लोकसभा चुनाव 2019: काकिंदा लोकसभा सीट के बारे में जानिए
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कोकिंदा। आज हम बात करेंगे आंध्र प्रदेश की काकिंदा लोकसभा सीट के बारें, जहां से इस वक्त तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेता थोटा नरसिम्हा सांसद हैं, जिन्होंने इस सीट से साल 2014 में वाइएसआर कांग्रेस के चलमलासट्टी सुनील को मात देते हुए जीत हासिल की थी। इस चुनाव में वाइएसआर कांग्रेस और टीडीपी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली थी। क्योंकि हार-जीत के फासले के बीच में मात्र 3,431 वोटों का अंतर था। थोटा के खाते में 514,402 वोट पड़े थे जबकि दूसरी नंबर पर रहने वाले सुनील चलमलासट्टी को 510,971 वोट मिले थे।

ग्रामीण वोटरों की संख्या है ज्यादा
काकिंदा लोकसभा क्षेत्र मेमं कुल 14 लाख 18 हजार 290 वोटर हैं। इसमें 7,09,101 पुरुष वोटर हैं और 7,09,189 महिला वोटर हैं। काकिंदा लोकसभा सीट पर चुनाव ग्रामीण वोटरों पर ज्यादा निर्भर रहता है। काकिंदा के भौगोलिक स्थिति की बात करें तो यहां की कुल जनसंख्या 19,36,809 है। इसमें 65.78 प्रतिशत लोग गांवों में निवास करते हैं। जबकि 34.22 प्रतिशत शहरी वोटर हैं। इनमें से 15.43 प्रतिशत वोटर अनुसूचित जाति और 1.6 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के हैं।
सीट पर टीडीपी और वाइएसआर कांग्रेस का रहा है दबदबा
इस सीट पर खासकर दो राजनीतिक पार्टियों का कब्जा रहा है। इस सीट के लिए पहला लोकसभा चुनाव 1952 में हुआ। 80 के दशक तक यह सीट कांग्रेस के कब्जे में थी। लेकिन इसके बाद टीडीपी भी आ गई और तब से इस सीट पर इन दोनों पार्टियों के बीच में टक्कर देखने को मिलती रहती है। 1998 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को जीत मिली थी। इस तरह से देखे तो इस सीट पर टीडीपी 5 और कांग्रेस चार पर चुनाव जीत चुकी है। साल 2014 के चुनाव पर नजर डाले तो वाइएसआर कांग्रेस को 46.45 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि जीत दर्ज करने वाली पार्टी टीडीपी को 46.76 प्रतिशत वोट पड़े थे।
लोकसभा में 95 फीसदी रही है उपस्थित
मौजूदा सांसद थोटा नरसिम्हा ने लोकसभा में अभी तक 129 सवाल किए हैं। जबकि लोकसभा में इनकी उपस्थिति 95 प्रतिशत रही है। इन्होंने 66 बहसों में हिस्सा लिया है। साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में इस सीट के 78 फीसदी वोटरों ने मतदान किया था। जिनकी संख्या 10,99,999 थी। इसमें 5,58,689 पुरुष वोटर थे जबकि 5,41,310 महिला वोटर।
सीपीआई को केवल एक बार मिली है जीत
1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में इस सीट से कम्यूनिस्ट पार्टी और इंडिया के उम्मीदवार चेलिकानी वेंकट रामा राव ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद इस सीट पर सीपीआई को दोबारा कभी जीत नहीं मिल पाई। दूसरी बार 1957 में चुनाव हुए तो सीट पर कांग्रेस ने कब्जा जमा लिया। इसके बाद कांग्रेस लगातार पांच पर चुनाव जीतती रही। एमएस संजीवी राव ऐसे सांसद है जिन्होंने कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से लगातार तीन बार जीत हासिल की थी। हालांकि उसके बाद कांग्रेस से ही पल्लम राजू ने दो बार जीत हासिल की है।












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