वैक्सीन की कमी के बीच बड़ा खुलासा- प्राइवेट अस्पतालों को मिली 1.29 करोड़ डोज, इस्तेमाल हुई सिर्फ 22 लाख
नई दिल्ली, 12 जून। कोरोना वायरस से बचाव का मात्र एक ही तरीका है और वो है सबका वैक्सीनेशन। देश वैक्सीन की कमी से जूझ रहा है। इस बीच एक सरकारी आंकड़ा सामने आया है जिससे ये पता चलता है कि प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन का अच्छा खासा स्टॉक उपलब्ध है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक पिछले महीने यानी कि मई महीने में निजी अस्पतालों में केवल 17 फीसदी खुराक प्रयोग में आया। इसके बाद भी इन अस्पतालों में बड़े पैमाने पर स्टॉक बचा हुआ है। सरकार द्वारा जारी किए गए प्रेस रिलीज में बताया गया है कि मई के महीने में इन प्राइवेट अस्पतालों को 1.29 खुराक उपलब्ध कराई गई थी, जिसमें से सिर्फ 22 लाख टीकों का इस्तेमाल हुआ है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों की मुकाबले, प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन ऊंचें दामों में बेची जा रही है। इसी कारण लोग प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन लगवाने में लोगों में हिचकिचाहट देखने को मिल रही है। विडंबना यह है कि कम उपयोग की स्वीकृति का उल्लेख एक सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में मीडिया रिपोर्टों का खंडन करने के लिए किया गया है कि केवल 7.5 प्रतिशत जैब्स का उपयोग किया जा रहा था। सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है, "कुछ मीडिया रिपोर्टों में उल्लेख किया गया है कि 'निजी अस्पतालों को 25 प्रतिशत खुराक आवंटित की गई है, लेकिन वे कुल जाब्स का केवल 7.5 प्रतिशत हिस्सा हैं'। ये रिपोर्ट सटीक नहीं हैं और उपलब्ध आंकड़ों से मेल नहीं खाती हैं।"
इस महीने की शुरुआत में सरकार ने विपक्ष के मुनाफाखोरी के आरोपों के बीच कोविड के टीकों के लिए निजी अस्पतालों द्वारा ली जाने वाली अधिकतम कीमत तय की थी। कोविशील्ड की कीमत 780 रुपए प्रति खुराक, रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी की कीमत 1,145 रुपए प्रति खुराक और स्वदेशी रूप से निर्मित कोवैक्सिन की कीमत 1,410 रुपए प्रति खुराक पर तय की गई है। इसमें टैक्स के साथ-साथ अस्पतालों के लिए 150 रुपये का सर्विस चार्ज भी शामिल है।












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