मोदी ने बाबुओं को दी आजादी, ऊपरी कमाई नहीं काम की!
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश का बागडोर संभाल ली हैं। मोदी की प्राथमिकता देश का विकास और प्राथमिकता हैं। मोदी ने गुड गवर्नेंस का वादा किया है सो उन्होंने इस दिशा में काम भी शुरु कर दिया हैं। गुरुवार को हुई दूसरी कैबिनेट बैठक में गवर्नेंस को लेकर अपना दस सूत्री एजेंडा अपने मंत्रियों और अधिकारियों के सामने रख दिया है।
नरेंद्र मोदी ने इस एजेंडे के जरिए साफ कर दिया है कि देश की जनता ने जिस तरह का बहुमत देकर सत्ता सौंपी हैं उससे उनकी उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में मोदी चाहते हैं कि वो जनता ने भरोसे पर खड़े उतरें। सरकार कालेधन पर पहले ही एसआईटी का गठन कर चुकी है। अब उन्होंने विकास का 10 ऐजेंडा तैयार कर दिया हैं।

नौकरशाहों का मनोबल
मोदी ने देश के विकास के लिए नौकरशाहों का मनोबल बढ़ाने पर जेर दिया हैं। उन्होंने कहा है कि अधिकारियों को सरकार का समर्थन हो, ताकि वे नीतियों को जमीन पर अमली जामा पहना सकें।

सुझावों का स्वागत
मोदी की सोच युवाओ से मिलती हैं। मोदी चहुमुखी विकास के पक्षधर हैं। ऐसे में मोदी का प्लान है कि चाहे अधिकारी हो या जनता, सभी एक भारत श्रेष्ठ भारत बनाने के लिए अपनी राय दे सकते हैं। उन्होंने मंत्री का आदेश दिया है कि वो फेसबुक और ट्विटर पर लोगों की राय मांगें।

शिक्षा, स्वास्थ, पानी और सड़क का विकास
मोदी अपने चुनावी भाषणों में भी शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी और सड़क जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं की चर्चाएं किया करते थे। देश के पीएम पद की कुर्सी संभालने के बाद मोदी का मानना है कि अगर बेसिक जरूरतें ही पूरी नहीं होंगी, विकसित देश कैसे बनेगा। इसलिए उन्होंने सबसे पहले सभी को शिक्षा, हर गांव-मोहल्ले-शहर को स्वास्थ सुविधा, साफ पेयजल, खेतों में पानी और सुगम यातायात के लिए सड़कें उपलब्ध करानी होंगी।

सरकार में पारदर्शिता
मोदी हमेशा से करप्शन के खिलाफ रहे हैं। उनका मानना है कि करप्शन पूरे देश के लिए चिंता का विषय है और इसके सुधार की शुरुआत ऊपर से होनी चाहिए। इसलिए उन्होंने नई सरकार की हर नीति को, हर हरकत पूरी तरह से पारदर्शी बनाने की योजना बनाई हैं।

अंतर मंत्रालय में तालमेल
मोदी के प्लान के मुताबिक मंत्रालयों के बीच तालमेल जरुरी हैं। एक मंत्रायल की फाइल दूसरे मंत्रालय में अटकी रहती है, नतीजतन, विकास कार्य ठप्प हो जाते हैं। इसे दूर करने के लिए मोदी ने तमाम मंत्रालयों के बीच तालमेल की एक नई व्यवस्था शुरु करने की योजना बनाई हैं।

जनता का वादा पूरा करने के लिए सिस्टम
मोदी ने वादा किया था कि अगर जनादेश मिलता है जनता से कुछ वायदे करके, ये तय करना होगा कि जो वायदे किए गए हैं, वे समयबद्ध ढंग से पूरे किए जाएं। मोदी ने इसके लिए लगातार घोषणापत्र के बिंदुओं के आधार पर बन रही नीतियों और उनके नतीजों का मूल्यांकन करने की योजना बनाई हैं।

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश
मोदी से देश की उम्मीदें बड़ी हैं और ये बढ़ रही हैं। अगर महंगाई कम नहीं होगी, रोजगार के साधन नहीं बढ़ेंगे, जीडीपी की सेहत नहीं सुधरेगी तो यह सब निराशा में बदल जाएगा। ऐसे में मोदी का प्लान है कि पॉलिसी के लेवल पर सुधार कर, पुख्ता निर्णय कर और विकास के कामों में तेजी लाकर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जाए।

संसाधनों और निवेश के लिए रिफॉर्म
मोदी का मानना है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए निवेश को बढ़ावा देना होगा। इसके लिए उन्होंने संसाधनों और नीतियों में सुधार की योजना बनाई हैं।

तय मियाद के अंदर नीतियों पर अमल
मोदी की योजना के मुताबिक हर काम की एक मियाद तय हो और जवाबदेही निश्चित की जाए।

सरकारी नीतियों में स्थिरता और निरंतरता
मोदी के प्लान के मुताबिक सरकारी नीति न सिर्फ स्पष्ट होनी चाहिए, बल्कि यह दीर्घकालिक और निरंतरता लिए होनी चाहिए। ताकि सबको विजन स्पष्ट हो।












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