अब निजी कंपनियां भी बेचेंगी रेल टिकट
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। भारतीय रेलवे तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। यहां पर निजीकरण और आउटसोर्सिंग को खूब महत्व मिल रहा है। इसी क्रम में रेलवे की टिकटों की बिक्री के लिए प्राइवेट कंपनियों को जोड़ा जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक,रेलवे बोर्ड ने कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण सिस्टम (पीआरएस) और अनारक्षित टिकटिंग सिस्टम टर्मिनल स्थापित करने के लिए निजी कंपनियों को अपने साथ जोड़ने का फैसला हाल ही में लिया। इस पर अमल जल्दी शुरू होने की उम्मीद है।
रेलवे में भर्तियां कम होंगी
अभी रेलवे में टिकटों की हर स्तर पर बिक्री उसके मुलाजिम ही करते हैं। हाँ, सिर्फ आधिकृत ट्रेवल एजेंट्स ही ई-टिकट्स बेच सकते हैं। यानी कि रेलवे अपने ज्यादातर टिकट खुद ही बेचता है। जानकारों का कहना है कि अगर उक्त फैसला लागू हो गया तो रेलवे में आने वाले समय में रोजगार की संभावनाएं और कम होंगी।
जानकारों ने बताया कि नए आरक्षण केंद्रों को यात्री टिकट सुविधा केंद्र (वाईटीएसके) कहा जाएगा। रेलवे के अधिकारी ने कहा कि यह वक्त की जरूरत है। अन्य देशों में यह हो रहा है।
सनद रहे कि रेलवे ने पहले कुछ खास स्टेशनों की सफाई का जिम्मेदारी आउटसोर्स करने और मानव रहित क्रॉसिंग पर ट्रैकमैन की बजाय निजी कंपनियों द्वारा 'गेट मित्र' तैनात करने का फैसला किया था। इसके अलावा अब तो रेल पटरियों को बिछाने का काम भी निजी कंपनियों को सौंपा जाने लगा है।












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