महिलाएं अब बर्दाश्त नहीं करेंगी कि राजनीति में उन्हें नकारा जाए: प्रियंका गांधी
लखनऊ, 27 फरवरी: उत्तर प्रदेश में नई राजनीति महिलाओं के सशक्तिकरण, युवाओं के लिए भर्ती, किसानों के कल्याण और जनता की भलाई की राह से निकलेगी। यह कहना है कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का। देश के मतदाताओं की बदलती प्राथमिकता, कांग्रेस पार्टी की विचारधारा और जनता के मुद्दों पर वन इंडिया ने उनसे बात की।

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1. आपकी राय में देश के मतदाताओं के लिए प्राथमिकता कैसे बदल रही है?
आज देश में बहुत गम्भीर समस्याएँ हैं जिनका सामना आम जनता रोज़ाना कर रही है लेकिन इसके बावजूद ज़्यादातर राजनैतिक दलों का प्रयास रहता है कि उनका आँकलन काम से - मतलब कि इन समस्याओं के समाधान और जनता के प्रति जवाबदेही से- हट कर धर्म और जाति की राजनीति पर टिका रहे। इससे राजनीति में एक बहुत घातक परम्परा स्थापित हो गयी है कि जनता के मुद्दों को नकार के भी वोट पाया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने इस परम्परा को तोड़ने की कोशिश करते हुए जनता की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस हल का खाका तैयार कर चुनावी चर्चा की दिशा बदलने का प्रयास किया है। मैं समझती हूँ कि काफ़ी हद तक हम सफल रहे हैं क्योंकि आज मतदातओं के दिमाग़ में एक बात तो पूरी तरह साफ़ है, कि उनको अपने मुद्दों पर आधारित राजनीति चाहिए।
देश के युवा मतदाता जानना चाहते हैं कि सरकार चलाने वाली पार्टी ने रोज़गार क्यों नहीं दिया? ठीक इसी तरह मध्यम वर्ग, महिलाएँ, किसान, छोटे दुकानदार: सब अपने मुद्दों पर केंद्रित जवाब चाहते हैं। अफ़सोस ये है कि सत्ताधारी दल और देश की तमाम पार्टियाँ मतदाताओं की इस अपेक्षा पर खरी नहीं उतर रही हैं। उनका एक ही एजेंडा है, धर्म और जाति के आधार पर लोगों के जज़्बातों को उभार कर सत्ता में रहना। इसीलिए चुनाव के समय वो इस तरह की सारी बातें करते हैं, जिनसे जनता की समस्याओं का कोई सरोकार नहीं है। लेकिन ये अब ज़्यादा दिन नहीं चलने वाला। लोगों ने कहना शुरू कर दिया बस अब और नहीं।
2. आने वाले चुनावों में, क्या कांग्रेस पार्टी की विचारधारा हर राज्य में अलग होगी?
कांग्रेस पार्टी की एक केंद्रित विचारधारा है। जिसमें समानता, समभाव, बंधुत्व जैसे विचार केंद्र में हैं। विचारधारा हर जगह एक ही है। हाँ, हम विकेंद्रीकरण के मॉडल पर काम करते हैं। उसमें मॉडल अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन विचारधारा अलग होने का सवाल ही नहीं उठता।
3. संदेश अगर उत्तर प्रदेश की नारी दे सके देश भर की अपनी बहन को?
देखिए, इन चुनावों में कांग्रेस ने यू पी में 40% टिकट महिलाओं को दिया है। इनमें से कई ऐसी महिलाएँ हैं जिन्होंने सत्ता के दमन के विरुद्ध संघर्ष किया और भयंकर अत्याचारों का सामना किया। वे समानता के लिए लड़ रही हैं तो राजनीति में ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं का आना अपने आप में बहुत भारी संदेश है।
लेकिन मुख्य तौर पर अगर यूपी की महिलाएँ एकजुट होकर राजनीति में, मुद्दों में अपना दावा ठोक दें तो वह पूरे देश की महिलाओं को दो संदेश दे सकती हैं: पहला कि महिलाएँ एक बहुत बड़ी राजनैतिक ताक़त हैं जो इस देश के नेताओं को सही मुद्दों पर राजनीति करने को मजबूर कर सकती हैं, और दूसरा कि महिलाएँ अब यह बर्दाश्त नहीं करेंगी कि उन्हें नकारा जाए और उनके सशक्तिकरण की बजाय उन्हें निर्भर और दुर्बल रख कर कोई भी राजनैतिक दल आगे बढ़े।
4. उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद आपके अभियान ने जो ऊर्जा प्रज्वलित की है, उसे कैसे सुनिश्चित किया जायेगा?
देखिए जो लौ जली है मैं उसे बुझने नहीं दूँगी। उत्तरप्रदेश ने 30 सालों से जाति और धर्म की राजनीति देखी है। मैंने इस बार यहाँ के लोगों को साथ लेते हुए इस राजनीति को ख़ारिज कर मुद्दों पर आधारित राजनीति खड़ी करने की पूरी कोशिश की है। महिलाओं के लिए आधी आबादी का हक़ वाली राजनीति, युवाओं के लिए गर्मी, चर्बी नहीं भर्ती वाली राजनीति। मैं मानती हूँ कि यही राजनीति उत्तरप्रदेश को तरक़्क़ी के रास्ते पर ले जा सकती है। और उत्तर प्रदेश की तरक़्क़ी के लिए मैं इस राजनीति की लौ जलाकर रखूँगी।
आने वाले निकाय और नगर पालिका के चुनाव में भी हम 40% महिलाओं और ज़्यादातर नवयुवकों को लड़ाएँगे, अपनी पार्टी की कार्यकारिणी और पदों में भी हम महिलाओं और युवाओं को आगे बढ़ाएँगे। एक नयी राजनीति को उभारने का समय आ गया है जो यू पी के लोगों के लिए लड़े और समर्पित रहे।
5. पिछले 2 वर्षों में आपके परिवार का समर्थन क्या तथा कितना मूल्यवान रहा है?
मुझे अपने परिवार से पूरा समर्थन मिला है। मेरे पति हमेशा मुझे प्रोत्साहित करते हैं और अक्सर अपनी राय भी देते हैं। कल मेरे बेटे ने मुझे मेसेज डाला कि उसे मुझ पर बहुत गर्व है, कुछ दिनों पहले घर आने पे मुझे अपनी बेटी का एक पत्र मिला जो उसने मेरी पचासवीं सालगिरह के लिए अमेरिका से भेजा था। उसमें उसने लिखा कि मैं उसको प्रेरित करती हूँ और उसे भी मुझ पर बहुत गर्व है: एक माँ के लिए इससे बड़ी चीज़ क्या हो सकती है? इसके अलावा, रोज़ मुझे फ़ोन करके मेरा कुछ न कुछ मज़ाक़ उड़ाकर मुझे ज़मीन पर लाने का काम भी दोनो बच्चे ज़रूर करते हैं, कि कहीं मैं अपनी नेतागिरी उनपर चलाने की कोशिश ना करूँ।












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