लोकसभा चुनाव 2019: भंडारा गोंदिया लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से एक भंडारा गोंदिया सीट से मौजूदा सासद एनसीपी नेता मधुकर कुकडे हैं। साल 2014 में भाजपा नेता नाना पटोले ने जीत दर्ज की थी, उन्होंने तब यहां पर NCP के बड़े नेता प्रफुल्ल पटेल को करीब 1.5 लाख वोटों से हराया था लेकिन नाना पटोले के पार्टी और लोकसभा से इस्तीफे के बाद यहां पर साल 2018 में उपचुनाव हुआ जिसमें NCPने भाजपा को हराकर अपनी हार का बदला ले लिया। इस उपचुनाव में एनसीपी नेता मधुकर कुकडे ने भाजपा प्रत्याशी हेमंत पटले को 48,097 मतों के अंतर से हराया था।

भंडारा गोंदिया लोकसभा सीट का इतिहास
पूर्वी विदर्भ की इस लोकसभा सीट में कुल छह विधानसभा सीटे हैं, जिनके नाम हैं तुमसार, भंडारा सकोली, अर्जुनी मोरगांव, तिरोरा और गोंदिया। 2008 में परिसीमन के बाद से यह सीट अस्तित्व में आई है, इससे पहले इस लोकसभा सीट का नाम भंडारा था, अब ये सीट दो जिलों भंडारा और गोंदिया में पड़ती है और दोनों ही जिलों की तीन-तीन विधानसभा सीटें इस लोकसभा क्षेत्र के अंतरगत हैं, यहां की कुल आबादी 21,88,018 है, जिसमें से 80 प्रतिशत लोग गांवों में और 19 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं। परिसीमन के बाद इस सीट पर तीन बार चुनाव हुए जिसमें दो बार ये सीट एनसीपी ने जीती और एक बार यहां भाजपा विजयी हुई। 2008 में इस सीट के अस्तित्व में आने से पहले 2004 के चुनाव में ये सीट बीजेपी के शिशुपाल पटले के पास थी, 1999 के चुनाव में भी सीट बीजेपी के ही पास थी और इस सीट से बीजेपी के चुन्नीलाल ठाकुर ने जीत दर्ज की थी, 1991, 1996 और 1998 के चुनाव में इस सीट से प्रफुल्ल पटेल ने जीत दर्ज की थी, उस वक्त एनसीपी अस्तित्व में नहीं थी और प्रफुल्ल पटेल कांग्रेस के नेता हुआ करते थे, इस सीट पर पहली बार बीजेपी ने 1989 में जीत दर्ज की थी, बीजेपी के कुशल बोपचे ने कांग्रेस से ये सीट छीनी थी, 1979 और 1984 के चुनाव में ये सीट कांग्रेस के खाते में थी और केशवराव प्रधी ने लगातार दो बार इस सीट से जीत दर्ज की थी, 1975 में आपातकाल लगने के बाद जब 1977 में चुनाव हुए, तो पहली बार इस सीट से भारतीय लोकदल ने जीत दर्ज की थी, इस सीट से लक्ष्मणराव मनकर चुनाव जीते थे।
पिछले 23 वर्षों में भंडारा-गोंदिया लोकसभा के चुनाव में राजनीतिक समीकरण बदलते रहे हैं। जनता ने कभी कांग्रेस-राकांपा गठबंधन के उम्मीदवार को पसंद किया तो कभी भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को जीत का सेहरा पहनाया है। 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान भंडारा-गोंदिया में सबसे बड़ा मुद्दा किसान और पीने का पानी था, दिसंबर 2017 में जब बीजेपी के सांसद नाना पटोले ने इस सीट से इस्तीफा दिया तो उसकी 14 वजहें गिनाईं और उन्होंने खुलकर बीजेपी को किसानों की बदहाली के लिए जिम्मेदार ठहराया था, जिसके बाद कांग्रेस और एनसीपी के संयुक्त उम्मीदवारों ने नाना पटोले की बातों को ही मुद्दा बनाकर लोगों के बीच रखा और वो इसमें सफल हुए और एक बार ये सीट फिर से एनसीपी के खाते में चली गई। जहां इस हार से भाजपा में बेचैनी है तो वहीं एनसीपी और कांग्रेस में खुशी की लहर, बताते चलें कि कांग्रेस-एनसीपी साथ में लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं, इस जीत के बाद कांग्रेस-एनसीपी ने दावा किया है कि यही हाल भाजपा का पूरे महाराष्ट्र में होने वाला है, फिलहाल उनके दावे कितने सच साबित होते हैं, ये तो चुनावी नतीजे बताएंगे लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि लोकसभा चुनाव की जंग अब रोमांचक हो चुकी है, देखते है इस जंग में किसे विजयश्री हासिल होती है।












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