर 10 लाख 12 हजार 258 वोट पड़े, जो कुल मतदाताओं का 75.54 फीसद था। निकटतम प्रतिद्वंदी डीएमके के टीआर बालु थे, जिन्हें 36 फीसदी वोट से संतुष्टि करनी पड़ी।

profile of Thanjavur lok sabha constituency
हालांकि विधानसभा चुनाव 2016 में तंजावुर की जनता का मूड फिर बदला हुआ नजर आया. लोकसभा क्षेत्र की 6 विधानसभा सीटों में से 2 पर एडीएमके, 2 पर डीएमके जबकि सिर्फ 1 पर एआईएडीमके का कब्जा बना। तंजावुर सीट पर एडीएमके के रेंगासामी को स्पीकर ने 2016 में ही अयोग्या करार दे दिया था। हालांकि गौर करने वाली बात ये है कि विधानसभा में 134 सीट जीतकर एआईएडीएमके ने सरकार बनाई। मतलब पूरा तमिलनाडु हाथ से नहीं निकला, लेकिन तंजावुर ने भरोसा नहीं दोहराया।

तंजावुर यानि तंजौर ऐतिहासिक जगह है. कावेरी के उपजाऊ डेल्टा क्षेत्र में होने के कारण इसे दक्षिण में चावल के कटोरे के नाम से भी जाना जाता हैं। मतलब साफ है अन्नदाता ही नेताओं के लिए भाग्यविधाता बनते हैं। बीएससी से ग्रेजुएट 58 साल के. परसुरमन ने लोकसभा की 78 चर्चाओं में हिस्सा लेकर 555 सवाल दागे। जबकि लोकसभा के माननीयों का चर्चा में हिस्सा लेने का औसत 63.8 है और सवाल पूछने का औसत 273 है। सवाल पूछने में बेहद सक्रिय रहकर एआईएडीएमके सांसद पार्लियामेंट में कोई भी प्राइवेट मेंबर बिल नहीं लाए। संसद के निम्न सदन में परसुरमन की हाजिरी 69 फीसदी रही।

इतिहास में झांके तो 1979 से 1996 तक तंजावुर संसदीय सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा। 1996 से 2014 तक 5 बार हुए चुनाव में डीएमके एकछत्र विजेता बनी रही। 1977 के 35 साल बाद 2014 में तंजावुर के जनादेश से बड़ा बदलाव हुआ, जब एआईएडीएमके की वापसी हुई। लेकिन सिर्फ 2 साल बाद विधानसभा चुनाव में जनता ने एआईएडीमके को तंजावुर में झटका दे दिया।

2016 में सुप्रीमो जयललिता के निधन के बाद से ही एआईएडीएमके में भारी घमासान छिड़ गया और सियासी समीकरण फिर बदल गए। शशिकला के भतीजे और कभी पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे टीटीवी दिनाकरन की अगुवाई में कई विधायकों ने पार्टी और इसकी साख को प्रभावित किया है। अभी राज्य में सीएम के. पलानीस्वामी की अगुवाई में एआईएडीमके की सरकार बरकरार है। 2019 की लोकसभा जंग में तंजावुर से के. परसुरमन. का भविष्य भी इसी बदले चुनावी समीकरण के गर्भ में है।

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