मजदूरों से किराया वसूलने पर प्रियंका ने योगी सरकार को घेरा, बोलीं- बुद्ध पूर्णिमा पर ये बर्ताव

मजदूरों से किराया वसूलने पर प्रियंका ने योगी सरकार को घेरा, बोलीं- बुद्ध पूर्णिमा पर ये बर्ताव ठीक नहीं

नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को लेकर एक बार फिर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। प्रियंका ने कहा है कि दूसरे शहरों से आ रहे मजदूरों से किराया वसूलना और फिर उन्हें ठीक तरह से उनके घरों तक भी ना पहुंचाना बेहद गलत है। प्रियंका ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें मजदूर बता रहे हैं कि कैसे उनसे टिकट के पैसे वसूले गए हैं। इसे शेयर करते हुए प्रियंका ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा पर तो कम से कम मजदूरों से करुणा दिखाई जानी चाहिए थी।

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    पैसे भी वसूले गए और उनके शहरों तक भी नहीं छोड़ा गया

    पैसे भी वसूले गए और उनके शहरों तक भी नहीं छोड़ा गया

    प्रियंका ने ट्वीट कर लिखा, मजदूरों को गुजरात से यूपी लाया गया। पैसे भी वसूले गए। आगरा और बरेली जाने वालों को लखनऊ और गोरखपुर ले जाकर छोड़ा जा रहा है। आज बुद्ध पूर्णिमा है। बुद्ध की वाणी करुणा की वाणी थी। प्रवासी मजदूरों के साथ करुणा भरा व्यवहार हो और उन्हें सहारा मिले-यह हमारा प्रयास होना चाहिए। सिर्फ भगवान की वाणी दोहराना काफी नहीं है। सरकार को उस पर अमल करके दिखाना होगा।

    प्रियंका गांंधी लगातार उठा रही मजदूरों की वापसी का मुद्दा

    लॉकडाउन होने के बाद से ही लाखों मजदूर अपने घरों को जाने के लिए परेशान हैं। हजारों तो पैदल और साइकिलों से सैकड़ों मील चलें हैं तो हाल ही में सरकार ने मजदूरों के लिए बस और ट्रेन चलाने का ऐलान किया है। जिसमें मजदूरों से किराया लिए जाने की विपक्ष जोरदार आलोचना कर रहा है। प्रियंका गांधी इसको लेकर लगातार ट्विटर पर लिख रही हैं।

    मजदूरों को घर पहुंचाना सरकार का फर्ज

    मजदूरों को घर पहुंचाना सरकार का फर्ज

    मंगलवार को प्रियंका ने ट्वीट कर लिखा, 40 दिन बीत चुके हैं। मजदूरों के पास न काम, न पैसा, न राशन। सरकारी मदद ढंग से हो नहीं रही। ऐसे में उनके साथ करुणा भरा व्यवहार तो किया जा सकता है। उनको इतना मत दबाइए कि वो आहत हो जाएं। इनकी व्यवस्था कर सही जानकारी देना और घर पहुंचाना सरकार का फर्ज है।

    इससे पहले सरकार पर हमला बोलते हुए प्रियंका ने कहा था, मजदूर राष्ट्र निर्माता हैं। मगर आज वे दर दर ठोकर खा रहे हैं-यह पूरे देश के लिए आत्मपीड़ा का कारण है। जब हम विदेश में फँसे भारतीयों को हवाई जहाज से निशुल्क वापस लेकर आ सकते हैं, जब नमस्ते ट्रम्प कार्यक्रम में सरकारी खजाने से 100 करोड़ रु खर्च कर सकते हैं। जब रेल मंत्री पीएम केयर फंड में 151 करोड़ रु दे सकते हैं तो फिर मजदूरों को आपदा की इस घड़ी में निशुल्क रेल यात्रा की सुविधा क्यों नहीं दे सकते? भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने निर्णय लिया है कि घर लौटने वाले मजदूरों की रेल यात्रा का पूरा खर्च उठाएगी।

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