राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी तटस्थता की खातिर नहीं डालेंगे वोट

प्रणव मुखर्जी ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा है कि 'मैं किसी भी पार्टी के प्रति अपनी लोकप्रियता नहीं व्यक्त करना चाहता हूं। इसलिए मैंने वोट नहीं डालने का निर्णय लिया है। हालांकि प्रणव के इस बयान से कांग्रेस को तो दुख पहुंचा है साथ ही देश की अन्य राजनीति पार्टियां भी हताहत हुई हैं। बता दें कि राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को 160 रासभेरी, साउथ कोलकाता में अगले 12 मई को अंतिम चरण के दौरान मतदान करना था। मतदान किए जाने के लिए सभी तैयारियां पूरी भी की जा चुकी थीं।
प्रणव मुखर्जी ने बताया कि लोक सभा चुनाव 2014 के दौरान बहुत कुछ देखने और सीखने को मिला है। ऐसे में मेरे वोट डालने से किसी को यह नहीं लगना चाहिए कि मैं किसी एक विशेष पार्टी का समर्थन कर रहा हूं। बता दें कि राष्अ्रपति देश का प्रथम नागरिक होता है और उसे वोट देने का सबसे पहला अधिकार दिया जाता है लेकिन प्रणव ने सभी हदों को पारकर अपना बयान दे दिया है।
चुनावी विशेषज्ञों ने इस मामले में अपनी राय देते हुए कहा है कि राष्ट्रपति का वोट न डालना देश्ा का सबसे बड़ा दुर्भाग्य हो सकता है। विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि वोट न देना भी भ्रष्टतंत्र के साथ अपनी सहभागिता जताने जैसा है। एक कहावत भी कही जाती है कि 'शोषण करने से ज्यादा बड़ा अपराध होता है कि शोषण काे सहन करना।' प्रणव ने यह बयान किस मामले और किस संदर्भ में दिया है इस बात का तो पता नहीं लगाया जा सका है लेकिन एक बात तो तय हो गई कि लोकसभा चुनाव 2014 में बहुत कुछ ऐसा देखने को मिला है जो एक आम जन को अभी देखना नहीं चाहिए था।












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