लोकसभा चुनाव 2019: दादर नागर एंड हवेली लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: महाराष्ट्र और गुजरात के बीच स्थित दादर नागर एंड हवेली लोकसभा सीट से नाथू भाई गोमन भाई पटेल बीजेपी के सांसद हैं। वो 2009 में पहली बार वे सांसद चुने गये थे और 2014 में वे दूसरी बार चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे। उन्होंने कांग्रेस के मोहन भाई सांझी भाई देलकर को हराया था। दादर नागर एंड हवेली लोकसभा सीट एसटी के लिए सुरक्षित है। यह पूरे केंद्र शासित प्रदेश में फैली हुई है। यहां 1779 तक मराठा शासकों ने राज किया और फिर 1954 तक पुर्तगाली साम्राज्य का यह हिस्सा रहा। 11 अगस्त 1961 को दादर नागर एंड हवेली भारत में शामिल किया गया। 62 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है। 40 प्रतिशत हिस्सा संरक्षित वन प्रदेश है। दमनगंगा यहां की प्रमुख नदी है जो अरब सागर में गिरती है।

profile of Dadra And Nagar Haveli lok sabha constituency
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में दादर और नागर हवेली लोकसभा सीट पर कुल मतदाताओँ की संख्या 1 लाख 96 हज़ार 617 थी। इनमें पुरुष मतदाता 1 लाख 6 हज़ार 215 थे। तब 84 फीसदी मतदान हुआ था। यानी 1 लाख 65 हज़ार 286 मतदाताओं ने वोट डाले थे। विजेता उम्मीदवार बीजेपी के नाथू भाई गोमन भाई पटेल को 80 हज़ार 790 वोट मिले थे। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के मोहन भाई सांजी भाई देलकर को 74 हज़ार 576 वोट पड़े। इस तरह महज 6, 214 वोटों से बीजेपी को जीत मिली थी। कांग्रेस उमीदवार सांजी भाई देलकर की सियासी किस्मत 2009 में और भी ख़राब रही। तब वे महज 618 वोटों से चुनाव हार गये थे। या यूं कहें कि किस्मत वाले रहे थे बीजेपी उम्मीदवार नाधू भाई गोमनभाई पटेल जिन्होंने 618 वोटों से लोकसभा का चुनाव जीत लिया था। 2004 और उससे पहले 20 साल तक दादर नागर हवेली की सीट से मोहन भाई सांजी भाई देलकर लगातार सांसद रहे। 1989 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर, तो 1991 और 1996 में कांग्रेस के टिकट पर और 1998 में बीजेपी के टिकट पर वे सांसद चुने गये। 1999 में एक बार फिर मोहन भाई सांजीभाई देलकर निर्दलीय सांसद बने। वहीं 2004 के लोकसभा चुनाव में भारतीय नवशक्ति पार्टी के टिकट पर उन्होंने चुनाव लड़ा और जीता।

नाथू भाई गोमन भाई पटेल सांसद के रूप में बहुत सक्रिय नजर नहीं आए। महज 85 सवाल उन्होंने पूछे। राष्ट्रीय औसत 273 के मुकाबले यह बहुत कम है। संसद में उपस्थिति भी महज 67 फीसदी रही। सांसद निधि के उपयोग के मामले में भी नाथू भाई गोमन भाई पटेल दूसरे सांसदों के मुकाबले थोड़ा सुस्त नज़र आते हैं। दिसम्बर 2018 तक के आंकड़े के अनुसार उनकी सांसद निधि में 8 करोड़ 3 लाख रुपये बचे हुए थे। 16 करोड़ 66 लाख रुपये की योजनाएं स्वीकृत हुई थीं और इनमें से 6.95 करोड़ रुपये ही ख़र्च हो पाए थे।

2014 में बीजेपी इस सीट पर हैट्रिक लगाने की उम्मीद कर रही है। वहीं, कांग्रेस के लिए बीजेपी के मुकाबले नया चेहरा उतारने की चुनौती है। इस केंद्र शासित प्रदेश में पहला मेडिकल कॉलेज खुलने से लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की कई एक परियोजनाओं ने स्थानीय लोगों को उनका मुरीद बनाया है, वहीं रोजगार का मुद्दा भी अहम रहेगा। कड़े मुकाबले के आसार बन रहे हैं।

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