कौन हैं वो 10 डोनर? जिन्होंने BJP के लिए लगा दिया पैसों का अंबार, कांग्रेस के खाते में 'चिल्लर'!
Political Funding Top 10 Donors: वित्त वर्ष 2023-24 में राजनीति में पैसे का खेल एक बार फिर सुर्खियों में है। ADR (Association for Democratic Reforms) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मिला चंदा बाकी सभी राष्ट्रीय पार्टियों को मिले चंदे से कई गुना ज्यादा है, जिसने अप्रैल 2019 से जनवरी 2024 के बीच ₹6,060.5 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड्स एनकैश किए।
इस रिपोर्ट के मुताबिक, देश की 6 नेशनल पार्टियों को ₹20,000 से ज्यादा के कुल ₹2,544.28 करोड़ के डोनेशन मिले। इसमें BJP अकेले ही ₹2,064.58 करोड़ के साथ सबसे ऊपर रही। वहीं कांग्रेस को मात्र ₹190.3 करोड़ ही मिले। ये चंदा ज्यादातर कॉर्पोरेट और बिजनेस सेक्टर से आया। कुल 88.9% डोनेशन यानी करीब ₹2,262.5 करोड़ बिजनेस एंटिटीज़ से आया। आइए जानते हैं टॉप 10 डोनर में कौन-कौन?

टॉप 10 डोनर, जिन्होंने BJP को भर भर के पैसा दिया
- प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट - ₹880 करोड़ (BJP को ₹723.6 करोड़, कांग्रेस को ₹156.4 करोड़)
- ट्रायम्फ इलेक्टोरल ट्रस्ट - ₹127.5 करोड़ (सिर्फ BJP को)
- डेराइव इन्वेस्टमेंट्स कंपनी - ₹53.2 करोड़ (BJP को ₹50 करोड़, कांग्रेस को ₹3.2 करोड़)
- दिनेश चंद्र आर. अग्रवाल इंफ्राकॉन प्रा. लि. - ₹30 करोड़ (BJP को)
- आईटीसी इन्फोटेक इंडिया लि. - ₹80 करोड़ (पार्टी का नाम नहीं बताया गया)
- भारत बायोटेक - ₹50 करोड़ (पार्टी का नाम नहीं बताया गया)
- एक्मी सोलर एनर्जी प्रा. लि. - ₹51 करोड़ (पार्टी का नाम नहीं बताया गया)
- दिलीप बिल्डकॉन लि. - ₹29 करोड़ (पार्टी का नाम नहीं बताया गया)
- रूंगटा सन्स प्रा. लि. - ₹50 करोड़(पार्टी का नाम नहीं बताया गया)
- मैक्रोटेक डेवलपर्स लि. - ₹27 करोड़(पार्टी का नाम नहीं बताया गया)
कांग्रेस के हिस्से में क्या आया?
जहां BJP को डोनेशन की बरसात मिली, वहीं कांग्रेस को मिला केवल ₹281.19 करोड़ (कॉर्पोरेट से ₹190.3 करोड़ और आम लोगों से ₹90.89 करोड़)। ये BJP की कुल फंडिंग का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है।
Electoral Bond Controversy: क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड और क्यों है विवादों में?
इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम 2017 में शुरू हुई थी और इसे 'डिजिटल और पारदर्शी फंडिंग' के तौर पर पेश किया गया था। लेकिन इसमें सबसे बड़ी कमी ये रही कि बॉन्ड खरीदने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं होती थी, जिससे काले धन और फेवरिटिज्म को बढ़ावा मिलने की आशंका बनी रही।
चंदा लेने में कौन-कौन सी पार्टी टॉप पर रहीं?
- BJP - ₹6,060 करोड़
- तृणमूल कांग्रेस - ₹1,609 करोड़
- कांग्रेस - ₹1,421 करोड़
- बीआरएस - ₹1,214 करोड़
- बीजद - ₹775 करोड़
- DMK - ₹639 करोड़
- YSR कांग्रेस - ₹337 करोड़
- TDP - ₹218 करोड़
- शिव सेना - ₹158 करोड़
- RJD - ₹72.5 करोड़
भारतीय राजनीति में, राजनीतिक दलों को कॉर्पोरेट और व्यावसायिक क्षेत्रों से ऐसे मिलता है डोनेशन...
1. प्रत्यक्ष दान (Direct Donations):
- कॉर्पोरेट दान: कंपनियां राजनीतिक दलों को सीधे धनराशि दान कर सकती हैं। 2017 में, वित्त अधिनियम के माध्यम से, कंपनियों के लिए राजनीतिक दलों को असीमित राशि दान करना संभव हो गया, जिससे पहले की 7.5% की सीमा हटा दी गई।
- व्यक्तिगत दान: व्यक्तिगत दाताओं से ₹20,000 से कम के दान की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाती है, जिससे छोटे दान गुमनाम रह सकते हैं।
2. इलेक्टोरल ट्रस्ट (Electoral Trusts):
सरकार ने 2013 में 'इलेक्टोरल ट्रस्ट्स स्कीम' शुरू की, जिसमें कंपनियों और व्यक्तियों को एक ट्रस्ट के माध्यम से राजनीतिक दलों को दान करने की अनुमति दी गई। ये ट्रस्ट दान एकत्र करते हैं और उन्हें राजनीतिक दलों में वितरित करते हैं, जिससे दान की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ती है।
3. इलेक्टोरल बॉन्ड्स (Electoral Bonds):
2017 में, सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स पेश किए, जो एक वित्तीय साधन थे, जिससे दाता गुमनाम रूप से राजनीतिक दलों को दान कर सकते थे। दाता इन बॉन्ड्स को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से खरीदते थे और उन्हें राजनीतिक दलों को सौंपते थे, जो उन्हें भुना सकते थे। हालांकि, फरवरी 2024 में, सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को असंवैधानिक घोषित किया, यह मानते हुए कि यह पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ है और नागरिकों के सूचना के अधिकार का उल्लंघन करता है।
4. अज्ञात स्रोतों से आय (Income from Unknown Sources):
राजनीतिक दलों की आय का एक बड़ा हिस्सा अज्ञात स्रोतों से आता है। उदाहरण के लिए, 2021-22 के वित्तीय वर्ष में, आठ राष्ट्रीय दलों की कुल आय का 66% अज्ञात स्रोतों से था। इनमें से अधिकांश धनराशि इलेक्टोरल बॉन्ड्स और छोटे दान के माध्यम से आई थी, जिनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की जाती।
भारतीय राजनीतिक दल विभिन्न माध्यमों से कॉर्पोरेट और व्यावसायिक क्षेत्रों से धन प्राप्त करते हैं, जिनमें प्रत्यक्ष दान, इलेक्टोरल ट्रस्ट्स, और इलेक्टोरल बॉन्ड्स शामिल हैं। हालांकि, इन माध्यमों में पारदर्शिता की कमी के कारण आलोचना होती रही है। ये रिपोर्ट एक बार फिर बताती है कि भारतीय राजनीति में पैसे की ताकत कितनी बड़ी हो गई है। जहां BJP के पास फंडिंग की कोई कमी नहीं, वहीं बाकी पार्टियां खासकर कांग्रेस सिर्फ 'चिल्लर' पर चल रही है। अब ये बहस जरूरी हो गई है कि चुनावों में पैसे का खेल कितना सही है और इसमें पारदर्शिता कैसे लाई जाए।












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