दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना मुश्किल, अब भी खतरनाक स्तर पर है प्रदूषण
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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में दिवाली के बाद से प्रदूषण काफी बढ़ गया है। अब भी वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचा हुआ है। एक दिन पहले ही पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण ने हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी थी। वहीं वायु गणवत्ता सूचकांक से पता चलता है कि शनिवार को भी दिल्ली वालों को प्रदूषण से राहत मिलने के कोई आसार नहीं हैं।

आज लोधी रोड इलाके में पीएम 2.5-500 और पीएम 10- 500 रहा है। जो कि एक खतरनाक स्थिति है। आज भी धुंध की मोटी परत ने आसमान को ढका हुआ है। जानकारी के मुताबिक दिल्ली की हवा इसी स्थिति में बनी रहने के आसार हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पड़ोसी राज्यों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि पड़ोसी राज्यों द्वारा पराली जलाए जाने के कारण दिल्ली की ऐसी हालत हो गई है। यही कारण है कि सभी स्कूलों को 5 नवंबर तक के लिए बंद कर दिया गया है।
पंजाब और हरियाणा में किसानों के पराली जलाने और दिवाली के बाद पटाखों के धुंए से बढ़े प्रदूषण के चलते अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित संस्था 'सफर' के मुताबिक 2 नवंबर से पश्चिमी विक्षोभ का असर दिल्ली-एनसीआर में दिखना शुरू होगा। इसके चलते हवा की चाल में तेजी आएगी और वायू प्रदूषण से राहत मिलनी शुरू होगी।
हालांकि इसके बावजूद वायु प्रदूषण का स्तर 'बेहद खतरनाक' बना रहेगा। देश के दस सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और कानपुर समेत 8 शहर यूपी के दर्ज किए गए।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा है, 'पूरा उत्तर भारत पराली के धुएं की चपेट में है... केंद्र सरकार खुद कह रही है कि मौजूदा प्रदूषण में 46% पराली की वजह से है। लेकिन केंद्र सरकार क्या कर रही है पूरे उत्तरी भारत को इससे बचाने के लिए? बीजेपी कोई समय सीमा बताएगी कि कब तक पराली जलना बंद करवाएगी?'












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