वियतनाम की यात्रा कर चीन को क्या संदेश देना चाहते हैं मोदी?
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-20 समिट से पहले वियतनाम जाकर चीन को घेरने की कोशिश करेंगे। गौरतलब है कि वियतनाम चीन का कड़ा प्रतिद्वंदी है।
हालांकि यह सवाल उठना लाजिमी है कि वियतनाम की यात्रा कर चीन को क्या संदेश देना चाहते हैं पीएम मोदी?

बता दें कि सिंतबर की 3 तारीख को चीन में जी-20 समिट की बैठक है। इस बैठक से पहले पीएम मोदी के वियतनाम दौरे को दक्षिण पूर्व एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक उपस्थिति का संकेत भी है।
वियतनाम की सेना को दिया जाएगा ऑफर
माना जा रहा है कि भारत की ओर से वियतनाम की सेना और भी सहायता दिए जाने का ऑफर दिया जा सकता है। इसमें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और अंतरिक्ष की दुनिया में मदद शामिल है।
पीएम मोदी का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वियतनाम और चीन के बीच दक्षिण चीन सागर को लेकर विवाद बी है।
इस बात की संभावना भी जताई जा रही है कि पीएम मोदी की एक दिवसीय यात्रा के दौरान वियतनाम की सेना को चार पेट्रोल नावों की सप्लाई करने पर भी इकरारनामा किया जा सकता है।
यह इकरारनामा उस योजना का विस्तार होगा जिसकी घोषणा अक्टूबर 2014 में पीएम मोदी की ही यात्रा के दौरान किया गया था।
चीन पहले से है दबाव में
गौरतलब है कि चीन के विद्वानों की ओर से रविवार ( 28 अगस्त ) को यह कहा गया था कि भारत के बलूचिस्तान के मामले में हस्तक्षेप करने से यदि उसके और पाक की महत्वाकांक्षी योजना सीपीईसी को कोई नुकसान पहुंचा तो चीन इस मामले में दखल देगा।
साथ ही चीन पर इस समिट के दौरान दक्षिण चीन सागर पर हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को मानने का दबाव भी है जिसे लेकर वैश्विक बिरादरी उस पर दबाव बना रही है।












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