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'UNESCO विश्व धरोहर केंद्र को भारत 10 लाख डॉलर का योगदान देगा', PM मोदी की बड़ी बातें

PM Modi on UNESCO: नई दिल्ली में भारत मंडपम में विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र के उद्घाटन समारोह में रव‍िवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श‍िरकत की। यहां पीएम मोदी ने घोषणा की कि भारत यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र को दस लाख डॉलर का योगदान देगा, ताकि देशों, खासकर वैश्विक दक्षिण के देशों में विरासत संरक्षण के लिए सहायता प्रदान की जा सके।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत वैश्विक विरासत के संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी मानता है, और इसलिए, न केवल भारत में बल्कि वैश्विक दक्षिण के देशों में भी विरासत संरक्षण के लिए सहायता प्रदान कर रहा है। आइए 8 प्वाइंट में जानें पीएम मोदी की बड़ी बातें...

PM Narendra Modi

  • 'भारत वैश्विक धरोहरों के संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी मानता है और इसलिए हम न केवल भारत में बल्कि वैश्विक दक्षिण के देशों में भी धरोहरों के संरक्षण के लिए सहायता प्रदान कर रहे हैं। भारत कंबोडिया में अंगकोर वाट, वियतनाम में चाम मंदिर और म्यांमार में बागान स्तूप जैसी कई धरोहरों के संरक्षण में सहायता कर रहा है।'
  • 'भारत यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र को एक मिलियन डॉलर का योगदान देगा। इस अनुदान का उपयोग क्षमता निर्माण, तकनीकी सहायता और विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण के लिए किया जाएगा।'
  • 'युवा पेशेवरों के लिए भारत में विश्व धरोहर प्रबंधन में एक प्रमाण पत्र कार्यक्रम भी शुरू किया गया है। आज विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र के माध्यम से भारत की अपील है कि एक-दूसरे की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए एक साथ आएं। आइए हम मानव कल्याण की भावनाओं के विस्तार के लिए एकजुट हों।'
  • 'भारत का विजन विकास और विरासत दोनों है। पिछले 10 सालों में भारत ने आधुनिक विकास के नए आयाम छुए हैं और अपनी विरासत पर गर्व करने का संकल्प भी लिया है। चाहे काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर हो, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो या प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का आधुनिक परिसर हो। आज आयुर्वेद का लाभ पूरी दुनिया को मिल रहा है, लेकिन यह भारत की वैज्ञानिक विरासत है।'

  • 'भारत की विरासत सिर्फ इतिहास नहीं है, यह विज्ञान भी है। भारत की विरासत में बेहतरीन इंजीनियरिंग की शानदार यात्रा देखने को मिलती है। दिल्ली से कुछ सौ किलोमीटर की दूरी पर 3500 मीटर की ऊंचाई पर केदारनाथ मंदिर है।'
  • 'आज भी वह स्थान भौगोलिक रूप से इतना चुनौतीपूर्ण है कि लोगों को बहुत पैदल चलना पड़ता है या हेलीकॉप्टर से जाना पड़ता है। यह आश्चर्यजनक है कि केदारनाथ मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में किया गया था। इसकी इंजीनियरिंग में कठोर वातावरण और ग्लेशियरों को ध्यान में रखा गया था।'
  • 'दुनिया दिल्ली को भारत की राजधानी के तौर पर जानती है, लेकिन यह शहर हजारों साल पुरानी विरासत का केंद्र भी है। यहां हर कदम पर आपको ऐतिहासिक विरासत देखने को मिलेगी। यहां से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर कई टन वजनी लौह स्तंभ है। एक ऐसा स्तंभ जो 2000 साल से खुले में खड़ा है, फिर भी उसमें आज तक जंग नहीं लगी है। इससे पता चलता है कि उस समय भी भारत का धातु विज्ञान कितना उन्नत था।'
  • 'पूर्वोत्तर भारत के ऐतिहासिक "मैदाम" को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का प्रस्ताव है। यह भारत का 43वां विश्व धरोहर स्थल होगा और सांस्कृतिक विश्व धरोहर का दर्जा पाने वाला पूर्वोत्तर भारत का पहला धरोहर स्थल होगा।'

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