कांग्रेस के लिये तुरुप का इक्का नहीं होंगी प्रियंका गांधी

priyanka gandhi
नयी दिल्ली। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की डूबती नैया को बचाने के लिए पार्टी ने राहुल गांधी के बजाए बहन प्रियंका गांधी पर भरोसा दिखाया है। पार्टी ने प्रियंका को नई जिम्मेदारियों से लैस कर दिया है। कांग्रेस ने इन कयासों को ज्यादा अहमियत नहीं दी कि लोकसभा चुनाव के पहले प्रियंका गांधी पार्टी में बड़ी भूमिका निभाएंगी और कहा कि प्रियंका अपनी भावी भूमिका खुद तय करेंगी। वो पार्टी की सलाहकार के तौर पर काम करेंगी और पार्टी के नेताओं के काम और उनकी भूमिका का निर्धारण भी प्रियंका के हाथों में ही होगा।

लगभग एक दशक पहले भी ये माना जाता था कि प्रियंका गांधी राजनीति के मैदान में उतरेंगी। साल 2011 में जब सोनिया गांधी बीमार पड़ीं तब भी ये हवा चली थी कि अब प्रियंका पार्टी की कमना संभालेंगी, लेकिन प्रियंका ने साफ किया कि वो सक्रिय राजनीति में कदम नहीं रखेंगी। हलांकि प्रियंका की लोकप्रियता की उनकी सबसे बड़ी ताकत है। 1999 में जब प्रियंका पहली बार बेल्लारी में कांग्रेस के चुनाव प्रचार में उतरीं तभी उन्होंने अपनी मजबूत शख्सियत का परिचय सबको दे दिया। उस वक्त अरुण नेहरु भाजपा की टिकट से वहां चुनाव लड़ रहे थे। उनकी जीत भी लगभग पक्की मानी जा रही ती, लेकिन प्रियंका ने अपने संबोधन में ही ऐसी बात कही कि लोगों का रुख पलट गया और अरुण नेहरु ना केवल वहां से हारें बल्कि उनकी जमानत तक जब्त हो गई।

अरुण नेहरु जैसे नेता की हार का कारण बनीं प्रियंका ने बिना राजनीतिक अनुभव के साबित कर दिया कि उन्हें कांग्रेस से अलग नहीं किया जा सकता है। जिसके बाद से लगातार प्रियंका कांग्रेस और रायबरेली में प्रचार करती रहीं है। हलांकि ये बात भी सच है कि उन्होंने कभी भी अपने कदम रायबरेली के बाहर नहीं निकाले। 2004 में जब राहुल ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा तो वो प्रियंका ही थीं जिन्होंने अमेठी की जनता से राहुल गांधी का परिचय कराया। प्रियंका हमेशा ही एक मजबूत कंघे की तरह राहुल और अपनी मां सोनिया का साथ खड़ी रही हैं।

उनकी मजबूत शख्सियत को देखते हुए कांग्रेस का एक तबका मांग करता रहा कि उन्हें प्रियंका को सक्रिय राजनीति में आना चाहिए। उन्हें पार्टी से जुड़ना चाहिए, लेकिन प्रियंका राजनीति में सिर्फ अपने भाई और मां सोनिया के लिए काम करती रही। सोनिया के बीमार पड़ने पर प्रियंका के लिए सबसे ज्यादा मांग उठी, लेकिन प्रियंका हमेशा ही साफ करती रही कि वो राजनीति में अभी नहीं आना चाहती। वैसे राजनीति के जानकारों का मानना है कि अगर प्रियंका सक्रिय भूमिका में आ गई तो वो राहुल से भी आगे निकल जाएंगी।

कांग्रेस ने 2014 के मिशन के लिए प्रियंका को भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की काट के तौर पर देख रही है, लेकिन कुछ ऐसी बातें भी हैं जो प्रियंका को इस स्तर की पॉलिटिक्स में सटीक नहीं बैठने देती। मोदी से टकराने के लिए प्रियंका के पास राजनीतिक अनुभव की कमी है। मोदी राजनीति के मास्टर माने जाते हैं। ऐसे में प्रियंका को उनके तोड़ के तौर पर देखना कांग्रेस की भूल होगी। वहीं प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं। अगर वो राजनीति में आती है तो उन्हें सबसे पहले इस मसलें से जुड़े सवालों से जूझना होगा। प्रियंका के माथे पर कोई बड़ी कामयाबी नहीं है। ऐसे में प्रियंका मोदी के सामने कहीं भी फिट नहीं बैठती। हलांकि उनकी लोकप्रियता और उनकी सादगी उन्हें इस कतार में जरुर खड़ा करती है, लेकिन 2014 के चुनाव के लिए वो कांग्रेस के लिए तुरुप का इक्का नहीं हो सकती है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+