लोकसभा चुनाव 2019: बीजापुर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
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नई दिल्ली। कर्नाटक की बीजापुर लोकसभा सीट एससी कैंडिडेट के लिए आरक्षित है। अभी यहां से बीजेपी के रमेश चंदप्पा जिगाजिनागी सांसद हैं। रमेश ने 2009 में पहली बार यहां से चुनाव जीता था इसके बाद 2014 में एक बार फिर वो यहां से चुने गए। भारतीय जनता पार्टी 1999 से लगातार इस सीट को जीतती आ रही है। रमेश चंदप्पा से पहले दो बार 1999 और 2004 में भाजपा के टिकट पर बसनगौड़ा पाटिल ने यहां से चुनाव जीता था।

68 साल के रमेश चंदप्पा की लोकसभा में उपस्थिति 97 फीसदी रही है। उन्होंने एक सवाल पूछा है लेकिन किसी बहस का हिस्सा वो नहीं रहे हैं। 1980 के बाद बात की जाए तो भाजपा और कांग्रेस यहां से चार-चार बार चुनाव जीती हैं। इस सीट पर सबसे ज्यादा नौ बार कांग्रेस को जीत मिली है, उसके बाद चार बार भाजपा यहां कामयाब हुई है। 2019 में जहां जेडीएस और कांग्रेस साथ हैं तो वहीं बसपा ने भी विधानसभा चुनाव जेडीएस के साथ लड़ा था, ऐसे में इस एससी आरक्षित सीट पर आने वाले लोकसभा चुनाव में एक दिलचस्प मुकाबला हो सकता है।
बीजापुर की कुल आबादी 21,77,331 है। इसमें 77 फीसदी ग्रामीण और 23 फीसदी शहरी आबादी है। बीजापुर सीट पर कुल मतदाता 16,22,635 हैं। इसमें 8,47,815 पुरुष और 7,74,820 महिलाएं हैं। 2014 में कुल 60 फीसदी मतदान हुआ। 9,66,757 मतदाताओं ने अपना मत दिया। इसमें पुरुषों की तादाद 5,21,565 और 4,45,192 महिला मतदाता थीं।
बीजापुर सीट के चुनावी इतिहास की बात की जाए तो अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित इस सीट के तहत आठ विधानसभा सीटें आती हैं। पहले इलेक्शन के दौरान ये सीट बॉम्बे स्टेट के तहत और उसके बाद 1957 से 1971 तक मैसूर स्टेट में आती थी। बीजापुर सीट में पड़ने वाले इलाके बीजापुर नॉर्थ और बीजापुर साउथ नाम से दो सीटों में बंटे हुए थे। तब इसे बीजापुर नॉर्थ के नाम से जाना जाता था। 1967 में इसे बीजापुर लोकसभा सीट का नाम दिया गया। 1951, 1957 और 1962 में कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी। उसके बाद 1967 में स्वतंत्रता पार्टी को सीट मिली, लेकिन 1971 में दोबारा कांग्रेस ने जीत हासिल की।
कर्नाटक बनने के बाद 1977 और 1980 का चुनाव कांग्रेस ने जीता। 1984 में जनता पार्टी ने यह सीट हासिल की। उसके बाद 1989 और 1991 में कांग्रेस ने इस सीट को अपनी झोली में डाला। 1996 में जनता दल को यहां से कामयाबी मिली। इसके बाद 1998 में हुए चुनावों मे कांग्रेस ने जीत हासिल की। इसके बाद 1999 में भाजपा ने से सीट जीती और फिर 2004, 2009 और 2014 के इलेक्शन में भारतीय जनता पार्टी को लगातार यहां से जीत मिलती रही।












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