लोकसभा चुनाव 2019: डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली। असम की डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट ( आरक्षित) पर इस वक्त भारतीय जनता पार्टी के नेता रामेश्वर तेली सांसद हैं। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पबन सिंह घाटोवार को 35,143 वोटों से हराकर यह सीट अपने नाम की थी। चाय का शहर के नाम से मशहूर डिब्रूगढ़ असम का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यह शहर पूरे उत्तर पूर्व का सबसे बड़ा आर्थिक हब है। डिब्रूगढ़ लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 13) में कुल मतदाताओं की संख्या 11,24,305 है। इनमें से 5,79,657 मतदाता पुरुष हैं और 5,44,648 महिलाएं हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में 8,90,968 लोगों मतदान किया था। इनमें 4,62,412 मतदाता पुरुष और 4,28,556 मतदाता महिलाएं थी।

अगर बात डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट के राजनीतिक घटनाक्रम की करें तो इस सीट पर आजादी के बाद लगातार कांग्रेस का कब्जा रहा है। 1952 से लेकर 2014 के बीच इस सीट पर कांग्रेस को सिर्फ दो बार ही हार का मुंह देखना पड़ा है। 1952 में कांग्रेस के टिकट पर जोगेंद्र नाथ हजारिका पहली बार सांसद चुने गए। 1952 से लेकर 1967 तक जोगेंद्र नाथ हजारिका चार बार सांसद बने। 1971 में कांग्रेस ने रोबिन्द्र नाथ काकोटी को टिकट दिया और वे भी इस सीट से चुनाव जीत गए। 1977 और 1985 में इस सीट पर कांग्रेस ने नया प्रत्याशी उतारा। इस बार टिकट हरेन भूमजी को दी। दोनों बार वे यहां से चुनाव जीते।
1991 में कांग्रेस ने इस सीट से पबन सिंह घाटोवार को टिकट दिया। 1991 से लेकर 1999 तक पबन सिंह घाटोवार इस सीट से चार बार सांसद चुने गए। 2004 में असम गण परिषद के सर्वानंद सोनेवाल यहां से सांसद बने। 2009 में कांग्रेस इस सीट पर फिर कब्जा जमा लिया। लेकिन 2014 के चुनाव में मोदी लहर के चलते कांग्रेस ने इस सीट को फिर से गंवा दिया। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कुल 79 फीसदी मतदान हुआ था। 1952 से 2014 के बीच यहां पर इस सीट पर 12 बार कांग्रेस और 1 बार बीजेपी जीती है।
मौजूदा सांसद के बारे में:
रामेश्वर तेली बीजेपी की टिकट से पहली बार सांसद पहुंचे हैं। उन्हें कांग्रेस के पबन सिंह घाटोवार को हाराया। अगर हम उनके पांच साल के कार्यकाल पर नजर डालें तो उन्होंने पांच साल में लोकसभा में 86 प्रश्न पूछे, जबकि उन्होंने 74 डिबेट में हिस्सा लिया। वहीं अगर उनकी लोकसभा में उपस्थिति की बात करें तो वे मई 2014 से दिसंबर 2018 के बीच उनकी उपस्थिति 92 फीसदी रही।
डिबूगढ़ एक ग्रामीण सीट है। इस लोकसभा सीट के अंतर्गत 9 विधानसभा सीटें मोरन, डिब्रूगढ़, लाहोवाल, दुलियाजानस तिंगखोंग, नाहरकटिया, तिनसुकिया, डिग्बोई, मार्गेरिटा आती हैं। यहां पर इस बार के चुनाव में किसानों के मुद्दे और नेशनल वोर्टस रजिस्टर, नागरिकता के कानून में बदलाव के अलावा असम अकार्ड को लागू करना अहम मुद्दे रहेंगे।
डिब्रूगढ़ एक परिचय: प्रमुख बातें
- डिब्रूगढ़ को भारत का 'चाय का शहर' भी कहा जाता है। शहर भर में कई चाय के बागान हैं, जो ब्रिटिश के समय से हैं।
- चाय के उत्पादन के अलावा यह शहर रेशम का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
- डिब्रूगढ़ रेलमार्ग, सड़क और वायु परिवहन से शेष भारत से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
- यह शहर पूर्वी असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों के लिए एक प्रवेश द्वार का काम करता है।












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