लोकसभा चुनाव 2019- देवरिया लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की देवरिया लोकसभा सीट से भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र सांसद हैं, साल 2014 में भाजपा ने ये सीट बसपा को हराकर अपने नाम की थी। पूर्वांचल का खास हिस्सा देवरिया का जिक्र पौराणिक ग्रंथों में भी है, मंदिरों का शहर कहे जाने वाले देवरिया के नाम का मतलब ही 'देवताओं का एरिया' है। 2,535 वर्ग किलोमीटर में फैला देवरिया जिला 1946 में गोरखपुर से अलग होकर अस्त्तिव में आया था। यहां की साक्षरता दर 60.47% है , इस लोकसभा में उत्तर प्रदेश विधानसभा की पांच सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं देवरिया, फ़ाज़िल नगर, पथरदेवा, तमकुही राज और राम कारखाना। 1957 में हुए आम चुनावों में रामजी वर्मा प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते थे, 1957 से 1971 तक कांग्रेस के विश्वनाथ राय ने यहां लगातार तीन जीत हासिल की। 1977 में जनता दल के देवता मणि त्रिपाठी ने कांग्रेस की लगातार चौथी जीत पाने के सपनों पर पानी फ़ेर दिया, 1980 में देवता मणि त्रिपाठी निर्दलीय जीतकर देवरिया के प्रतिनिधि के रूप में लोकसभा पहुंचे थे, राज मंगल पाण्डेय ने 1984 में कांग्रेस और 1989 में जनता दल के टिकट पर यहां जीत हासिल की।

1991 में जनता दल ने एक बार फिर से इस सीट पर कब्ज़ा किया, 1996 में प्रकाश मणि त्रिपाठी ने भारतीय जनता पार्टी को देवरिया में पहली बार जीत दिलवाई, 1998 में सपा के मोहन सिंह और 1999 में भाजपा के प्रकाश मणि त्रिपाठी ने लोकसभा में देवरिया का प्रतिनिधित्व किया। 2009 में बहुजन समाज पार्टी ने यहां अपनी जीत का खाता खोला लेकिन साल 2014 में उससे भाजपा ने ये सीट छीन ली और कलराज मिश्र यहां से सांसद चुने गए।
कलराज मिश्र का लोकसभा में प्रदर्शन
1963 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के रूप में गोरखपुर से राजनीतिक जीवन शुरू करने वाले कलराज मिश्र की पांच सालों के दौरान लोकसभा में उपस्थिति 95 प्रतिशत रही है और इस दौरान उन्होंने सदन की सिर्फ एक डिबेट में हिस्सा लिया है, 76 वर्ष के कलराज मिश्रा यूपी के बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में पहचाने जाते हैं। यूपी के चर्चित शहरों में से एक देवरिया की 88 प्रतिशत आबादी हिंदू और 11 प्रतिशत जनसंख्या हैं।












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