लोकसभा चुनाव 2019: नई दिल्‍ली लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: दिल्ली की नई दिल्ली सीट से मौजूदा सांसद मीनाक्षी लेखी हैं। साल 2014 के चुनाव में मीनाक्षी लेखी ने आम आदमी पार्टी के आशीष खेतान को 162,708 से हराया था। इस सीट पर कुल मतदाता 14,90,147 थे। 65 फीसदी लोगों ने 2014 में अपने मत का प्रयोग किया। यानी कुल 969,812 लोगों ने वोट दिया, जिनमें 546,295 पुरुष और 423,517 महिलाएं शामिल थीं। इस सीट से एक से एक दिग्गज हस्तियां संसद पहुंचीं हैं। फ्रीडम फाइटर सुचेता कृपलानी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व अभिनेता राजेश खन्‍ना और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्‍ठ नेता लाल कृष्‍ण आडवाणी यहां से सांसद रह चुके हैं।

profile of New Delhi lok sabha constituency
साल 1951 के बाद से अब तक तीन बार इसका परिसीमन बदला, लेकिन हां नाम नई दिल्‍ली ही रहा। संसद भवन, सचिवालय, सुप्रीम कोर्ट, रायसीना हिल्‍स, आदि समेत तमाम महत्‍वपूर्ण कार्यालय नई दिल्‍ली लोकसभा सीट का हिस्‍सा हैं। लिहाज़ा इस क्षेत्र का विकास बेहद मायने रखता है। और यही कारण है कि नई दिल्‍ली के सांसद पर एक अलग ही जिम्‍मेदारी होती है। मीनाक्षी पहली एक वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता हैं। उनके अधिवक्‍ता वाले गुण सदन के अंदर भी खूब दिखाई दिये। मई 2014 से लेकर दिसंबर 2018 तक मीनाक्षी लेखी ने महज 117 डिबेट में हिस्‍सा लिया, जबकि राज्‍य का औसत 61.7 है और राष्‍ट्रीय औसत 63.8 है। प्राइवेट मेंबर बिल की बात करें तो लेखी ने 19 बिल पेश किये, जबकि राज्‍य का औसत 11 और देश का औसत 2 प्राइवेट बिल का है। प्रश्‍न पूछने के मामले में भी लेखी काफी आगे रहीं। राज्‍य का औसत जहां 290 प्रश्‍नों का था वहीं राष्‍ट्रीय औसत 273 प्रश्‍नों का और मीनाक्षी ने संसद में 405 सवाल किये।

पिछले चुनाव में भाजपा को 46.7 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि आम आदमी पार्टी को 29.96 और कांग्रेस के अजय माकन के खाते में 18.87 प्रशितत वोट आये थे, जोकि 2009 के मुकाबले 40 फीसदी कम थे। यानी पिछली बार भाजपा और आप पार्टी ने मिलकर कांग्रेस के वोटबैंक पर सेंध लगायी। इस बार सूची में करीब 5 से 10 प्रतिशत तक नये वोटर भी जुड़ेंगे। अगर ये वोटर लेखी के काम से खुश हैं, तो भी जरूरी नहीं है कि वो जीत जायें, क्‍योंकि लेखी की जीत में केंद्र सरकार की परफॉमेंस भी मायने रखेगी। लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि अजय माकन और आशीष खेतान लेखी को बड़ी चुनौती दे सकते हैं। और हां, यह मत भूलियेगा कि 1984 के बाद से यहां की जनता ने कांग्रेस और भाजपा के अलावा किसी भी अन्‍य पार्टी को मौका नहीं दिया है। लिहाज़ा आप पार्टी के लिये लोगों का दिल जीतना ज्‍यादा कठिन होगा। खैर यह तो पक्‍का है कि इस सीट पर तीन दलों के बीच कांटे की टक्क्‍र होगी। खैर टक्कर कैसी भी हो, हमें इंतज़ार रहेगा परिणाम का।

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