कन्याकुमारी से PM मोदी का है सालों पुराना रिश्ता, 'नरेंद्र' पहले भी कर चुके हैं वहां मेडिटेशन, तैरकर पहुंचे थे
PM Narendra Modi Meditation: लोकसभा चुनाव 2024 का आखिरी चरण का चुनाव प्रचार थमने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कन्याकुमारी पहुंचे और वहां स्वामी विवेकानंद रॉक मेमोरियल के ध्यान मंडपम् में साधना करने में लगे हैं। पीएम मोदी 45 घंटे, यहां मेडिटेशन करेंगे और 1 जून को शाम में बाहर आएंगे।
पीएम मोदी का कन्याकुमारी से सालों पुराना रिश्ता है। वहीं 131 साल पहले ठीक इसी जगह 'नरेंद्र' ने ध्यान लगाया था। उस वक्त 'नरेंद्र' तैरकर कन्याकुमारी के उसी शिला पर पहुंचे थे, जहां आज पीएम मोदी साधना में लीन हैं। असल में ये नरेंद्र कोई और नहीं बल्कि स्वामी विवेकानंद हैं।

जब 131 साल पहले 'नरेंद्र' पहुंचे थे कन्याकुमारी ध्यान करने
असल में स्वामी विवेकानंद 1892 में कन्याकुमारी के तट पर ध्यान लगाया था। वहां ध्यान करने के बाद वो शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म संसद में भाषण देने पहुंचे थे। असल में 30 साल तक स्वामी विवेकानंद को उनके मूल नाम नरेंद्र नाथ दत्त से जाना जाता था। बाद में इन्हें दुनिया में स्वामी विवेकानंद के नाम से जाने जाना लगा है।
शिकागो की विवेकानंद वेदांत सोसायटी की वेबसाइट के मुताबिक कन्याकुमारी में ध्यान करने के बाद, स्वामी विवेकानंद 31 मई 1893 को एसएस पेनिनसुलर पर सवार होकर बॉम्बे (अब मुंबई) से अमेरिका के लिए रवाना हुए थे। शिकागो में दिए भाषण के बाद विवेकानंद दुनियाभर में मशहूर हो गए थे।

शिकागो एडवोकेट में उनके ऐतिहासिक भाषण के बाद एक रिपोर्ट में कहा गया था कि, "अंग्रेजी का उनका ज्ञान ऐसा है जैसे कि वह उनकी मातृभाषा हो।''
PM मोदी का कन्याकुमारी से 33 साल पुराना रिश्ता
पीएम नरेंद्र मोदी की इस बीच कन्याकुमारी से सालों पुरानी तस्वीर वायरल हो रही है। पीएम मोदी की 33 साल पुरानी तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आईं और लोगों में चर्चा का विषय बन गई हैं।
11 दिसंबर 1991 की ये तस्वीर एकता यात्रा की हैं, जो कन्याकुमारी में प्रतिष्ठित विवेकानंद रॉक मेमोरियल से शुरू हुई थी और कश्मीर में खत्म हुई थी।

वायरल तस्वीरों में पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी समेत सभी 'एकता यात्री' स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करते देखे जा सकते हैं।
असल में एकता यात्रा, जिसे एकता मार्च भी कहा जाता है, दिसंबर 1991 में कन्याकुमारी से शुरू हुई थी और 26 जनवरी 1992 को श्रीनगर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ इसका समापन हुआ।
एकता यात्रा का नेतृत्व वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने किया था, जबकि उस समय भाजपा कार्यकर्ता रहे नरेंद्र मोदी ने मार्च के आयोजन में मुख्य भूमिका निभाई थी।












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