बनारस में पीएम मोदी बोले- मैं काशी की मर्यादा नहीं झुकने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को वाराणसी पहुंचे हुए हैं। जहां उन्होंने रोड शो भी किया और सभा को संबोधित भी किया। सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए देशहित के अलावा किसी और का हित नहीं सोचूंगा। चाहेंगे वो पुलवामा का संकेत हो, उरी की घटना हो या फिर मेरे जीवन का अन्य कोई पल, मेरा एक ही मंत्र है और वही मंत्र लेकर मैं जिया हूं, इंडिया फर्स्ट।

काशी ने मुझे आतंकियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देने का साहस दिया

काशी ने मुझे आतंकियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देने का साहस दिया

पीएम ने कहा कि काशी ने मुझे सिर्फ सांसद नहीं, पीएम बनने का आशीर्वाद दिया। मुझे आतंकियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देने का साहस दिया। हमने उन्हें बता दिया कि नया भारत सहता और कहता नहीं है, वो आतंक को मुंह तोड़ जवाब देता है। पिछले पांच सालों में भारत में किसी शहर, किसी पवित्र स्थान या मंदिर पर कोई आतंकी हमला नहीं हो सका है। इतना बड़ा कुंभ का मेला सुख शांति के साथ देश ने अनुभव किया। आतंकवादियों अब जम्मू-कश्मीर के बहुत थोड़े से दायरे में सिमट कर रह गया है।

पुलवामा हमल के बाद अब तक 42 आतंकियों को ठिकाने लगाया जा चुका है

पीएम ने कहा कि पुलवामा में उन्होंने 40 जवानों को शहीद किया, इस हमले के बाद उसी क्षेत्र में अब तक 42 आतंकवादियों को ठिकाने लगाया जा चुका है। ये हमारा काम करने का तरीका है। पीएम ने कहा कि 5 वर्ष पहले जब काशी की धरती पर मैंने कदम रखा, तब मैंने कहा था कि मां गंगा ने मुझे बुलाया है।मैया ने ऐसा दुलार दिया, काशी के बहन-भाइयों ने इतना प्यार दिया कि बनारस के फक्कड़पन में ये फकीर भी रम गया। ये मेरा सौभाग्य है कि काशी कि वेद परंपरा को ज्ञान के विश्लेषण व तार्किक अनुभवों से जुड़ सका।

वाराणसी ने पीएम बनने का आशीर्वाद ही नहीं 130 करोड़ भारतीयों के विश्वास की ताकत दी

वाराणसी ने पीएम बनने का आशीर्वाद ही नहीं 130 करोड़ भारतीयों के विश्वास की ताकत दी

पीएम ने कहा कि काशी ने मुझे सिर्फ एमपी नहीं पीएम बनने का आशीर्वाद दिया। मुझे 130 करोड़ भारतीयों के विश्वास की ताकत दी। समर्थ, सम्पन्न और सुखी भारत के लिए विकास के साथ-साथ सुरक्षा अहम है। साथियों, मेरा ये मत रहा है कि परिवर्तन तभी सार्थक और स्थायी होता है, जब जन-मन बदलता है। इस जन-मन को साधने के लिए तपस्या करनी पड़ती है। मैं मानता हूं कि इस समय भारत भी तपस्या के दौर में है। वो खुद को साध रहा है और इस साधना में हम सब एक सेवक हैं, साधक हैं। जो सपना मन में है वो पूरा हो गया ऐसा मैं कभी दवा नहीं करता हूँ लेकिन उस सपने को पूरा करने की दिशा में हमारा रास्ता और रफ़्तार सही है ये मैं ज़रूर कह सकता हूं।

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