लोकसभा चुनाव 2019- गाजीपुर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की गाजीपुर लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के मनोज सिन्हा सांसद हैं, साल 2014 में बीजेपी ने ये सीट सपा को 32452 वोटों से हराकर हासिल की थी। छोटी काशी के रूप में विख्यात गाजीपुर देश के सबसे बड़े गांव 'गहमर' की वजह से पूरे भारत में लोकप्रिय है, यहां की कुल आबादी 36,20,268 लाख है जिनमें पुरुषों की संख्या 18,55,075 लाख और महिलाओं की 17,65,193 लाख है। यहां की औसत साक्षरता दर 60.7% है।

गाजीपुर लोकसभा सीट का इतिहास-
गाजीपुर संसदीय सीट में यूपी विधानसभा की पांच सीटें आती हैं, जिनके नाम जखनिया, जंगीपुर, सैदपुर, ज़मानिया और गाज़ीपुर हैं, जिनमें से जखनिया और सैदपुर की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, कांग्रेस के हर प्रसाद सिंह यहां के पहले सांसद थे। 1967 और 1971 के चुनावों में कम्युनिस्ट पार्टी के सरजू पाण्डेय निर्वाचित होकर लोकसभा पहुंचे थे। 1977 में भारतीय लोकदल ने , 1980 और 1984 में यहां कांग्रेस ने अपना परचम लहाराया था। 20 साल के बाद 1991 में कम्युनिस्ट पार्टी ने इस सीट पर भारी जीत के साथ वापस कब्ज़ा किया था, 1996 में मनोज सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी को इस सीट पर पहली बार जीत दिलाई थी।
1998 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के ओम प्रकाश सिंह ने यहां पर सपा की जीत का अकाल ख़त्म किया लेकिन 1999 के चुनाव में मनोज सिन्हा ने अपनी पिछली हार का बदला ले लिया था और वो जीत के साथ लोकसभा पहुंचे थे, 2004 और 2009 में समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर अपना परचम लहराया लेकिन साल 2014 में ये सीट बीजेपी के ही पास चली गई और मनोज सिन्हा यहां से फिर एमपी चुने गए।
मनोज सिन्हा का लोकसभा में प्रदर्शन-
भाजपा के दिग्गज मनोज सिन्हा रेलवे के राज्यमंत्री हैं और संचार राज्यमंत्री का स्वतंत्र प्रभार संभाल रहे हैं, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल मनोज सिन्हा IIT बनारस के छात्र रह चुके हैं, उन्होंने यहां से बीटेक और एमटेक की शिक्षा ग्रहण की है। साल 1989-96 के मध्य में वे राष्ट्रीय परिषद के सदस्य भी थे तो वहीं 1999 से 2000 के मध्य वे योजना और वास्तुशिल्प विद्यापीठ के सदस्य भी रहे हैं। साल 2014 के चुनाव में यहां SP दूसरे, BSP तीसरे और RPD चौथे नंबर पर रही थी, उस साल यहां पर 1801519 मतदाताओं ने हिस्सा लिया, जिसमें 54 प्रतिशत पुरुष और 45 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं। गाजीपुर की 89 प्रतिशत आबादी हिंन्दुओं की और 10 प्रतिशत संख्या मुस्लिमों की है। बीजेपी की पुरजोर कोशिश इस सीट को वापस जीतने की होगी वहीं दूसरी ओर विरोधी दल यहां जीतने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे लेकिन इस खेल में बाजी उसी के हाथ लगेगी जिसके नाम पर जनता मुहर लगाएगी और वो किसके साथ है ये तो लोकसभा चुनाव परिणाम बताएंगे फिलहाल उम्मीद की जा सकती है कि इस सीट पर हमें कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।












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