दाऊद और रैम्बो से प्रभावित था आनंदपाल, जेल में हर माह पीता था 20 हजार का दूध
आज भले ही उसे पुलिस ने मार गिराया हो लेकिन काफी लम्बे वक्त तक पूरे पुलिस महकमें को उसने जमकर छकाया। इस बात से इनकार भी नहीं कि जा सकता कि आनंदपाल पर कई नेताओं और प्रभावशाली लोगों का हाथ था।
नई दिल्ली। गैंगस्टर आनंदपाल सिंह को राजस्थान के सबसे चर्चित बदमाशों में से एक कहा जाए तो शायद गलत नहीं होगा। आनंदपाल सिंह की पहचान राजस्थान के अन्य बदमाशों से बिल्कुल अलग थी। यूं तो चम्बल के बीहड़ों से कई देसी डाकू देशभर में चर्चित हुए लेकिन आनंदपाल अपने स्टाइलिश अंदाज और पुलिस पर हावी रहने के कारण हमेशा चर्चाओं में रहा। आज भले ही उसे पुलिस ने मार गिराया हो लेकिन काफी लम्बे वक्त तक पूरे पुलिस महकमें को उसने जमकर छकाया। इस बात से इनकार भी नहीं कि जा सकता कि आनंदपाल पर कई नेताओं और प्रभावशाली लोगों का हाथ था। तभी तो वो राजस्थान के अपराध जगत का बेताज बादशाह बन गया।

रैम्बो से प्रेरित होकर खेलता था खून की होली
इसे आनंदपाल का बेजोड़ नेटवर्क कहें या प्रभाव की पिछले डेढ़ साल में आनंदपाल को पकड़ने के लिए पुलिस ने सैंकड़ों छापेमारी की। लेकिन हर बार आनंदपाल को समय से पूर्व ही इसकी जानकारी मिल जाया करती थी और वह फरार हो जाया करता था। हॉलीवुड के मशहूर किरदार रैम्बो से प्रेरित होकर वह अपने दुश्मनों के बीच खून की होली खेला करता था।

दाऊद से प्रेरित होकर करता था वसूली
वहीं दाऊद से प्रभावित होकर वह वसूली और अपराध करता था। एनकाउंटर में मारे गए आनंदपाल के बारे में जानने के लिए आज हर कोई उत्सुक है। मसलन उसकी शुरुआत कहां से हुई और वह कैसे जुर्म की दुनिया में छा गया। आज हम आपको इन्हीं सबके बारे में बताते हैं।

नागौर के छोटे से गांव से राजस्थान का सबसे चर्चित गैंगस्टर बनने तक का सफर
आनंदपाल सिंह नागौर के लाडनूं तहसील के सांवराद गांव में निवास करता था। आनंदपाल जुर्म की दुनिया में बलबीर बानूड़ा के कारण आया। यह बात 1997 की है जब बलबीर और राजू ठेहट गहरे दोस्त थे और शराब के धंधे से जुड़े हुए थे। शराब के ठेके संभालने वाले विजयपाल जो की बलबीर का साला था उससे राजू का किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। झगड़ा इस कदर बढ़ गया कि राजू ने विजयपाल की हत्या कर दी। बस इसी के बाद से दो पक्के दोस्त दुश्मन बन गए।

2006 में बलबीर की गैंग में शामिल हुआ आनंदपाल
इसके बाद राजू से अलग होकर बलबीर ने अपना गैंग बना लिया। कुछ समय बाद 2006 में आनंदपाल इसकी गैंग में शामिल हो गया। देखते ही देखते आनंदपाल बलबीर गैंग का सबसे काबिल गैंगस्टर बन गया। आनंदपाल ने धड़ाधड़ आपराधिक वारदातों को अंजाम देने लगा। और देखते ही देखते एक पावरफुल गैंगस्टर के रूप में स्थापित हो गया। राजू ठेहट और बलबीर गैंग के बीच अक्सर श्रेष्ठता की जंग होती रहती थी जिसमें कभी बलबीर की गैंग तो कभी राजू की गैंग भारी पड़ा करती थी।

हाईटेक आनंदपाल पर कितने मामले दर्ज और किन वारदातों से आया चर्चा में
गैंगस्टर आनंदपाल पर हत्या, लूट, डकैती, अपहरण जैसे करीब 24 मामले दर्ज हैं। गैंग में शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद आनंदपाल ने डीडवाना में जीवनराम गोदारा को ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर मार डाला था। इसके बाद चर्चित गोपाल फोगावट हत्याकांड को भी आनंदपाल ने अंजाम दिया था। इन दोनों मामलों के बाद विधानसभा में हंगामा हुआ था। अकेले डीडवाना में ही आनंदपाल पर 13 मामले दर्ज हैं। ऐसी ही कई वारदातें हैं जिन्हें आनंदपाल ने अंजाम दिया।

आनंदपाल एक हाईटेक अपराधी
आनंदपाल एक हाईटेक अपराधी था वह वारदात को अंजाम देने के लिए ऑटोमैटिक मशीन गन से लेकर एके-47 तक इस्तेमाल किया करता था। साथ ही वह बुलेट प्रूफ जैकेट का अक्सर इस्तेमाल किया करता था।

जेल में भी जारी थे नवाबी शौक
कई बड़ी वारदातों को अंजाम देने वाले आनंदपाल के पास पैसे की कोई कमी नहीं थी। वह हर चीज स्टाइल से करने में यकीन रखता था। जैसे हैट पहनना, ब्रांडेड चश्मे से लेकर कपड़े और बूट पहनना, हाईटेक हथियार रखना इत्यादी। आनंदपाल के नवाबी शौक जेल में भी जारी रहते थे। बताया जाता है कि जब वह अजमेर जेल में बंद था तो उसके लिए जेल में 20 हजार रुपए प्रतिमाह का दूध, छाछ और दही जाता था। इन सब का भुगतान एडवांस में किया जाता था। यही नहीं आनंदपाल जब चाहता उसकी प्रेमिका अनुराधा उससे मिलने जेल में चली आती थी। आनंदपाल जेल में ही कसरत करता था और अपने स्मार्टफोन से कई फोटो अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपलोड भी किया करता था।

जेल से कैसे हुआ फरार
आनंदपाल ने जेल से फरार होने के लिए पूरा षड़यत्र रचा था। साल 2015 में आनंदपाल को कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया था। इस दौरान वापस लौटते वक्त आनंदपाल ने पुलिसकर्मियों को नशीली मिठाई खिलाई थी। नशीली मिठाई खाने के बाद कुछ पुलिसकर्मी तो बेहोश हो गए और जो बचे उन पर फायरिंग करते हुए आनंदपाल वहां से फरार हो गया। इस प्रकार पेशी से भाग जाने के कारण पुलिस की काफी किरकिरी भी हुई थी। तभी से पुलिस आनंदपाल की तलाश में थी। पुलिस आनंदपाल की फरारी से लेकर उसके एनकाउंटर में मारे जाने तक लगातार छापेमारी करती रही। आनंदपाल को पकड़ने के लिए 21 आईपीएस के अलावा 3 हजार पुलिसकर्मियों को कई टीमों में बांटा गया था। वहीं आनंदपाल को ढूंढ निकालने के लिए पुलिस ने करीब 700 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था।












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