लोकसभा चुनाव 2019: बीकानेर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: राजस्थान के बीकानेर से मौजूदा सांसद भाजपा के अर्जुन मेघवाल है। मेघवाल ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी इंजीनियर शंकर पन्नू को 308,079 वोटों से हराया। मेघवाल को जहां 584,932 वोट मिले वहीं पन्नू के खाते में 276,853 वोट आये। इस जीत के साथ 2014 में अर्जुन लाल दूसरी बार सांसद बने। बीकानेर वैसे तो एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है, लेकिन यहां का राजनीतिक इतिहास भी अपने आप में अलग है। इतिहास जानने से पहले हम बात करेंगे पिछले चुनाव की। 2014 में यहां 1,591,068 लोगों का नाम वोटर लिस्ट में था, जिनमें से मात्र 58 प्रतिशत लोगों ने ही वोट डाला। अपने मत का प्रयोग करने वालों में 526,983 पुरुष और 402,768 महिलाएं थीं।

भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर दिल्ली पहुंचने वाले अर्जुन का संसद के अंदर प्रदर्शन भी ठीक-ठाक रहा। मई 2014 से लेकर दिसम्बर 2018 तक आपने कुल 92 परिचर्चाओं में हिस्सा लिया। जबकि राज्य का औसत 88.1 है। अर्जुन मेघवाल ने कुल 16 प्राइवेट मेंबर बिल पेश किये, जबकि राज्य का औसत मात्र 2.4 है। प्रश्न पूछने के मामले में मेघवाल काफी आगे रहे। आपने इस दौरान कुल 336 प्रश्न सदन में उठाये, जबकि राज्य का औसत 208 का था। और तो और मेघवाल ने 98 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज करायी।
बीकानेर संसदीय क्षेत्र की कुल आबादी 2,821,973 है, जिनमें से 64.53 फीसदी लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, जबकि 35.47% लोग शहरी क्षेत्रों में। पिछड़ी जातियों की बात करें तो यहां कुल 22.91 प्रतिशत एससी और 37% एसटी जाति के लेाग रहते हैं। यानी कुल मिलाकर इस क्षेत्र में किसान और छोटे कामगारों का वोटबैंक काफी बड़ा है। इतिहास के पन्ने पलटें तो आप पायेंगे कि 1952 से लेकर 1977 तक यानी 25 वर्षों तक कोई भी राजनीतिक दल इस सीट पर जीत दर्ज करने में कामयाब नहीं हुआ। जी हां इस दौरान स्वतंत्र उम्मीदवार महाराजा करणी सिंह सांसद रहे। महाराजा करणी सिंह लगातार पांच बार सांसद चुने गये। 1977 के बाद जनता पार्टी, कांग्रेस और भाजपा यहां से जीर्त दर्ज करने में कामयाब हुईं।
2004 के बाद से यह सीट भारतीय जनता पार्टी के पास लगातार बनी हुई है। 2004 में यहां से फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र ने शानदार जीत दर्ज की। धर्मेंद्र को भले ही जनता का भरपूर प्यार मिला, लेकिन अगले चुनाव यानी 2009 में भाजपा ने उन पर भरोसा नहीं जताया और उनकी जगह अर्जुन मेघवाल को टिकट दिया। मेघवाल ने यहां से लगातार दो बार जीत हासिल की।
पिछले चुनाव में मेघवाल का वोट प्रतिशत 19 फीसदी बढ़ा था, जबकि कांग्रेस का वोट प्रतिशत 9 फीसदी घट गया था। लेकिन 2018 में तस्वीर ऐसी ही रहेगी, यह कहना मुश्किल है। क्योंकि बीकानेर लोकसभा के अंतर्गत आने वाली कुल 8 विधानसभा सीटों में से तीन कांग्रेस, एक सीपीआईएम के पास चली गई है। यानी इस संसदीय क्षेत्र के आधे वोटबैंक के भाजपा से अलग होने की पूरी संभावना है। यानी कुल मिलाकर इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर हो सकती है। साथ ही सीपीआईएम भी यहां पूरा जोर लगाने की कोशिश करेगी।












Click it and Unblock the Notifications