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गुजरात में जन्‍मा था औरंगजेब, मरने से पहले बेटे को लिखी थी चिट्ठी, पढ़ें दिलचस्‍प कहानी

By योगेंद्र कुमार
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      Rahul Gandhi की तुलना हो रही है Gujarat में जन्मे Aurangzeb से, Know Why । वनइंडिया हिंदी

      नई दिल्‍ली। राहुल गांधी ने सोमवार को कांग्रेस अध्‍यक्ष पद के लिए नामांकन किया। पार्टी में राहुल गांधी की ताजपोशी को लेकर माहौल कुल मिलाकर ठीक-ठाक ही रहा, सिवाय शहजाद पूनावाला की बगावत के। रॉबर्ट वाड्रा के बहनोई साहब के बड़े भाई हैं शहजाद पूनावाला। इनके सवालों को लेकर एक चैनल के पत्रकार ने मणिशंकर अय्यर से पूछा तो जनाब मुंगल काल में चले गए और बोले कि क्‍या जहांगीर की जगह पर शाहजहां आए...तब कोई इलेक्‍शन हुआ। शाहजहां की जगह औरंगजेब आए... तब क्‍या कोई इलेक्‍शन हुआ? औरंगजेब का जिक्र आते ही बीजेपी ने बिजली की तेजी के साथ पलटवार किया और इस तरह औरंगजेब एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया। गुजरात विधानसभा चुनाव में रैली कर रहे पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को औरंगजेब का नाम ले लेकर कांग्रेस को घेरा। आखिर ऐसा क्‍या है इस मुगल शासक में, जो इसका नाम आते ही सियासत बुलेट ट्रेन की गति से भागने लगती है। आइए आपको बताते हैं औरंगजेब की कहानी और उसका गुजरात कनेक्‍शन भी। 

      मुमताज थीं औरंगजेब की मां

      मुमताज थीं औरंगजेब की मां

      मुगल शासक शाहजहां और उनकी बेगम मुमताज महल का बेटा था औरंगजेब। उसका जन्‍म वर्ष 1618 में गुजरात के दाहोद में हुआ था। उस वक्‍त शाहजहां के पिता जहांगीर का शासन था और शाहजहां गुजरात में सूबेदार के पद तैनात थे। औरंगजेब का जन्‍म दाहोद के ही किले में हुआ था, जिसे गुजरात में 'औरंगजेब नो किलो' के नाम से जाना जाता है। दाहोद को पहले दोहाद कहा जाता है, जिसका मतलब होता दो हदें, मतलब दो बॉर्डर पर बसी एक जगह। शासक बनने से पहले औरंगजेब को गुजरात का ही सूबेदार बनाया गया था और उसकी ट्रेनिंग अहमदाबाद में हुई थी।

      बेटे को लिखा था मातृभूमि के बारे में पत्र

      बेटे को लिखा था मातृभूमि के बारे में पत्र

      प्रसिद्ध इतिहासकार मानेकशाह कम्मिशरियात ने अपनी किताब में औरंगजेब के गुजरात कनेक्‍शन के बारे में लिखा है। गुजरात के इतिहास पर लिखी इस किताब में उन्‍होंने 1573 से 1758 तक के मुगल शासन के बारे में बताया है। इनकी मानें तो अपने अंतिम दिनों में औरंगजेब ने अपने बड़े बेटे मोहम्‍मद आजम को एक पत्र लिखा था।

      'दाहोद के लोगों पर नरम रहना'

      'दाहोद के लोगों पर नरम रहना'

      1704 में लिखे गए इस पत्र में औरंगजेब ने अपने बेटे से अपील की थी कि वह दाहोद के लोगों पर हमेशा दयालु रहे और उनकी जन्‍मभूमि का हमेशा सम्‍मान करे। मोहम्‍मद आजम उस समय गुजरात के सूबेदार थे। इस पत्र को लिखने के तीन साल बाद 1707 में औरंगजेब इस दुनिया को छोड़ गया था।

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      English summary
      PM Narendra Modi Aurangzeb Raj Dig, read here full profile of Aurangzeb

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