लोकसभा चुनाव 2019: जोरहाट लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली। असम की जोरहाट लोकसभा सीट पर इस वक्त भारतीय जनता पार्टी के नेता कामाख्या प्रसाद तासा सांसद हैं। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बिजॉय कृष्ण को 1,02,420 वोटों से हराकर यह सीट अपने नाम की थी। जबकि तीसरे स्थान पर असम गण परिषद के उम्मीदवार प्रॉदीप हजारिका रहे। भोगदोई नदी के किनारे बसा जोरहाट असम का म‍हत्‍वपूर्ण शहर माना जाता है। इसकी स्थापना 18 वीं सदी के अन्तिम दशक में हुई थी। जोरहाट लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 12) में कुल मतदाताओं की संख्या 12,34,448 है। इनमें से 6,34,236 मतदाता पुरुष हैं और 6,00,212 महिलाएं हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में 9,31,336 लोगों मतदान किया था। इनमें 4,83,829 मतदाता पुरुष और 4,47,507 मतदाता महिलाएं थी।

 profile of Jorhat lok sabha constituency

राजनीतिक घटनाक्रम:

जोरहाट लोकसभा सीट कांग्रेस का गण मानी जाती है, लेकिन 2014 में मोदी लहर के चलते यह सीट कांग्रेस हार गई। इस पर 1957 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के अहमद मोफिदा सांसद चुने गए थे। 1962 के चुनाव में पीएसपी के राजेंद्रनाथ बरुआ ने कांग्रेस से यह सीट छीन ली। 1967 में राजेंद्र बरुआ कांग्रेस में शामिल हो गए और यहां से फिर सांसद बने। 1971 और 1977 में कांग्रेस के तरुण गोगोई यहां से सांसद चुने गए। 1985 में निर्दलीय उम्मीदवार पराग लिल्हा कांग्रेस को हारकर सांसद बने। 1991 से लेकर 2009 के बीच कांग्रेस के बिजॉय कृष्णा 6 बार सांसद चुने गए। लेकिन 2014 के चुनाव में उन्हें बीजेपी के कामाख्या प्रसाद तासा ने हरा दिया। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कुल 75 फीसदी मतदान हुआ था। 1985 के 2014 के बीच यहां पर इस सीट पर 6 बार कांग्रेस और 1 बार बीजेपी जीती है।

मौजूदा सांसद के बारे में:
मौजूदा सांसद कामाख्या प्रसाद तासा पहली बार बीजेपी के टिकट पर इस सीट से चुनाव जीते हैं। अगर हम उनके पांच साल के कार्यकाल पर नजर डालें तो उन्होंने पांच साल में लोकसभा में 104 प्रश्न पूछे, जबकि उन्होंने 41 डिबेट में हिस्सा लिया। वहीं अगर उनकी लोकसभा में उपस्थिति की बात करें तो वे मई 2014 से दिसंबर 2018 के बीच उनकी उपस्थिति 73 फीसदी रही। कलियाबोर एक ग्रामीण सीट है। यहां पर इस बार के चुनाव में किसानों के मुद्दे और नेशनल वोर्टस रजिस्टर, नागरिकता के कानून में बदलाव के अलावा असम अकार्ड को लागू करना अहम मुद्दे रहेंगे। इस लोकसभा सीट के अंतर्गत 10 विधानसभा सीटें जोरहाट, तितबार, मारियानी, तेओक, अमगुरी, नजीरा, महमोरा, गोल्डियर, थौरा, शिवसागर आती हैं।

जोरहाट एक परिचय: प्रमुख बातें

  • जोरहाट ऊपरी असम और नागालैंड राज्‍य का प्रवेश द्वार माना जाता है।
  • यहां पर चौकीहाट और माचरहाट नाम के दो बाजार हैं। इसी कारण इसका नाम जोरहाट रखा गया है।
  • 18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में यह नगर स्वतंत्र अहोम राज्य की राजधानी था।
  • जोरहाट को 1983 ई. में पूर्ण रूप से ज़िला घोषित किया गया था।
  • जोरहाट, यहां स्थित चाय बागानों के कारण प्रसिद्ध है। वास्‍तव में, जोरहाट और उसके आसपास के इलाके में लगभग 135 चाय के बागान स्थित है।
  • जोरहाट राज्य के प्रमुख चाय उत्पादकों में से एक है।
  • जोरहाट में मुख्यत: वैष्णव धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं।
  • जोरहाट पर वैष्णव धर्म से जुड़े अनेक मठ और सतरा भी बने हुए हैं। यह वैष्णव धर्म का सबसे बड़ा तीर्थस्थान है।
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