लोकसभा चुनाव 2019 : अमृतसर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: पंजाब की अमृतसर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला है। साल 2017 में हुए उपचुनाव में गुरजीत सिंह औजला ने पहली बार कांग्रेस की सीट से चुनाव जीता और यहां से सांसद बने। वहीं साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यहां से चुनाव लड़ा और जीते। । लेकिन उसके बाद पंजाब में विधानसभा चुनाव हुए तो वो सूबे के मुख्यमंत्री बन गए और ये सीट छोड़ दी। साल 2014 में पूरे देश में भाजपा की लहर थी तो इसी लहर के बीच अमरेंद्र सिंह अमृतसर की सीट से चुनाव जीत गए। जो कांग्रेस के लिए एक बड़ी बात थी। ये दूसरी बार था जब अमरिंदर सिंह सांसद बने हों।

18 मई 2014 को उन्होंने अपने संसद पद की शपथ ली और 23 नवंबर 2016 को त्याग पत्र दे दिया। वजह थी राज्य का मुख्यमंत्री बनना लेकिन अपने 2 साल के कार्यकाल में अमरिंदर सिंह ने 4 डिबेट में भाग लिया, कोई भी प्राइवेट मेंबर बिल संसद के पटल पर नहीं रखा और अपनी जनता के लिए 18 सवाल पूछे। इस दौरान उनकी लोकसभा में मौजूद 6 फीसदी रही। जनता ने उन्हें चार लाख 82 हजार 876 वोट दिए थे वही दूसरे नंबर पर रहे थे भारतीय जनता पार्टी के अरुण जेटली जिन्हें 380106 वोट मिले थे और इस तरीके से यहां से कॉन्ग्रेस एक लाख से ज्यादा वोटों से जीत गई थी।
गुरजीत सिंह औजला का लोकसभा में प्रदर्शन
40 साल के गुरजीत सिंह औजला 12 डिबेट में भाग ले चुके हैं और कोई भी प्राइवेट मेंबर बिल संसद के पटल पर नहीं रखा है 29 सवाल पूछ चुके हैं और लोकसभा में उनकी मौजूदगी 89 फ़ीसदी रही है। जब यहां उप-चुनाव हुए तो उन्हें यहां अमरिंदर सिंह से भी ज्यादा वोट मिले थे। 508153 वोटों मिले। दूसरे नंबर पर रहे थे भारतीय जनता पार्टी के राजेंद्र मोहन सिंह जिन्हें 308964 वोट मिले थे और यहां से कांग्रेस 199000 वोटों से जीती थी।
इस सीट के इतिहास पर नजर डाले तो पिछले एक दशक से यह सीट भारतीय जनता पार्टी का गढ़ माना जाता है। लेकिन 2014 में यहां से भाजपा को हार का सामना करना पड़ा यहां से लगातार नवजोत सिंह सिद्धू चुनाव जीतते रहे हैं। लेकिन, 2014 के चुनाव में यहां से नवजोत सिंह सिद्धू को भाजपा ने टिकट नहीं दिया। सिद्धू की जगह आ गए जेटली लेकिन आ तो गए लौटना उन्हें हार के साथ ही पड़ा। बात करते हैं इसी के इतिहास के बारे में सरदार गुरमुख कांग्रेस की सीट से 1952 से 1962 तक सांसद रहे। उसके बाद भाजपा और कांग्रेस के नेता जीतते रहे । साल 1991 में यहां से रघुनंदन लाल भाटिया कांग्रेस की सीट से चुनाव जीते जो 1996 तक यहां के सांसद रहे। 1999 में रघुनंदन लाल भाटिया चुनाव जीते।
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