कौन हैं प्रतिमा भौमिक, जो बन सकती हैं त्रिपुरा की पहली महिला मुख्यमंत्री
त्रिपुरा में में भाजपा की ओर से किसी महिला को मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा हो रही है। इसके लिए केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक का नाम लिया जा रहा है। वह 1991 से ही बीजेपी की समर्पित कार्यकर्ता हैं।

बीजेपी ने त्रिपुरा में धमाकेदार प्रदर्शन से सत्ता पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। लेकिन, चर्चा है कि इसके बावजूद 2024 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी राज्य में मुख्यमंत्री बदल सकती है। वहां मौजूदा मुख्यमंत्री माणिक साहा की जगह पर प्रतिमा भौमिक को सीएम बनाए जाने की अटकलें लग रही हैं। कहा जा रहा है कि इसके माध्यम से पार्टी पूरे देश में महिला मतदाताओं को एक संकेत देना चाहती है। क्योंकि, महिलाओं को राज्य का सर्वोच्च पद देने में पूर्वोतत्तर के राज्यों के हाथ अभी तक तंग रहे हैं। बीजेपी त्रिपुरा से यह ट्रेंड बदलना चाहती है। लेकिन, हमारा विषय ये है कि प्रतिमा भौमिक कौन हैं, जिन्हें त्रिपुरा का सीएम बनाने के बारे में चर्चा चल रही है।

मोदी सरकार में मंत्री हैं प्रतिमा भौमिक
प्रतिमा भौमिक अभी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री में हैं। भाजपा ने मौजूदा त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में उन्हें धनपुर सीट से उतारा था, जहां से उन्होंने सीपीएम के कौशिक चंदा को 3,500 वोटों से हराया है। त्रिपुरा की धनपुर विधानसभा सीट सामन्य सीट नहीं है। मुख्यमंत्री चुनने का इस क्षेत्र का पुराना इतिहास रहा है। सीपीएम के दिग्गज माणिक सरकार यहां से पांच पर चुने जा चुके हैं। 2018 में भी वह यहीं से चुनाव जीते थे और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने थे। प्रतिमा भौमिक फिलहाल वेस्ट त्रिपुरा लोकसभा क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व कर रही हैं। अब उन्हें संसद सदस्यता या विधायकी में से किसी एक पद को ही चुनना होगा।

संघ से प्रभावित रही हैं प्रतिमा भौमिक
प्रतिमा भौमिक 1991 में बीजेपी से जुड़ी थीं और तब से पार्टी के साथ चट्टान की तरह खड़ी रही हैं। वह किसान परिवार से आती हैं और राजनीति की दुनिया में अपनी सादगी और जमीन से जुड़ी नेता होने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के वुमेंस कॉलेज से पढ़ाई की है। उनके पास बायो साइंस की डिग्री है। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से बहुत प्रभावित थीं और इसी वह से भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गईं।

भाजपा में धीरे-धीरे बढ़ता गया प्रतिमा भौमिक का कद
उनका राजनीतिक करियर बीजेपी में जुड़ने के साथ ही धीरे-धीरे बढ़ना शुरू हो गया। 1992 में वह त्रिपुरा में भाजपा की प्रदेश समिति की सदस्य बनीं। 53 वर्षीय नेता को उसी साल धनपुर मंडल का नेता नियुक्त किया गया। आगे चलकर वह त्रिपुरा बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनीं और पार्टी की युवा मोर्चा में भी योगदान दिया। दो साल तक प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष रहने के बाद पार्टी ने उन्हें 2018 के चुनाव से पहले प्रदेश बीजेपी का महासचिव नियुक्त किया। इस चुनाव में बीजेपी को राज्य में बड़ी जीत मिली और सीपीएम के शासन का अंत हो गया।

3 लाख से ज्यादा वोटों से जीती थीं लोकसभा चुनाव
2019 के लोकसभा चुनाव में प्रतिमा भौमिक ने वेस्ट त्रिपुरा सीट से 3 लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। वह त्रिपुरा से पहली महिला भाजपा सांसद बनीं और केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल होने वाली राज्य की पहली स्थायी निवासी बनीं। सीएनबीसी-टीवी18 के मुताबिक समाज सेवा में अपने योगदान की वजह से वह 'दीदी' के नाम से जानी जाने लगीं। वर्षों के योगदान की वजह से राज्य में वह भारतीय जनता पार्टी की भी पहचान बन गईं।
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बीजेपी की समर्पित कार्यकर्ता रही हैं प्रतिमा भौमिक
मौकापरस्ती और नेतागीरी सियासत की मौजूदा दुनिया में समानार्थी शब्द बन चुके हैं, लेकिन प्रतिमा भौमिक बीजेपी की समर्पित कार्यकर्ता मानी जाती हैं। वह प्रदेश में अल्पसंख्यकों और महिलाओं से जुड़े मुद्दे से भी जुड़ी रहती हैं और ऐसे मामलों में उनकी सक्रियता बहुत ज्यादा रहती है। वह प्रदेश की परंपरागत कला और संस्कृति की भी समर्थक हैं और उसे प्रोत्साहन देती हैं। धनपुर विधानसभा से वह माणिक सरकार के खिलाफ 1998 में और 2018 दोनों बार चुनाव लड़ी थीं, लेकिन सीपीएम के दिग्गज से हार गई थीं।












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