Population Control: RSS को एसवाई कुरैशी का जवाब, मुस्लिमों के बाद दूसरे नंबर हिंदू हैं आबादी के लिए दोषी

Population Control: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने जिस तरह से जनसंख्या के असंतुलन को लेकर बयान दिया था, उसपर चुनाव आयोग के पूर्व मुखिया एसवाई कुरैशी ने पलटवार किया है। एसवाई कुरैशी ने कहा कि संघ वाले कहते हैं देश में जनसंख्या का असंतुलन मुसलमानों की वजह से हैं क्योंकि वह ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं। लेकिन संघ को यह बात समझनी होगी कि अगर मुसलमान दोषी हैं तो दूसरे नंबर पर हिंदू भी आते हैं, जो जनसंख्या असंतुलन के लिए दोषी हैं। लिहाजा इसे पितृसत्तात्मक नजरिए से नहीं देखना चाहिए।

दूसरे नंबर पर हिंदू दोषी

दूसरे नंबर पर हिंदू दोषी

एसवाई कुरैशी ने कहा कि अच्छी बात यह है कि पिछले दो महीनों में इस तरह की बात सुनने में नहीं आ रही थी, लेकिन अब ये लोग कह रहे हैं कि जनसंख्या में असंतुलन की वजह धर्मांतरण और घुसपैठ है। लेकिन यह गलत है। 53 फीसदी मुसलमान परिवार नियोजन नहीं करते हैं जबकि 42 फीसदी हिंदू भी परिवार नियोजन नहीं करते हैं। लिहाजा अगर मुस्लिम जनसंख्या असंतुलन के लिए जिम्मेदार हैं तो दूसरे नंबर पर हिंदुओं का भी नंबर आता है।

घुसपैठ से बहुत असर नहीं

घुसपैठ से बहुत असर नहीं

बता दें कि एसवाई कुरैशी ने हाल ही में संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की थी। इस मुलाकात को लेकर कुरैशी ने कहा था कि घुसपैठ जरूर हुई है लेकिन सरकार को इसके आंकड़े भी पता होंगे। भारत जैसे इतने बड़े देश में अगर 2-4 लाख या 10 लाख मुसलमान भी आ जाएंगे तो भी संतुलन बहुत ज्यादा नहीं बिगड़ेगा। हां ये हो सकता है कि सीमावर्ती जिलों पर इसका असर कुछ हद तक देखने को मिले, लेकिन बड़े स्तर पर इसका असर नहीं होता है

घुसपैठ रोके सरकार

घुसपैठ रोके सरकार

इसके साथ ही कुरैशी ने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि घुसपैठ को रोके। बांग्लादेश से घुसपैठ से अगर सबसे ज्यादा किसी को नुकसान हुआ है तो वह खुद भारत के मुसलमान हैं। उनकी वजह से भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तानी या फिर बांग्लादेशी कह दिया जाता है। जो मुसलमान बंगाली बोलते हैं उन्हें बांग्लादेशी कह देते हैं। लिहाजा सरकार को पहले घुसपैठ को रोकना चाहिए।

इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हो

इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हो

स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और आमदनी के लिहाज से भारतीय मुसलमान काफी पिछड़े हैं। लिहाजा हमारी कोशिश होनी चाहिए कि इन लोगों को हम जागरूक करें। उन्हें इस तरह का मौलिक ढांचा मुहैया कराए जिससे उनकी स्थिति बेहतर हो। मुसलमानों में कभी भी जागरुकता फैलाने की बात नहीं की जाती है, इनके लिए कहा जाता है कि इन लोगों के साथ बिजनेस मत करो। यह पूरी तरह से देश विरोधी और असंवैधानिक बात है।

भागवत से मुलाकात पर क्या बोले

भागवत से मुलाकात पर क्या बोले

मोहन भागवत से हुई मुलाकात को लेकर कुरैशी ने कहा कि हमने जनसंख्या को लेकर काफी बात की थी। लोगों में इस तरह की अवधारणा है कि मुसलमान ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं, लेकिन यह गलत है। मैंने भागवत जी को बताया कि भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 1991-92 में कहा गया था कि सिर्फ एक बच्चे का फर्क है, लेकिन अब यह घटकर 0.3 पर आ गया है। मुसलमान परिवार नियोजन की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, हिंदुओं की तुलना में मुसलमान अधिक परिवार नियोजन कर रहा है, यही वजह है कि यह अंतर घटा है।

मुस्लिमों को लेकर गलत अवधारणा

मुस्लिमों को लेकर गलत अवधारणा

यही नहीं कुरैशी ने कहा कि ऐसा कहा जाता है कि मुसलमान अधिक शादी करते हैं, कई सारी पत्नियां रखते हैं। लेकिन यह भी पूरी तरह से गलत है। भारत सरकार के अध्ययन के अनुसार मुसलमानों में सबसे कम एक से अधिक शादिया हैं। लिंगानुपात को देखें तो भारत में एक हजार पुरुषों के मुकाबले 940 औरते हैं। यह पिछले 100 साल में सबसे अधिक है। जब देश में प्रति एक हजार मर्दों में 60 लोगों को पत्नियां नहीं मिल रही हैं तो आखिर हिंदू हो या मुसलमान उन्हें एक से अधिक पत्नी कहां से मिलेगी।

जनसंख्या नियंत्रण होना चाहिए

जनसंख्या नियंत्रण होना चाहिए

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चल रही बहस पर कुरैशी ने कहा कि यह अच्छा विचार है। इसे पूरे देश में लागू करना चाहिए। हम मुसलमानों से अपील करेंगे कि वह परिवार नियोजन करें। देश की आधी आबादी परिवार नियोजन नहीं कर रही है। हिंदू और मुस्लिम के बीच जन्म दर में सिर्फ 0.3 फीसदी का अंतर है। गौर करने वाली बात है कि दत्तात्रेय ने कहा था कि धर्मांतरण की वजह से देश में हिंदुओं की आबादी कम हो रही है। जनसंख्या असंतुलन की वजह से कई देशों में विभाजन की स्थिति तक पैदा हुई। भारत का भी विभाजन इसी वजह से हुआ था। उन्होंने कहा कि जो लोग धर्म परिवर्तन करें उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।

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