लोकसभा चुनाव 2019: बस्तर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ की बस्तर लोकसभा सीट से सांसद भाजपा के दिनेश कश्यप हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव की बात करे तो बीजेपी सांसद दिनेश कश्यप ने कांग्रेस प्रत्याशी को 1 लाख 24 हज़ार से ज्यादा मतों से पराजित किया था। दिनेश कश्यप दूसरी बार यहां से सांसद चुने गये। इससे पहले 2011 के उपचुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की थी। ये सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए सुरक्षित है।

साल 1977 के चुनाव में जनता पार्टी की जीत से पहले इस सीट पर हुए 5 में से 4 चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत हुई थी। साल 1980 के बाद लगातार कांग्रेस के उम्मीदवार यहां से जीतते रहे। 1996 में यहां निर्दलीय महेंद्र कर्मा की जीत हुई, जो बाद में कांग्रेस में शामिल हो गये और जिनकी 2015 में सुकमा हमले में नक्सलियों ने हत्या कर दी। बस्तर लोकसभा सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है तो इसकी वजह ये है कि 1998 के बाद से यहां बीजेपी के उम्मीदवार लगातार जीतते रहे हैं।
दिनेश कश्यप का लोकसभा में प्रदर्शन
संसद में दिनेश कश्यप सक्रियता बहुत ज्यादा नहीं दिखी है। महज 6 बार संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेते हुए बहस में शरीक हुए हैं। संसद में केवल 7 सवाल उन्होंने पूरे कार्यकाल के दौरान पूछे है। सदन में उपस्थिति भी दूसरे सांसदों की तुलना में कम है। दिनेश कश्यप के नाम महज 76 फीसदी उपस्थिति दर्ज है।सांसद निधि के इस्तेमाल करने के मामले में दिनेश कश्यप सक्रिय रहे हैं। उन्होंने 25 करोड़ की राशि में से अधिकतम का इस्तेमाल किया है। 1.8 करोड़ रुपये दिसम्बर 2018 तक सांसद निधि में बचे हुए थे।
बस्तर लोकसभा सीट, एक परिचय-प्रमुख बातें-
बस्तर लोकसभा सीट पर महिला मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। बस्तर में 2014 में 12 लाख 98 हज़ार के करीब मतदाता थे। इनमें महिलाओं की संख्या 6 लाख 65 हज़ार से ज्यादा है। हालांकि मतदान के नजरिए से देखें तो पुरुषों ने महिलाओं की तुलना में ज्यादा वोट डाले थे। 3 लाख 87 हज़ार 112 पुरुष मतदाताओं ने वोट डाले थे। जबकि, महिला वोटरों की संख्या 3 लाख 82 हज़ार 801 है। विगत लोकसभा चुनाव में कुल 59 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था। बस्तर लोकसभा सीट की खासियत यहां आदिवासियों की आबादी भी है। यहां 70 फीसदी आदिवासी वोटर हैं। शहरी मतदाता बहुत कम है। महज 15.23 फीसदी। इस लोकसभा क्षेत्र की आबादी 20 लाख 64 हज़ार से ज्यादा है।
2018 के विधानसभा चुनाव के बाद बस्तर लोकसभा सीट के अंतर्गत विधानसभा सीटों पर परिदृश्य बदल गया। बस्तर लोकसभा में 8 विधानसभा की सीटें हैं। इनमें 7 कांग्रेस के पास हैं और केवल एक सीट पर बीजेपी का कब्जा है। कांग्रेस के पास जो सीटें हैं उनमें शामिल हैं-कोंडागांव, नारायणपुर, बस्तर, जगदलपुर, चित्रकूट, बीजापुर और कोंटा। बस्तर लोकसभा में बीजेपी के पास केवल दंतेवाड़ा की सीट है। यानी जहां इस लोकसभा सीट पर बीजेपी का एकाधिकार था, ताजा विधानसभा चुनाव के बाद अब यहां कांग्रेस का बोलबाला हो गया दिखता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बदली हुई राजनीतिक परिस्थिति का असर दिख सकता है। लगातार बीजेपी की होती रही जीत पर ब्रेक लग सकता है। अगर बीजेपी को अपनी स्थिति बचानी है तो नयी रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा।












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